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भोजपुर:विश्व पर्यावरण दिवस पर कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम का पर्यावरण पर प्रशिक्षण का आयोजन।

आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)06 जून। बुधवार को विश्व पर्यावरण दिवस पर कृषि विज्ञान केंद्र भोजपुर द्वारा जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम का पर्यावरण पर प्रशिक्षण का आयोजन किया गया ।कार्यक्रम का उद्घाटन संयुक्त रूप से कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉक्टर प्रवीण कुमार द्विवेदी एवं जिला कृषि पदाधिकारी भोजपुर श्री शत्रुघ्न साहू द्वारा संयुक्त रूप से किया गया । इस अवसर पर डॉक्टर द्विवेदी ने जानकारी दी कि आज पूरे विश्व में तापमान में वृद्धि होने के कारण पर्यावरण असंतुलित हो रहा है साथ ही वर्षा का संतुलन पूर्व की तुलना में काफी उथल-पुथल भरा हो गया है। तापमान को नियंत्रित करने के लिए वृक्षों की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है, इनके द्वारा वर्षा जल का संरक्षण बेहतर तरीके से होता है साथ ही भूमि संरक्षण में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। आवश्यकता है आज जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम घर का पानी घर में, खेत का पानी खेत में एवं गांव का पानी गांव में ही संरक्षित करने की तकनीक का बेहतर तरीके से प्रयोग किया जाए। इस कार्यक्रम में उप परियोजना निदेशक (आत्मा) राणा राजीव रंजन सिंह , सहायक निदेशक (सस्य) डॉ बृजेश कुमार, सहायक निदेशक (मृदा) अंशु राधे, सहायक निदेशक (उद्यान) दिवाकर भारती, कृषि वैज्ञानिक जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम केभीके भोजपुर के अतिरिक्त कृषि विभाग के पदाधिकारी तथा प्रसार कार्यकर्ताओ ने अपने विचार व्यक्त किए।
जिला कृषि पदाधिकारी ने आह्वान किया कि आने वाले बरसात में सजग रह कर भूमि जल संरक्षण के साथ ज्यादा वृक्षों को लगाने पर ध्यान देना होगा। राणा राजीव रंजन सिंह ने जानकारी दी की बिहार में भूगर्भी जलस्तर नीचे गिर जाने के कारण लोगों पूरा जीवन टैंकर पर आधारित हो गया है। आने वाले समय में यह टैंकर भी शायद उनकी प्यास बुझाने में समर्थ नहीं होंगे।कृषि वैज्ञानिक शशी भूषण कुमार ने बताया कि आज जिले में जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम के अंतर्गत पानी की बचत के लिए फसल प्रणाली में बदलाव करते हुए ज्यादा से ज्यादा श्रीअन्न की खेती के साथ ही तिलहन एवं दलहन तथा अंतर्वत्ति एवं मिश्रित खेती का प्रशिक्षण एवं प्रत्यक्षण व्यापक स्तर पर किया जा रहा है।
सहायक निदेशक उद्यान ने बताया कि जिले में बागवानी मिशन में जल संरक्षण के लिए सूक्ष्म एवं टपक सिंचाई का निरंतर प्रचार प्रचार किया जा रहा है। सहायक निदेशक मृदा की जानकारी दी कि जिले में मिट्टी की जांच में यह बात सामने आ रही है के जिले की मृदा में पानी को अवशोषित करने के लिए आवश्यक जैविक कार्बन का तेजी से ह्रास हो रहा है हमें इसे संरक्षित करने के लिए अपने खेतों में ज्यादा से ज्यादा कृषि अवशेष को जुताई के समय में मिलने की आवश्यकता है जिससे कार्बनिक पदार्थ की मात्रा बड़े और खेतों में जल संरक्षण ज्यादा से ज्यादा हो। धन्यवाद ज्ञापित करते हुए डॉक्टर द्विवेदी ने सुझाव दिया के सभी लोग अपने घरों में विविध अवसरों पर कई प्रकार के कार्यक्रम का आयोजन करते हैं ।उस विशेष अवसर को यादगार बनाने के लिए पौधा रोपण करने की जरूरत है।

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