
आरा/भोजपुर ( डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)21 फ़रवरी।प्रसिद्ध संत जीयर स्वामी जी महाराज के कृपा पात्र आचार्य धर्मेन्द्र जी महाराज (पूर्व कुलपति),श्री त्रिदण्डी स्वामी सेवा आश्रम मे संचालित श्रीमद्भागवत कथा क्रम मे श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का जीवन्त चित्रण करते हुए कहा कि भगवान की सभी बाल लीलाएं मनोहारी, पापहारी,और भक्ति संवर्धक व मोक्षदायिनी है। आचार्य ने नलकूबर और मणिग्रीव की उद्धार की कथा कहते हुए बताया कि धन का सहज दोष है धन का अभिमान और धन की तृष्णा। नलकुबर और मणिग्रीव कुबेर के बेटे हैं।असंयम के कारण नारदजी का अपमान कर बैठे,फलतः शापित होकर अम्लार्जून के वृक्षबन गये।श्रीकृष्ण माखन चोरी करते माता यशोदा पकडी़,ऊखल मे बांध दिया, ऊखल मे बंधन के समय रस्सी दो अंगुल छोटी पड़ जाती।मतलब रस्सी गुण का प्रतीक है,नारायण गुणातीत है, , बंध गये इसलिए कि वे भक्त वत्सल हैं,आखिर यशोदा तो माता ही हैं न। एक बात महत्वपूर्ण है भगवान बंधकर भी बध जीव का उद्धार करते है ,पर श्रेय नहीं लेते।अपने पीछे चलनेवाले ऊखल को श्रेय दिया। कंस अभी भी शांत नहीं, बालकृष्ण के बध हेतु एक एक राक्षसों को भेजा गया, भगवान सबका कल्याण कर ते गये।मतलब दुष्ट अपनी दुष्कर्म और दूष्टता से बाज नहीं आता ,जब तक सांस रहता।कलिया नाग के कारण यमुना जल विषाक्त होगया था,अतः उसका मानमर्दन कर यमुना जी के प्रदूषण मुक्त किया।। श्री कान्हा की सभी बाल लीलाएं- गो पालन,पर्यावरण संरक्षण,स्वदेशी, प्रर्दुषण मुक्ति का संदेश देती है। बाल कृष्ण की बाल लीला को सुन कर भक्त अहलादित होते रहे। दिल्ली से पधारे रघुनंदन रामानुज वैष्णव दास झांकी के सहारे बाल लीलाओं की प्रस्तुति मे सहयोगी बने वहीं जोखन दास और शंभू दास भजन गाकर भक्तों को झूमने के लिए बाध्य कर दिये।
यज्ञ समिति के शिवमोक्षन तिवारी अक्षय कुमार, सौरभ कुमार, सुदर्शन शर्मा, दीपक, अजय, अथर्व कुमार ,पारस लाल,रामजी यादव ,परदीप दुबे,सभी सावधानी से काम कर रहे है।जीपीएस के निदेशक ई.ए.के.तिवारी समर्थ मार्गदर्शन दे रहे है।
