
आरा /भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)21 फ़रवरी। गुरुवार को रांची विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो डा जंग बहादुर पाण्डेय के आयोजकतत्व में छात्र -छात्राओं के हित में ‘ सफलता के मंत्र ‘ पर एक संगोष्ठी का आयोजन हुआ।मुख्य अतिथि के रूप मे इस विषय पर गहन प्रकाश डालते हुए डा पाण्डेय ने कहा कि नीति कहती है कि संसार में अपना कल्याण चाहने वालों को 7 जगहों पर बुलाए जाने पर भी वहाँ नहीं जाना चाहिए,चले गये तो वहां नहीं रहना चाहिए और रह गये तो किसी से नहीं कहना चाहिए – जिसमें वेश्यालय,मदिरालय, जुआलय,हिंसालय,चिकित्सालय, न्यायालय और नरकालय और 7 जगहों पर बिना बुलाए भी वहां अवश्य जाना चाहिए, वहां रहना चाहिए और मौका मिले तो वहां कुछ न कुछ कहना चाहिए -विद्यालय, पुस्तकालय, अनाथालय, अनुसंधानालय,शिक्षकालय,देवालय और स्वर्गालय। इस देश का सौभाग्य या दुर्भाग्य यह है कि जहाँ हमें बिन बुलाए जाना चाहिए वहाँ जाने से कतराते हैं,कोई न कोई बहाना बनाते हैं और जहाँ नहीं जाना चाहिए ,वहाँ बिन बुलाए चले जाते हैं।
डा जे बी पाण्डेय ने कहा कि भारत युवाओं का देश है । भारत के माननीय प्रधानमंत्री के अनुसार भारत की 65% आबादी युवा है।युवा शब्द को उलटने पर हवा शब्द बनेगा।युवा इस देश के प्राण वायु हैं। युवाओं के पास जोश है और बुजुर्गों के पास होश है।यदि युवा अपने जोश में बुजुर्गों के होश को साथ मिला दें, तो सफलता उनके चरण चूमेगी। सफलता के लिए मन को नियंत्रित करना परमावश्यक है और मन को एकाग्र करने का एक अमोघ अस्र है-मन के पहले ‘ न ‘ लगाएं शब्द बनेगा नमन। नमन से मन का अहंकार दूर होगा और मन शांत होगा और मन शुभ कार्य की ओर अग्रसर होगा। मन के पीछे ‘ न ‘ लगाएं शब्द बनेगा मनन। एकाग्र होकर अध्ययन और चिंतन करने की क्रिया का नाम मनन है। नमन + मनन=ज्ञान की प्राप्ति=जीवन में मनोवांछित फल की प्राप्ति होगी। इन्होंने कहाकी
*सूखी उम्मीदों की कोई डाली नहीं होती,*
*बंद किस्मत की कोई ताली नहीं होती।*
*झुक जाए जो मां बाप और गुरु के चरणों में,*
*उसकी झोली कभी खाली नहीं होती।*
संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे संस्थान के निर्देशक प्रो एस के सिंह ने कहा कि यह हम सबके लिए गौरव का संदर्भ है कि हिंदी विभाग के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो डा जे बी पाण्डेय हमारे छात्र छात्राओं को सफलता के राज जैसे महत्वपूर्ण विषय पर मंत्र दे रहे हैं।विद्यार्थियों को अपने माता पिता और गुरु की बात आंख मूंदकर मान लेनी चाहिए, इसी में उनका कल्याण है। अर्थात् अभिवादन,आचरण और वृद्धों की नित्य सेवा से आयु,विद्या ,यश और बल की प्राप्ति होती है। विद्यार्थियों को माता पिता और गुरु की आज्ञा का पालन आंख मूंद कर करना चाहिए।*संस्थान की वरीय शिक्षिका एवं संयोजिका डा नीलू सिंह ने कहा कि जीवन में सफलता के लिए नियमित और एकाग्र चित्त अध्ययन अपेक्षित है। जो आज के विद्यार्थी नहीं कर रहे हैं-यह दुखद एवं चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि विद्या धनं सर्व धन प्रधानम्।डा अमित शेखर तिर्की,डा मनीषा कुमारी, हिंदी विभाग के शोध छात्र रवि कुमार पाण्डेय एवं लक्ष्मण प्रसाद आदि ने भी संगोष्ठी में अपने उद्गार व्यक्त किए। संगोष्ठी में संस्थान के सभी शिक्षक शिक्षिका वृंद उपस्थित रहें। अतिथियों का भव्य स्वागत निर्देशक डा एस के सिंह ने, सरस्वती वंदना डा पूजा कुमार ने,कुशल संचालन डा शिल्पी आभा खलखो ने तथा धन्यवाद ज्ञापन डा सोनी कुमारी ने किया।हॉल छात्र छात्राओं से खचाखच भरा था और सभी डा पाण्डेय के सारगर्भित वक्तव्य को सुनकर अभिभूत थे।समापन राष्ट्रगान से हुआ।
