
RKTV NEWS/आरा ( भोजपुर)10 मई। डॉ कृष्ण दयाल सिंह रचित कहानी और नाटक संग्रह अनायास में संग्रहित सभी रचनाओं का प्रकाशन करते हुए संग्रह में शामिल किए गए “पाठकों के विचार “में विभिन्न गणमान्यों ने अपने अपने विचारों को लिखा है जिसमें प्रथम विचार डॉ मिथिलेश्वर का है।
पाठकों के विचार
डॉ० कृष्ण दयाल सिंह का ‘अनायास’ संग्रह देखा। इस संग्रह में डॉ० सिंह के तीन लघु नाटक ‘गुलसितां’, ‘नेतागिरी’ और ‘नव वर्ष’ तथा एक कहानी ‘पहिल रोपना’ एवं एक काव्य एकांकी ‘थैला-पैसा द्वंद’ संकलित है। एक साथ नाटक, कहानी एवं काव्य-एकांकी का यह संग्रह मुझे अन्य संग्रहों से पृथक जान पड़ा। इससे पूर्व डॉ० सिंह का ‘यत्र-तंत्र कविता-संग्रह प्रकाशित हो चुका है। मेरी जानकारी के तहत उस संग्रह में सिर्फ कविताएं ही संकलित है। उस रूप में इस संग्रह को किसी एक विधा का संग्रह न कह कर डॉ० सिंह की समकालीन रचनाओं का संग्रह कहा जा सकता है।
मेरी राय में डॉ० सिंह के इस संग्रह का मूल्यांकन कला और भाषा के स्तर पर नहीं किया जा सकता। डॉ० सिंह जैसे जमीन से जुड़े लोगों के सृजन का आधार उनकी संवेदना है। उन्होंने जैसा जीवन देखा और समस्याओं के निदान के लिए जो उचित समझा वैसा ही किया। मुझे विश्वास है कि अपने जिन पाठको को ध्यान में रख कर उन्होने लिखा है उनके बीच यह संग्रह पसंद किया जायेगा। इस संग्रह के नाटकों की सार्थकता इनके मंचन में निहित है। डॉ० सिंह से मुझे यह जान कर खुशी हुई है कि इस संग्रह के प्रायः सभी नाटक मंचित हो चुके हैं तथा दर्शकों में सराहे गये हैं।
इस संग्रह के सृजन तक डॉ० सिंह डाक विभाग की नौकरी में थे। नौकरी की व्यस्तता के बीच समय निकाल कर उन्होंने ‘यत्र-तत्र’ तथा ‘अनायास’ नामक यह संग्रह तैयार किया। अब वे सेवानिवृत हो चुके हैं। सृजन के लिए पूरा समय उनके पास है। अब अपने विगत जीवन के अनुभवों को वे कारगर ढंग से व्यक्त कर सकते हैं। मेरी कामना है कि उनकी कलम से और सशक्त और महत्वपूर्ण रचनाओं का सृजन हो ।
डॉ० मिथिलेश्वर
महाराजा हाता, कतिरा, आरा-८०२ ३०१ (बिहार)
दिनांक ८.१०.९८

