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प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के अवसर पर शुभकामनाएं दीं।

RKTV NEWS/ नई दिल्ली 11 मई।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं।
प्रधानमंत्री ने गर्व के साथ वैज्ञानिकों की कड़ी मेहनत और समर्पण को याद किया, जिसके परिणामस्वरूप 1998 में पोखरण में सफल परीक्षण हुए थे। उन्होंने कहा कि वह ऐतिहासिक क्षण भारत की वैज्ञानिक उत्कृष्टता और अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक था।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में प्रौद्योगिकी एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन गई है। यह नवाचार को गति दे रही है, अवसरों का विस्तार कर रही है और विभिन्न क्षेत्रों में राष्ट्र के विकास में योगदान दे रही है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का निरंतर ध्यान प्रतिभा को सशक्त बनाने, अनुसंधान को प्रोत्साहित करने और ऐसे समाधान तैयार करने पर केंद्रित है, जो राष्ट्र की प्रगति और लोगों की आकांक्षाओं, दोनों को पूरा करें।
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि 1998 में आज ही के दिन पोखरण में किए गए परमाणु परीक्षणों ने विश्व को भारत की अद्भुत सामर्थ्य से परिचित कराया। उन्होंने कहा कि हमारे वैज्ञानिक देश के गौरव और स्वाभिमान के सच्चे शिल्पी हैं।
प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा करते हुए कहा कि अग्नि द्युलोक की सर्वोच्च शक्ति है और पृथ्वी पर स्थित समस्त ऊर्जा का मूल स्रोत है। वही अग्नि-तत्त्व पदार्थ के सूक्ष्मतम कणों में निहित अपरिमित शक्ति को जागृत करता है तथा समस्त सृष्टि में ऊर्जा और गति का संचार करता है।

प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर श्रृंखलाबद्ध पोस्ट में लिखा:

“राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं। हमें अपने वैज्ञानिकों की कड़ी मेहनत और समर्पण को याद करते हुए गर्व हो रहा है, जिसके परिणामस्वरूप 1998 में पोखरण में सफल परीक्षण हुए। वह ऐतिहासिक क्षण भारत की वैज्ञानिक उत्कृष्टता और अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक था।
आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में प्रौद्योगिकी एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन गई है। यह नवाचार को गति दे रही है, अवसरों का विस्तार कर रही है और विभिन्न क्षेत्रों में राष्ट्र के विकास में योगदान दे रही है। हमारा निरंतर ध्यान प्रतिभा को सशक्त बनाने, अनुसंधान को प्रोत्साहित करने और ऐसे समाधान विकसित करने पर केंद्रित है जो राष्ट्रीय प्रगति और लोगों की आकांक्षाओं, दोनों को पूरा करते हैं।”
वर्ष 1998 में आज के दिन पोखरण में हुए परमाणु परीक्षण ने दुनिया को भारत के अद्भुत सामर्थ्य से परिचित कराया।

हमारे वैज्ञानिक देश के गौरव और स्वाभिमान के सच्चे शिल्पी हैं।

अग्निर्मूर्धा दिवः ककुत्पतिः पृथिव्या अयम्।

अपां रेतांसि जिन्वति॥”

अग्नि द्युलोक की सर्वोच्च शक्ति है और पृथ्वी पर समस्त ऊर्जा का मूल स्रोत है। वही अग्नि-तत्त्व पदार्थ के सूक्ष्मतम कणों में निहित अपरिमित शक्ति को जागृत करता है तथा समस्त सृष्टि में ऊर्जा और गति का संचार करता है।

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