RK TV News
खबरें
Breaking Newsराष्ट्रीय

विनायक दामोदर सावरकर की पुण्य तिथि पर विशेष।

मातृभूमि! तेरे चरणों में पहले ही मैं अपना मन अर्पित कर चुका हूँ। देश-सेवा ही ईश्वर-सेवा है, यह मानकर मैंने तेरी सेवा के माध्यम से भगवान की सेवा की।

RKTV NEWS/(अनिल सिंह) विनायक सावरकर का जन्म 28मई 1883  में नासिक के निकट भागुर गाँव महाराष्ट्र में हुआ था। उनकी माता राधाबाई तथा पिता दामोदर पन्त सावरकर थे। केवल नौ वर्ष की आयुमे ही माता का स्वर्गवास हैजे की महामारी में तो इसके सात वर्ष बाद सन् 1899 में प्लेग की महामारी में उनके पिता जी भी स्वर्ग सिधारे गए।। इसके बाद विनायक के बड़े भाई गणेश ने परिवार के पालन-पोषण का कार्य सँभाला। दुःख और कठिनाई की इस घड़ी में गणेश के व्यक्तित्व का विनायक पर गहरा प्रभाव पड़ा। विनायक ने शिवाजी हाईस्कूल नासिक से 1901 में मैट्रिक की परीक्षा पास की। बचपन से ही वे पढ़ाकू तो थे ही अपितु उन दिनों उन्होंने कुछ कविताएँ भी लिखी थीं। आर्थिक संकट के बावजूद बाबाराव ने विनायक की उच्च शिक्षा की इच्छा का समर्थन किया। इस अवधि में विनायक ने स्थानीय नवयुवकों को संगठित करके मित्र मेलों का आयोजन किया। शीघ्र ही इन नवयुवकों में राष्ट्रीयता की भावना के साथ क्रान्ति की ज्वाला जाग उठी। सन् 1901 में रामचन्द्र त्रयम्बक चिपलूणकर की पुत्री यमुनाबाई के साथ उनका विवाह हुआ। उनके ससुर जी ने उनकी विश्वविद्यालय की शिक्षा का भार उठाया। 1902 में मैट्रिक की पढाई पूरी करके उन्होने पुणे के फर्ग्युसन कालेज से बी॰ए॰ किया। लंदन प्रवास में

1904 में उन्होंने अभिनव भारत नामक एक क्रान्तिकारी संगठन की स्थापना की। 1905 में बंगाल के विभाजन के बाद उन्होने पुणे में विदेशी वस्त्रों की होली जलाई। फर्ग्युसन कॉलेज, पुणे में भी वे राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत ओजस्वी भाषण देते थे। बाल गंगाधर तिलक के अनुमोदन पर 1906 में उन्हें श्यामजी कृष्ण वर्मा छात्रवृत्ति मिली। इंडियन सोशियोलाजिस्ट और तलवार नामक पत्रिकाओं में उनके अनेक लेख प्रकाशित हुए , जो बाद में कलकत्ता के युगान्तर पत्र में भी छपे। सावरकर रूसी क्रान्तिकारियों से ज्यादा प्रभावित थे10 मई, 1907 को इन्होंने इंडिया हाउस, लन्दन में प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की स्वर्ण जयन्ती मनाई। इस अवसर पर विनायक सावरकर ने अपने ओजस्वी भाषण में प्रमाणों सहित 1857 के संग्राम को गदर नहीं अपितु भारत के स्वातन्त्र्य का प्रथम संग्राम सिद्ध किया।जून, 1908 में इनकी पुस्तक द इण्डियन वॉर ऑफ़ इण्डिपेण्डेंस : 1857 तैयार हो गयी परन्त्तु इसके मुद्रण की समस्या आयी। इसके लिये लन्दन से लेकर पेरिस और जर्मनी तक प्रयास किये गये किन्तु वे सभी प्रयास असफल रहे। बाद में यह पुस्तक किसी प्रकार गुप्त रूप से हॉलैण्ड से प्रकाशित हुई और इसकी प्रतियाँ फ्रांस पहुँचायी गयीं।इस पुस्तक में सावरकर ने 1857 के सिपाही विद्रोह को ब्रिटिश सरकार के खिलाफ स्वतन्त्रता की पहली लड़ाई बताया।इस पुस्तक को सावरकार जी ने पीक वीक पेपर्स व स्काउट्स पेपर्स के नाम से भारत पहुचाई थी।

Related posts

कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग द्वारा हैदराबाद में“जलवायु समुत्‍थान कृषि”पर 4-6 सिंतबर तक तीन दिवसीय जी 20 तकनीकी कार्यशाला का आयोजन।

rktvnews

गढ़वा:“मनरेगा का विश्वास, रोजगार से विकास” अभियान के तहत जिला स्तरीय समीक्षा बैठक एवं विशेष रोजगार दिवस का आयोजन।

rktvnews

भाजपा भोजपुर द्वारा महायोद्धा दानवीर भामाशाह की जयंती मनाई गई।पूर्व मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद हुए शामिल।

rktvnews

गोपालगंज:जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह जिला पदाधिकारी मो0 मकसूद आलम के द्वारा ई0वी0एम0/वीवीपीएटी वेयर हाउस का मासिक निरीक्षण किया गया।

rktvnews

भोजपुर:प्रथम अंतर विद्यालय साफ्ट बाल क्रिकेट प्रतियोगिता में लोटस इंटरनेशनल विद्यालय विजयी।

rktvnews

जनकल्याण और विकास की सभी योजनाएं जारी रहेंगी:मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

rktvnews

Leave a Comment