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मुजफ्फरपुर:कमांड क्षेत्र विकास योजना के आधुनिकीकरण से बदलेगी मुजफ्फरपुर की सिंचाई व्यवस्था।

किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम: 2450 हेक्टेयर कृषि भूमि में किसानों को मिलेगी सिंचाई सुविधा।

 

जिलाधिकारी ने स्थलीय निरीक्षण कर प्रगति का लिया जायजा।

RKTV NEWS/मुजफ्फरपुर(बिहार)14 जनवरी।
कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के माध्यम से सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने और किसानों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत कमांड क्षेत्र विकास एवं जल प्रबंधन योजना का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। यह योजना जल शक्ति मंत्रालय द्वारा संचालित की जा रही है, जिसे बिहार में मुजफ्फरपुर एवं छपरा जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जा रहा है। यह पहल न केवल सिंचाई की उपलब्धता सुनिश्चित करेगी, बल्कि जल संरक्षण, कृषि उत्पादकता में वृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने में भी अहम भूमिका निभाएगी।
इस योजना का प्रमुख उद्देश्य किसानों को सुनिश्चित एवं समयबद्ध सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना, कृषि आय को बढ़ावा देना, आधुनिक तकनीकों के माध्यम से खेती को युवाओं के लिए आकर्षक बनाना तथा प्रशिक्षण के जरिए किसानों की क्षमता का संवर्धन करना है। साथ ही पानी की बचत करने वाली तकनीकों को अपनाकर फसलों की पैदावार बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। विशेष रूप से उच्च कृषि उत्पादकता प्राप्त करने और जल की बर्बादी को कम करने के लिए ड्रिप सिंचाई एवं अन्य माइक्रो इरिगेशन तकनीकों को बढ़ावा दिया जाएगा।
योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें पारंपरिक खुली नहरों के स्थान पर भूमिगत प्रेशराइज्ड पाइप इरिगेशन नेटवर्क का उपयोग किया जाएगा। यह नेटवर्क प्रति फार्म एक हेक्टेयर तक फैला होगा, जिससे खेत के अंतिम छोर तक समान रूप से पानी की आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी। इस प्रणाली से न केवल पानी की बर्बादी रुकेगी, बल्कि वास्तविक समय में निगरानी, बेहतर जल लेखांकन और उच्च जल उपयोग दक्षता भी प्राप्त की जा सकेगी। आधुनिक एवं वैज्ञानिक कृषि को बढ़ावा देने के लिए उच्च तकनीकों का प्रयोग इस योजना का अहम हिस्सा है।
मुजफ्फरपुर जिले में इस योजना को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया गया है। इसके अंतर्गत तिरहुत मुख्य नहर से पानी को भूमिगत प्रेशराइज्ड पाइप इरिगेशन नेटवर्क के माध्यम से लगभग 2450 हेक्टेयर कृषि भूमि में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इससे जिले के हजारों किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा और खेती की लागत में कमी आएगी।
योजना के क्रियान्वयन की तैयारियों का जायजा लेने के लिए जिला पदाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने अधिकारियों की टीम के साथ मुसहरी प्रखंड अंतर्गत द्वारिका नगर का भ्रमण कर स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान तिरहुत नहर के अधीक्षण अभियंता एवं कार्यपालक अभियंता द्वारा योजना की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की गई। अधिकारियों ने बताया कि योजना के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार कर निविदा प्रक्रिया के माध्यम से एजेंसी का चयन किया जाएगा। चयनित एजेंसी द्वारा कार्य को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण करने की योजना बनाई गई है।
इस परियोजना के तहत मुजफ्फरपुर जिले के तीन प्रमुख प्रखंडों—कुढ़नी, मुसहरी एवं मुरौल—के अंतर्गत लगभग 26 गांवों के किसानों के खेतों तक तकनीक आधारित सिंचाई की सुगम, सुरक्षित एवं सहज सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
मुसहरी प्रखंड में बैकठपुर पंचायत के द्वारिका नगर, जलालपुर, जलालपुर बलभद्र, माधोपुर एवं बैकठपुर ग्राम शामिल हैं। इसके अतिरिक्त छपरा मेघ पंचायत के छपरा मेघ ग्राम तथा मनिका हरिकेश पंचायत के सुतिहारा, नयागांव और मनिका हरिकेश ग्रामों को भी इस योजना से जोड़ा गया है।
मुरौल प्रखंड के अंतर्गत महम्मदपुर बादल पंचायत के महम्मदपुर लालसेन, दरधा चौसा, महम्मदपुर बादल, महम्मदपुर दामोदर, महम्मदपुर मोहन एवं महम्मदपुर गोकुल ग्राम शामिल हैं। इसके साथ ही पिलखी गजपति पंचायत के पिलखी गजपति ग्राम तथा बिशनपुर श्रीराम पंचायत के बिशनपुर श्रीराम, बिशनपुर तितरा, शोभा, गोपीनाथपुर, मारकन, गोपालपुर बिशनपुर लाल, हसनपुर एवं खास पट्टी ऊर्फ यदुनाथपुर ग्रामों में भी सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
कुढ़नी प्रखंड के हरिशंकर मनियारी पंचायत के सिलौत भीमल एवं बिशनपुर जय नारायण ग्रामों को भी इस परियोजना में शामिल किया गया है।
योजना के प्रबंधन और संचालन को सुचारु बनाने के लिए कमांड क्षेत्र को छोटे-छोटे क्लस्टरों में विभाजित किया जाएगा। प्रत्येक क्लस्टर का प्रबंधन वाटर यूजर समिति द्वारा किया जाएगा, जिसमें जीविका की अहम भूमिका होगी। वाटर यूजर समितियों को आवश्यक सहायता प्रदान की जाएगी और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए इन्हें प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों से जोड़ा जाएगा। सभी सिंचाई तकनीकों की पूर्ण तैयारी के बाद इस प्रणाली को जीविका को हैंडओवर किया जाएगा। इसके पश्चात जीविका दीदियों द्वारा इसका संचालन किया जाएगा, जिससे महिलाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे और वे आर्थिक रूप से सशक्त होंगी। यह पहल ग्रामीण सामाजिक-आर्थिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
योजना के प्रभावी कार्यान्वयन एवं विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय के लिए जिला पदाधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तरीय कार्यान्वयन समिति का गठन किया गया है। इस समिति में सिंचाई विभाग, कृषि विभाग, पंचायती राज विभाग, विद्युत विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। समिति द्वारा नियमित समीक्षा कर योजना की प्रगति सुनिश्चित की जाएगी।
किसानों को नई तकनीकों से अवगत कराने और योजना का अधिकतम लाभ दिलाने के लिए फार्मर रिलेशनशिप एजेंसी का चयन किया जाएगा। यह एजेंसी किसानों को प्रशिक्षण प्रदान करेगी और उन्हें तकनीक आधारित सिंचाई प्रणाली की विस्तृत जानकारी देगी। प्रशिक्षण के माध्यम से किसानों को जल संरक्षण, ड्रिप सिंचाई, फसल प्रबंधन एवं आधुनिक कृषि पद्धतियों की जानकारी दी जाएगी, जिससे वे अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकें।
कुल मिलाकर, कमांड क्षेत्र विकास योजना का यह आधुनिकीकरण मुजफ्फरपुर जिले के कृषि परिदृश्य को नई दिशा देगा। सुनिश्चित सिंचाई, जल संरक्षण, तकनीकी नवाचार और महिला सशक्तिकरण के माध्यम से यह योजना न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक होगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सुदृढ़ करेगी। पायलट प्रोजेक्ट के सफल होने पर इसे राज्य के अन्य जिलों में भी लागू किए जाने की संभावना है, जिससे बिहार की कृषि व्यवस्था को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।

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