
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)22 जनवरी।राजकीय शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय देवघर में इंडियन नॉलेज सिस्टम एवं आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (भारतीय ज्ञान परम्परा और कृत्रिम मेधा) विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन हुआ।संगोष्ठी के मुख्य वक्ता रांची विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो (डॉ) जंग बहादुर पाण्डेय ने कहा कि मनुष्य की चार मौलिक आवश्यकताएं हैं -भोजन, वस्त्र, आवास और शिक्षा।क्रम से तो शिक्षा चौथे नंबर पर है, लेकिन गुणवत्ता और महत्व की दृष्टि से शिक्षा प्रथम पद की अधिकारिणी है। भगवान् श्रीकृष्ण ने गीता में अर्जुन को प्रबोधते हुए कहा कि ज्ञान संसार में पवित्रतम् तत्व है।भारत केवल क़ृषि प्रधान देश नहीं, अपितु ऋषि प्रधान देश रहा है। ऋग्वेद विश्व का प्राचीनतम ग्रंथ माना जाता है।भारतीय ज्ञान परंपरा नैतिकता और मूल्य परक रही है जबकि कृत्रिम मेधा व्यावसायिक और रोजगार परक रही है।भारत के विश्व गुरु बनाने का आधार ज्ञान परक था।प्रधानमंत्री श्री मोदी बराबर कहा करते भारत की 65% आबादी युवा है।
डा पाण्डेय ने कहा कि युवा को उलटने पर वायु शब्द बनेगा। अर्थात् ,युवा इस देश की प्राण वायु है।युवाओं के पास जोश है और बुजुर्गो के पास होश है।आज के युवा अपने जोश के साथ बुजुर्गों के होश को मिला दें,तो उनका विकास अवश्यसंभावी हो।पुस्तक भारतीय ज्ञान का प्रतीक और कम्पूयटर कृत्रिम मेधा का प्रतीक है।आज के युवाओं को पुनः ज्ञान परंपरा से जुड़ना होगा।विशिष्ट अतिथि के लिए में देवघर के पुलिस उपाधीक्षक व्यंकटेश कुमार ने कहा कि हमें दोनों में संतुलन बनाकर चलना चाहिए। रांची विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के शोध छात्र लक्ष्मण प्रसाद ने कहा कि एक आदर्श शिक्षक को समयनिष्ठ, अध्ययनशील और अनुशासन प्रिय होना चाहिए।संगोष्ठी में विषय प्रवेश कराते हुए राजकीय प्रशिक्षण महाविद्यालय रांची के विद्वान प्राध्यापक डा ओम प्रकाश ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में गुरु को सर्वोपरि स्थान प्राप्त है।इसीलिए हमारे शास्त्रों में गुरु को ब्रम्हा, विष्णु और महेश की संज्ञा प्राप्त है।संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे सरस्वती विद्या मंदिर राजकमल धनबाद के कृतकार्य प्राचार्य डा वासुदेव प्रसाद ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में भारत पुनः विश्व गुरु बनेगा-इसमे दो राय नहीं है। संगोष्ठी में प्रशिक्षु शिक्षकों एवं शिक्षिकाओं के बीच इंटरेक्टिव सेशन में प्रश्नोत्तरी के विजेता रोशन कुमार, रानू प्रिया एवं सौरभ को पुरस्कृत किया गया। संगोष्ठी में महाविद्यालय के शिक्षक -गण डाॅ सुदीप्तो मुखर्जी, विकास कुमार रौशन कुमार प्रसून, संजीत उपाध्याय,रजनी रंजना सहित सभी विद्यार्थी उपस्थित रहे।आगत अतिथियों का भव्य स्वागत संजीत उपाध्याय ने ,सरस्वती वंदना प्रो रजनी रंजना ने, संचालन प्रशिक्षु अंकिता कुमारी ने और धन्यवाद ज्ञापन विकास कुमार ने किया।राष्ट्रगान के साथ संगोष्ठी का समापन हुआ।
