
नई दिल्ली/डॉ रहमतुल्लाह 22 सितंबर।राष्ट्रिय सुरक्षा जागरण मंच ” नव जागरण– CSD” ने हिमालय अध्ययन केंद्र (CHS) के साथ मिलकर “सुरक्षित हिमालय: सशक्त भारत” विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया। जिसका स्थान हिमालय अध्ययन केंद्र था। इस कार्यक्रम में 35–40 पीएचडी स्कॉलर तथा विषय में रुचि रखने वाले छात्र– छात्रों लोगों की उपस्थिति रही। प्रमुख वक्ताओं में शामिल थे:मेजर जनरल एसवीपी सिंह, सामरिक और अंतर्राष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ प्रो. सतीश कुमार, राजनीति विज्ञान विभाग, इग्नू ।कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन और वंदे मातरम के साथ हुई। मुख्य अतिथियों का स्वागत किया गया, जिसमें प्रमुख वक्ताओं का अभिनंदन किया गया। इस सत्र का संचालन विक्रमादित्य सिंह ने किया, जबकि वैंशाली भाटिया और सरांश ने एंकरिंग की।
मेजर जनरल एसवीपी सिंह ने हिमालय क्षेत्र की सामरिक महत्ता पर प्रकाश डाला और बताया कि यह न केवल भौगोलिक रूप से बल्कि वैश्विक भू-राजनीति के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने तिब्बत और यूरेशियाई क्षेत्र के बीच के संबंधों पर चर्चा की और चीन की सामरिक योजनाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने चीन द्वारा तिब्बती संस्कृति को समाप्त करने की कोशिशों का भी उल्लेख किया।
प्रो. सतीश कुमार ने हिमालय के सांस्कृतिक, आर्थिक और पर्यावरणीय महत्व पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि हिमालय भारत के लिए एक महत्वपूर्ण जल स्रोत है और इसे संरक्षित करने की आवश्यकता है। उन्होंने चीन के बढ़ते प्रभाव और अमेरिका की वैश्विक भूमिका पर भी चर्चा की। कार्यक्रम के अंत में, हिमालय पर एक डॉक्यूमेंट्री दिखाई गई, जिसमें हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के चार प्रमुख पहलुओं को समझाया गया: मार्जिनलिटी, नाजुकता, दुर्गमता, और सामाजिक संरचना।
कार्यक्रम का समापन दर्शकों की प्रश्नोत्तर सत्र और सम्मानित वक्ताओं के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
