
आओ निराला वसंती बयार..!
आयो-आयो प्रिय;आयो निराला
वसंती बहार।
जोश,उमंग,मन प्रीत हुलस के
उल्लसित माया के धार-धार-धार
आयो-आयो प्रिय—————
१.जइसे सजेले रे नव दुल्हनियां!
खुशबू-सुगंधि से भींजल वदनियां
वइसे ही घर बाहर में सजल बा–
अनुभव कर हिरदईया से यार-
आयो-आयो प्रिय ——–
२.नियति के माया त
अजबे रमल बा!
रतिया दिवस मदहोशी भरल बा!
लागे ला मन मधुमास में जईसे-
अमृत तरल सुरसरिया के धार-
आयो-आयो प्रिय ———
३.बगिया में कुहुके
कोयलिया निराली!
फूल बगिया गीत गूंजत आली!!
अंशु-पूजा-अभिषेक करत
ईहॉं शारद के वीणा के
बाजेला तार–
आयो-आयो प्रिय;आयो निराला
वसंती बहार।
(साभार -अखिल भारतीय जनहित परिवार,आरा/भोजपुर )

