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सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की जयंती पर साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुआ वासंती-काव्योत्सव।

हिन्दी-काव्य-नभ के प्रखर भास्कर थे महाप्राण निराला: डॉ अनिल सुलभ

पटना/बिहार 14 फरवरी। निराला ही व्यक्तित्व था महाप्राण ‘निराला’ का। हिन्दी-काव्य-नभ के सर्वाधिक प्रखर भास्कर थे वे। छायावादकाल के चार प्रमुख-स्तम्भों में उनका व्यक्तित्व श्रेष्ठ और विराट था। छंद पर अधिकार और विशेष आग्रह रखने वाले इस महकवि ने जब आवश्यक समझा तो छंद के बंधनों को तोड़ा भी, किंतु छंद को कभी छोड़ा भी नहीं। वे जीवन के समान कविता में भी नूतनता के पक्षधर थे। इसीलिए वे वाणी से प्रार्थना भी करते हैं तो कहते हैं- “ नव गति, नव लय, ताल छंद नव, नवल कंठ, नव जलद मंद्ररव, नव नभ के नव विहग-वृंद को नव पर नव स्वर दे ! वीणा वादिनी वर दे!”
यह बातें बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में महाप्राण पं सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जयंती पर आयोजित समारोह और वसंतोत्सव-कविसम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए, सम्मेलन अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने कही। डा सुलभ ने कहा कि, निराला जी अत्यंत स्वाभिमानी और वितरागी महाकवि थे। निराला जी का संपूर्ण जीवन संघर्ष और तप करते व्यतीत हुआ। इसीलिए उनकी रचनाओं में वेदना है, संघर्ष भी है और अदम्य शक्ति भी। संघर्षों ने उन्हें वितरागी भी बना दिया था। ‘जूही की कलि’ और राम की शक्तिपूजा’ का वह कवि ‘वह आता तो टूक कलेजे को करता पछताता पथ पर आता’ भी लिखता है।
उद्योग विभाग में विशेष सचिव और वरिष्ठ साहित्यकार दिलीप कुमार, भारतीय प्रशासनिक सेवा के अवकाश प्राप्त अधिकारी और वरिष्ठ कवि बच्चा ठाकुर, आनन्द किशोर मिश्र, ई अवध किशोर सिंह तथा प्रो सुशील कुमार ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
इस अवसर पर आयोजित वसंतोत्सव कवि सम्मेलन का आरंभ चंदा मिश्र ने वाणी-वंदना से किया। गीत के सुचर्चित कवि जय प्रकाश पुजारी ने वसंत का स्वागत करते हुए कहा -”स्वागत है ऋतुराज तुम्हारा स्वागत है ऋतुराज/ नभ थल जल के कण कण में आ गया तेरा राज”।कवयित्री मधु रानी लाल ने इन पंक्तियों से मदनदेव को आमंत्रित किया कि ” ऋतु वसंत मदमा रही/ मदन जगे हिय कोर/ पोर पोर पुलकित हुआ/ होकर भाव विभोर”। वरिष्ठ कवियित्री डा सुधा सिन्हा, प्रो सुनील कुमार उपाध्याय, मधुरानी लाल, शंकर शरण मधुकर, जय प्रकाश पुजारी, अरविन्द अकेला, डा पंकज वासिनी, सुनीता रंजन, पंकज प्रियम आदि कवियों और कवयित्रियों ने अपनी रचनाओं से वसंत का स्वागत किया और ऋंगार के पुष्प से ‘मदन’ का अभिषेक किया। मंच का संचालन कवि ब्रह्मानन्द ने तथा धन्यवाद ज्ञापन कृष्णरंजन सिंह ने किया।
मनोज कुमार सिन्हा, अनिता कुमारी, दिगम्बर जायसवाल, मयंक कुमार मानस, राहूल कुमार, विनय चंद्र, उदय कुमार, अशोक कुमार, कुमारी मेनका, अमन वर्मा आदि प्रबुद्धजन समारोह में उपस्थित थे।

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