भारतीय सांस्कृतिक विविधता से हुए अभिभूत, अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक संवाद को मिला नया आयाम।
भोपाल/मध्यप्रदेश (मनोज कुमार प्रसाद)10अगस्त।ब्रिक्स सांस्कृतिक कार्य समूह (BRICS CWG) 2026 के सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रस्तुति देने के लिए भोपाल आए रूस और क्यूबा के चार अंतरराष्ट्रीय कलाकारों ने आज 9 अगस्त 2026 को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय (IGRMS), भोपाल का भ्रमण किया।
भ्रमण के दौरान कलाकारों ने संग्रहालय परिसर में स्थित तटीय ग्राम प्रदर्शनी (Coastal Village Exhibition), पौराणिक पथ (Mythological Trail), मंडपम्, हिमालय ग्राम, पारंपरिक प्रौद्योगिकी उद्यान (Traditional Technology Park) तथा वीथी संकुल सहित विभिन्न महत्वपूर्ण प्रदर्शनियों एवं दर्शनीय स्थलों का अवलोकन किया। कलाकारों ने भारत की विविध लोक एवं जनजातीय परंपराओं, जीवन-शैली, स्थापत्य और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को गहराई से समझने में विशेष रुचि दिखाई।
इस अवसर पर उन्होंने नवीन प्रदर्शनी “आयुध गाथा” का भी अवलोकन किया, जिसे पीजीडीएम (PGDM) के विद्यार्थियों द्वारा तैयार किया गया है। प्रदर्शनी में विद्यार्थियों ने भारतीय सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक ज्ञान को अपने दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया है। अंतरराष्ट्रीय कलाकारों ने विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रस्तुति और भारतीय सांस्कृतिक विरासत की विविध अभिव्यक्तियों की सराहना की।
भ्रमण के दौरान श् संग्रहालय के अधिकारी राजेश गौतम, रंजन चटर्जी, बराशा कचारी एवं राकेश कुमार वर्मा द्वारा अंतरराष्ट्रीय कलाकारों का स्वागत एवं अभिनंदन किया गया।
कलाकारों ने मानव संग्रहालय में प्रदर्शित भारत की सांस्कृतिक विविधता, परंपराओं और लोक जीवन की समृद्ध विरासत की सराहना करते हुए अपने अनुभव को अत्यंत समृद्ध और प्रेरणादायक बताया। उन्होंने संग्रहालय की ओर से प्रदान किए गए आत्मीय स्वागत एवं आतिथ्य के लिए आभार व्यक्त किया।
संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के संयुक्त सचिव डॉ अरविंद कुमार ने भी मानव संग्रहालय की विभिन्न प्रदर्शनीयों का अवलोकन किया ।
संग्रहालय के जन संपर्क अधिकारी हेमंत बहादुर सिंह परिहार ने बताया कि,रूस और क्यूबा से आए कलाकारों का यह भ्रमण ब्रिक्स सांस्कृतिक कार्य समूह 2026 के व्यापक उद्देश्यों के अनुरूप विभिन्न देशों के बीच सांस्कृतिक संवाद, परस्पर समझ और मैत्री को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण अवसर रहा। मानव संग्रहालय की यात्रा ने कलाकारों को भारत की सांस्कृतिक जड़ों और विविधता को निकट से जानने का अवसर प्रदान किया तथा अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक आदान-प्रदान को एक सार्थक आयाम दिया।

