
भोपाल/मध्यप्रदेश ( मनोज कुमार प्रसाद)16 अगस्त।इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय भोपाल में आज सात दिवसीय “इंटरनेशनल कोर्स ऑन क्यूरेटरशिप एंड कम्युनिटी एंगेजमेंट” का शुभारंभ हुआ। 16 से 22 अगस्त तक चलने वाले इस अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में भारत के विभिन्न राज्यों से आए संग्रहालय क्यूरेटर, शोधार्थी एवं संग्रहालय पेशेवर भाग ले रहे है। इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य वैश्विक संग्रहालय अनुभवों और भारतीय संग्रहालय परंपरा के समन्वय के माध्यम से समुदाय-केंद्रित क्यूरेटरशिप की नई दृष्टि विकसित करना है।
उद्घाटन सत्र में कार्यशाला संयोजक डॉ. एस. के. पांडे ने प्रतिभागियों का स्वागत किया। संग्रहालय के निदेशक प्रो. अमिताभ पांडे ने मानव संग्रहालय की समुदाय-केंद्रित संग्रहालय अवधारणा, प्रशिक्षण मॉडल तथा सांस्कृतिक विरासत संरक्षण में संग्रहालयों की भूमिका पर प्रकाश डाला। अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय विशेषज्ञ प्रो. अमरेश्वर गल्ला ने ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, कनाडा और यूरोप के राष्ट्रीय संग्रहालयों के विकास, सामुदायिक सहभागिता तथा समकालीन क्यूरेटोरियल दृष्टिकोण पर अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम के अंत में डॉ. सुश्री संगीता मोहंती ने आभार व्यक्त किया।
इस अंतरराष्ट्रीय पाठ्यक्रम में अरुणाचल प्रदेश, लद्दाख, ओडिशा, कर्नाटक (मैसूर), छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र सहित देश के विभिन्न राज्यों से क्यूरेटर एवं संग्रहालय विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। प्रतिभागी संग्रहालयों में प्रदर्शनी नियोजन, संग्रह प्रबंधन, स्टोरेज सिस्टम, विज़िटर सर्कुलेशन, एर्गोनॉमिक्स विश्लेषण, वस्तुओं के उपयुक्त लेबल एवं चित्र चयन जैसे समकालीन संग्रहालय अभ्यासों को समझने और नई कार्यपद्धतियाँ सीखने के लिए बाते हुई है।
प्रथम दिवस के फील्ड स्टडी सत्र में प्रतिभागियों ने मानव संग्रहालय परिसर स्थित कुम्हार पारा प्रदर्शनी का भ्रमण कर भारत की पारंपरिक मिट्टी शिल्प परंपराओं का अध्ययन किया। इसके पश्चात मायथोलॉजिकल ट्रेल मुक्तकाश प्रदर्शनी में भ्रमण के माध्यम से सांस्कृतिक परिदृश्य और प्लेस मेकिंग की अवधारणा पर चर्चा हुई। वहीं वीथी संकुल अंतरंग प्रदर्शनी की चयनित दीर्घाओं का अवलोकन करते हुए प्रतिभागियों ने अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय परिषद (ICOM) की संग्रहालय परिभाषा के संदर्भ में क्यूरेटोरियल दृष्टिकोण, गैलरी लेआउट, स्टोरेज, सर्कुलेशन और एर्गोनॉमिक्स के व्यावहारिक पहलुओं का अध्ययन किया।
कार्यक्रम के दौरान संग्रहालय परिसर में स्थापित पुस्तक प्रदर्शनी और पुस्तक स्टॉल भी प्रतिभागियों एवं विद्यार्थियों के लिए आकर्षण का केंद्र रहे, जहाँ संग्रहालय अध्ययन, क्यूरेटरशिप और सांस्कृतिक विरासत से संबंधित प्रकाशनों का अवलोकन भी किया गया।
संग्रहालय के जन संपर्क अधिकारी हेमंत बहादुर सिंह परिहार ने बताया कि, यह सात दिवसीय अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम व्याख्यानों, फील्ड स्टडी, सहभागितापूर्ण गतिविधियों और विशेषज्ञ संवादों के माध्यम से संग्रहालयों में समुदाय-केंद्रित कार्यप्रणाली को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगी ।

