आरा/भोजपुर 16 नवंबर।लीजेंड बक्शी कुलदीप नारायण सिन्हा मेमोरियल कल्चरल सोसायटी के बैनर तले आयोजित साप्ताहिक कार्यक्रम गुरुवासरे संगीत सभा का उद्घाटन प्रोफेसर विश्वनाथ राय ने दीप प्रज्जवलित कर किया। स्थानीय महाजन टोली स्थित ठाकुरबाड़ी प्रांगण में इस् सांगीतिक सभा को संबोधित करते हुये विश्वनाथ राय ने कहा कि शास्त्रीय संगीत की अनुगूंज हरि उपासना का मार्ग है। इस अवसर पर चर्चित गायिका विदुषी बिमला देवी ने राग तिलंग में विलंबित ख्याल “धरिये प्रभु के ध्यान मन भज लें राम नाम” तीनताल में लयबद्ध छोटा ख्याल की बंदिश “कैसे नीर भरूं ननदिया” एवं “प्यारी लागी छविधर की दृगन छवि” खमाज की ठुमरी “जाओ वहीं तुम श्याम जहां सारी रैन जगे हो” व दादरा “डगर बीच कैसे चलूँ मग रोके कन्हैया बेपीर” प्रस्तुत कर समां बांधा। बिमला जी की स्वरों में माधुर्यता, दानेदार तान व राग भी बढ़त अत्यंत प्रभावशाली रहा। विभिन् बंदिशों में लयात्मक क्रियाओं ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
हारमोनियम पर श्रेया पाण्डेय व तबले पर गुरु बक्शी विकास ने बखूबी संगत किया। मंच संचालन शंभू शरण ओझा व धन्यवाद ज्ञापन नृत्यांगना खुशी कुमारी गुप्ता ने किया। इस अवसर पर कवियित्री डॉ. किरण कुमारी, दिनेश्वर प्रसाद , राणा प्रताप सिन्हा , कथक नर्तक अमित कुमार, तबला वादक कृष्ण कान्त मानस , महंत रामाशीष दास, शास्त्रीय गायक महेश यादव रवि शंकर, स्नेहा पाण्डेय, संरक्षक सुशील कुमार ‘देहाती’, श्रेया पाण्डेय, आदित्य कुमार, मनीष कुमार सिंह समेत कई संगीत रसिक व प्रशिक्षु उपस्थित थे।

