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प्रो. रवींद्र नाथ श्रीवास्तव “परिचय दास” नव नालंदा महाविहार विश्वविद्यालय, नालंदा में पालि एवं अन्य भाषा संकाय के संकायाध्यक्ष ( डीन ) नियुक्त।

RKTV NEWS/नालंदा (बिहार)11 मई।भारतीय भाषा, साहित्य और संस्कृति के प्रतिष्ठित संस्थान नव नालंदा महाविहार ( सम विश्वविद्यालय) , नालंदा में वरिष्ठ साहित्यकार एवं शिक्षाविद प्रो.रवींद्र नाथ श्रीवास्तव ( परिचय दास ) को पालि एवं अन्य भाषा संकाय का संकायाध्यक्ष ( डीन ) नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति महाविहार के माननीय कुलपति प्रो. सिद्धार्थ सिंह द्वारा की गई है।

प्रो. रवींद्र नाथ श्रीवास्तव “परिचय दास” नव नालंदा महाविहार के हिंदी विभाग में प्रोफेसर हैं तथा इसके पूर्व अध्यक्ष भी रह चुके हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने यहाँ प्रोवोस्ट ऑव हॉस्टल्स, मीडिया प्रभारी तथा जनसंपर्क प्रमुख जैसे अनेक महत्त्वपूर्ण प्रशासनिक दायित्वों का सफल निर्वहन किया है। शिक्षा, संस्कृति और साहित्य के क्षेत्र में उनकी सक्रिय उपस्थिति ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान प्रदान की है।

वे हिंदी, भोजपुरी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार, संस्कृतिविद, आलोचक एवं संपादक के रूप में व्यापक रूप से जाने जाते हैं। साहित्य, संस्कृति, भारतीय ज्ञान परंपरा तथा लोकचेतना पर उनका कार्य विशेष रूप से चर्चित रहा है। उनकी लेखनी में भारतीय समाज, लोक-संस्कृति, आधुनिक संवेदना और भाषाई बहुलता का गहरा समन्वय दिखाई देता है। हिंदी, भोजपुरी, मैथिली तथा भारतीय साहित्यिक परंपराओं पर उनके गंभीर अध्ययन ने उन्हें समकालीन बौद्धिक जगत में एक विशिष्ट स्थान दिलाया है। भारत सरकार ने उन्हें विश्व हिंदी सम्मेलन में प्रतिनिधित्व के लिए फिजी भेजा था।

प्रो. परिचय दास हिंदी अकादमी, दिल्ली सरकार के सचिव तथा मैथिली~भोजपुरी अकादमी, दिल्ली सरकार के सचिव के रूप में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। उनके कार्यकाल में अनेक साहित्यिक, सांस्कृतिक और अकादमिक गतिविधियों को नई ऊर्जा मिली। साहित्य और भाषा के प्रचार-प्रसार में उनकी प्रशासनिक दक्षता तथा सांस्कृतिक दृष्टि की व्यापक सराहना हुई।

उनकी राष्ट्रीय छवि एक ऐसे साहित्यकार की रही है जो अकादमिक गंभीरता और लोकसंवेदना, दोनों को साथ लेकर चलते हैं। वे केवल विश्वविद्यालयीय आचार्य ही नहीं बल्कि जन-संस्कृति और भारतीय भाषाओं के सक्रिय हस्ताक्षर माने जाते हैं। देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों, साहित्यिक संस्थानों और सांस्कृतिक मंचों पर उनके व्याख्यान विशेष रूप से चर्चित रहे हैं। भारतीय साहित्य, आलोचना, लोक परंपरा, भक्ति आंदोलन, समकालीन कविता और सांस्कृतिक विमर्श पर उनकी वैचारिक उपस्थिति लगातार दर्ज की जाती रही है।

प्रो. परिचय दास की अनेक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें कविता, आलोचना, ललित निबंध, सांस्कृतिक अध्ययन और भारतीय साहित्य संबंधी ग्रंथ विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। उनकी भाषा में वैचारिक गहराई के साथ-साथ रचनात्मक लालित्य भी दिखाई देता है। वे उन साहित्यकारों में गिने जाते हैं जिन्होंने अकादमिक लेखन और रचनात्मक साहित्य के बीच एक जीवंत सेतु तैयार किया है। साहित्य में उन्होंने सुगद्य नामक नई विधा आरम्भ की है।

साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें विभिन्न राष्ट्रीय एवं साहित्यिक सम्मानों से भी सम्मानित किया जा चुका है जिनमें श्याम नारायण पाण्डेय , द्विभागीश अनुवाद सम्मान, भगीरथ समान, माटी के लाल सम्मान आदि प्रमुख हैं। हिंदी तथा भारतीय भाषाओं के प्रति उनके समर्पण को साहित्यिक जगत में विशेष आदर के साथ देखा जाता है।

परिचय दास की प्रमुख पुस्तकों के नाम ~ अनुपस्थित दिनांक, कविता के मद्धिम आँच में, चारुता, आकांक्षा से अधिक सत्वर, धूसर कविता, संसद भवन की छत पर खड़ा होके, एक नया विन्यास।

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