औद्योगिक निवेश एवं पारदर्शी भूमि प्रबंधन को मिलेगा बढ़ावा।
RKTV NEWS/पटना (बिहार )11 मई।बिहार सरकार के कुशल नेतृत्व में उद्योग विभाग के अंतर्गत बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार (बियाडा) द्वारा राज्य में औद्योगिक विकास को गति देने के उद्देश्य से “बियाडा लैंड अलॉटमेंट एंड मैनेजमेंट पॉलिसी, 2026” को लागू कर दिया गया है। इसके साथ ही पूर्ववर्ती बियाडा भूमि आवंटन नीति 2022 को निरस्त कर दिया गया है।
नई नीति के तहत सभी औद्योगिक भूखंडों एवं शेडों का आवंटन पूर्णतः ऑनलाइन आवेदन प्रणाली के माध्यम से किया जा रहा है। बियाडा पोर्टल पर उपलब्ध रिक्त भूखंडों की जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई जा रही है।जिससे निवेशकों को पारदर्शी तरीके से आवेदन एवं आवंटन की सुविधा मिल रहा हैं।
नीति में औद्योगिक क्षेत्रों के सुव्यवस्थित विकास हेतु भूमि उपयोग के लिए व्यवस्था लागू की गई है। इसके अंतर्गत 55-65 प्रतिशत क्षेत्र औद्योगिक प्लॉट , 15-25 प्रतिशत सड़क एवं आवागमन, 10-33 प्रतिशत हरित एवं खुले क्षेत्र, 8 प्रतिशत तक उपयोगिताएं, 5 प्रतिशत तक वाणिज्यिक सुविधाएं तथा 3 प्रतिशत तक आवासीय एवं सामाजिक अवसंरचना के लिए निर्धारित किया गया है।
उद्योग विभाग के सचिव सह बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (BIADA) के प्रबंध निदेशक कुंदन कुमार ने कहा कि “बियाडा लैंड अलॉटमेंट एंड मैनेजमेंट पॉलिसी,2026” बिहार में उद्योग स्थापना प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, समयबद्ध एवं निवेशक-अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि नई नीति के माध्यम से ऑनलाइन आवंटन, ई-नीलामी, प्लग-एंड-प्ले सुविधाएं, आसान भुगतान व्यवस्था तथा स्पष्ट समय-सीमा आधारित प्रावधान लागू किए जा रहे हैं, जिससे निवेशकों को उद्योग स्थापित करने में सहूलियत मिलेगी।
औद्योगिक क्षेत्रों को आवंटन की स्थिति के आधार पर “अनसैचुरेटेड”, “नॉर्मल” एवं “सैचुरेटेड” श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। वहीं प्राइम लोकेशन वाले भूखंडों अथवा एक से अधिक आवेदकों वाले प्लॉटों का आवंटन ई-ऑक्शन/ई-बिडिंग प्रक्रिया के माध्यम से किया जा रहा है] जिससे पारदर्शिता एवं प्रतिस्पर्धात्मकता सुनिश्चित होगी।
नई नीति के अनुसार माइक्रो एवं स्मॉल इकाइयों के लिए 2 प्रतिशत तथा मीडियम एवं लार्ज इकाइयों के लिए 5 प्रतिशत अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट (EMD) निर्धारित किया गया है। बिहार में पंजीकृत स्टार्टअप्स को EMD में छूट देने का भी प्रावधान किया गया है।
भूमि लीज अवधि 30 वर्ष, 60 वर्ष अथवा 90 वर्ष तक निर्धारित की गई है तथा नवीकरण की सुविधा भी उपलब्ध होगी। निवेश के आकार के अनुसार अग्रिम भुगतान की व्यवस्था को निवेशक-अनुकूल बनाया गया है। ₹50 लाख तक की परियोजनाओं के लिए 40 प्रतिशत, ₹50 लाख से ₹2.5 करोड़ तक के निवेश हेतु 35 प्रतिशत, ₹2.5 करोड़ से ₹7.5 करोड़ तक के निवेश हेतु 30 प्रतिशत तथा ₹7.5 करोड़ से अधिक निवेश वाली परियोजनाओं के लिए 25 प्रतिशत अग्रिम भुगतान निर्धारित किया गया है।
शेष राशि अधिकतम 10 किश्तों में जमा करने की सुविधा दी गई है, जिसकी अवधि परियोजना के आकार के अनुसार 1.5 वर्ष से 5 वर्ष तक होगी। किश्तों पर 9 प्रतिशत साधारण ब्याज तथा विलंब की स्थिति में 12 प्रतिशत दंडात्मक ब्याज का प्रावधान किया गया है।
उद्योग स्थापना हेतु स्पष्ट समय-सीमा भी निर्धारित की गई है। माइक्रो इकाइयों को 12 माह, स्मॉल इकाइयों को 18 माह, मीडियम इकाइयों को 24 माह तथा लार्ज इकाइयों को 30 माह के भीतर उत्पादन प्रारंभ करना होगा। विशेष परिस्थितियों में समय विस्तार का प्रावधान भी रखा गया है।
नई नीति में गैर-कार्यशील इकाइयों के लिए भी स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। स्वीकृत उत्पादन क्षमता के 50 प्रतिशत से कम उत्पादन करने वाली इकाइयों को गैर-कार्यशील घोषित किया जा सकेगा तथा उन पर भूमि लीज प्रीमियम का 2 प्रतिशत दंडात्मक किराया लगाया जाएगा।
औद्योगिक इकाइयों के हस्तांतरण, आंशिक हस्तांतरण, उत्पाद परिवर्तन, मर्जर एवं डी-मर्जर की प्रक्रियाओं को भी अधिक सरल एवं पारदर्शी बनाया गया है। साथ ही पहली बार एक सुव्यवस्थित “सरेन्डर एवं एग्जिट मैकेनिज्म” लागू किया गया है, जिससे निष्क्रिय औद्योगिक भूमि का त्वरित पुनः उपयोग सुनिश्चित हो सकेगा।
नई नीति में प्लग-एंड-प्ले शेड की अवधारणा को विशेष प्राथमिकता दी गई है। ऐसे शेडों का प्रारंभिक आवंटन 5 वर्षों के लिए होगा] जिसे अधिकतम 15 वर्षों तक बढ़ाया जा सकेगा। आवंटन के 90 दिनों के भीतर संचालन प्रारंभ करना अनिवार्य होगा।
“बियाडा लैंड अलॉटमेंट एंड मैनेजमेंट पॉलिसी, 2026” बिहार में औद्योगिक निवेश, उद्योग स्थापना एवं रोजगार सृजन को नई गति प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

