
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)25 अगस्त। श्रीसनातन शक्तिपीठ संस्थानम् एवं सनातन-सुरसरि सेवा न्यास के संयुक्त तत्वावधान में सिद्धपीठ श्रीहनुमत्सदन, फ्रेंड्स कॉलोनी में इस वर्ष की अंतिम सोमवारी के अवसर पर ‘भगवान शिव और श्रावण मास’ विषय पर सत्संग का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रवचन करते हुए प्रख्यात भागवत-रामायण वक्ता आचार्य (डॉ.) भारतभूषण पाण्डेय जी महाराज ने श्रावण मास की आध्यात्मिक महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला।
आचार्य भारत भूषण ने कहा कि समुद्र मंथन से प्रकृति के सारे विष कालकूट हालाहल के रूप में निकले और समस्त त्रिलोकी को जलाने लगे। उस समय भगवान शिव ने हालाहल को अपने कंठ में धारण कर सृष्टि की रक्षा की। उन्होंने कहा कि संसार के समस्त अमंगलों का अपनोदन कर परम कल्याण का मार्ग प्रशस्त करने वाला कालविशेष ही श्रावण है। इस पवित्र मास में की गई शिवोपासना मनुष्य को परम श्रेय प्रदान करती है।
उन्होंने कहा कि देशविशेष, कालविशेष और पात्रविशेष के संयोग से वस्तुविशेष की महिमा और बढ़ जाती है। भगवान शिव परब्रह्म होते हुए भी भक्त का रूप धारण कर योगी, यति और तपस्वी आदि के वेष में रहते हैं। वे संसार के समस्त अमंगलों को स्वयं स्वीकार कर सभी जीवों को परम मंगल प्रदान करते हैं।
आचार्य ने कहा कि भगवान शिव ने ही अपने मानस हंस श्रीराम को जगत के सुख के लिए प्रकट किया। श्रीराम भगवान शिव की भक्ति के प्रसाद हैं। उन्होंने कहा कि भगवान शिव को प्रसन्न करने वाले दस प्रमुख शैवव्रत बताए गए हैं, जिनमें सोमवार, अष्टमी, एकादशी, प्रदोष और शिवरात्रि आदि प्रमुख हैं।सत्संग के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान शिव की महिमा का श्रवण किया और श्रावण मास में शिव आराधना के महत्व को समझा।



