
भोपाल/मध्यप्रदेश (मनोज कुमार प्रसाद)30 जून। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय, भोपाल के राजभाषा अनुभाग द्वारा वर्ष 2027-28 की प्रथम तिमाही (अप्रैल–जून) के अंतर्गत आगामी राजभाषा सम्मेलन के लिए एक विशिष्ट प्रतीक चिन्ह (लोगो) के निर्माण हेतु विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला का मुख्य विषय “राजभाषा, हिंदी दिवस, आज़ादी का अमृत काल एवं सम्मेलन स्थल मुंबई की पृष्ठभूमि” रहा। कार्यशाला का उद्देश्य ऐसा प्रतीक चिन्ह तैयार करना था, जो राजभाषा हिंदी के महत्व, हिंदी दिवस की ऐतिहासिक प्रासंगिकता, आज़ादी के अमृत काल की भावना तथा सम्मेलन स्थल मुंबई की सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक पहचान को प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त कर सके।
कार्यशाला के दौरान संग्रहालय के चित्रकारों, कलाकारों तथा अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा का परिचय देते हुए अनेक आकर्षक एवं विषयानुकूल लोगो डिज़ाइन तैयार किए। इन डिज़ाइनों में मुंबई की ऐतिहासिक पहचान, हिंदी भाषा के गौरव तथा विकसित भारत के संकल्प और आज़ादी के अमृत काल की भावना का सुंदर समन्वय देखने को मिला।
संग्रहालय के निदेशक प्रो. अमिताभ पांडे ने बताया कि केंद्र सरकार के विभिन्न संस्थानों में आयोजित ऐसी कार्यशालाओं से प्राप्त उत्कृष्ट प्रतीक चिन्हों में से चयनित सर्वश्रेष्ठ डिज़ाइन का उपयोग आगामी राष्ट्रीय स्तर के राजभाषा आयोजनों में किया जाएगा। उन्होंने प्रतिभागियों की सृजनात्मक सोच एवं उत्साह की सराहना करते हुए इसे राजभाषा के संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।
संग्रहालय के जनसंपर्क अधिकारी हेमंत बहादुर सिंह परिहार ने संग्रहालय में कार्यरत चित्रकारों, कलाकारों तथा अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों को राजभाषा, आज़ादी के अमृत काल तथा मुंबई की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि पर आधारित रचनात्मक प्रतीक चिन्ह तैयार करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ संस्थान की रचनात्मक अभिव्यक्ति को भी नई दिशा प्रदान करते हैं।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर राजभाषा अधिकारी राजेंद्र कुमार झारिया ने सभी प्रतिभागियों के उत्साह, कल्पनाशीलता एवं उत्कृष्ट प्रयासों की सराहना की। अंत में सहायक राजभाषा अधिकारी डॉ. रविंद्र गुप्ता ने सभी प्रतिभागियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
