राकेश उर्फ सम्राट चौधरी को 1999 में मंत्री पद से बर्खास्त किसी सरकार, पार्टी ने नहीं किया, ये राजभवन से निकला आदेश था: राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार सौरव
RKTV NEWS/पटना( बिहार)18 अप्रैल।जन सुराज पार्टी कार्यालय में शनिवार को बिहार के नए सीएम सम्राट चौधरी को लेकर महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता की गई। इस दौरान पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने कहा कि जिस व्यक्ति के नाम पर चुनाव लड़ा गया, जिस व्यक्ति के लिए कहा गया “25 से 30 फिर से नीतीश” उस व्यक्ति को 6 महीने में बिहार से बाहर कर दिया। बिहार में आधे से ज्यादा जिलों में सरकारी कर्मियों को पैसे नहीं दिए जा रहे, इससे समझ सकते हैं कि कोष की क्या हालत है? जो व्यक्ति अभी मुख्यमंत्री चुना गया, वो बिहार के लिए बहुत बड़ी विडंबना है। ज्ञान की धरती बिहार में आज मुख्यमंत्री वो व्यक्ति है जिसके बारे में पता नहीं कि वे कहां तक पढ़े हैं? नेता प्रतिपक्ष 9वीं तक पढ़े हैं। जिस व्यक्ति को अभी मुख्यमंत्री बनाया है, वो गृहमंत्री थे। गृहमंत्री रहते हुए बिहार में हर रोज दुष्कर्म, हत्या, व अन्य आपराधिक घटनाएं होती रही हैं। प्रशासन शून्य हो गया है।
नीट छात्रा मामले में बोले प्रदेश अध्यक्ष, नया सीएम बनते ही आरोपित को बेल
नीट छात्रा मामले में प्रदेश अध्यक्ष ने कहा नए मुख्यमंत्री बनने के तुरंत बाद आरोपित को बेल मिल गई है। ऐसी सरकार से बिहार की जनता और क्या उम्मीद करे? सिवाय धोखा के। बिहार के लोगों का भविष्य अगले 5 साल गहरे अंधकार में चला गया। एक दिन पहले मुजफ्फरपुर-किशनगंज में दुष्कर्म की खबर आई है।
पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार सौरव ने कई पुख्ता जानकारी देते हुए कहा कि 16 नवंबर 1999 ये वर्तमान में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का जन्मतिथि भी है। उस वक्त तत्कालीन राज्यपाल सूरजभान जी ने आदेश जारी किया, जिसमें तत्कालीन मंत्री बनाए गए राकेश कुमार, वर्तमान में सीएम सम्राट चौधरी को बर्खास्त करने का आदेश पारित किया था। एक और आदेश दिया, राकेश कुमार पर जालसाजी, धोखेबाजी करने के लिए एफआईआर करने का भी निर्देश दिया था। मंत्री पद से बर्खास्त सरकार, किसी पार्टी ने नहीं किया, ये राजभवन से निकला आदेश था। दूसरा, उनपर एफआईआर दर्ज इसलिए किया क्योंकि उन्होंने अपनी उम्र, अपना नाम गलत बताया। इस आधार पर वे मंत्री पद से हटाए गए।
जो मैंने कहा वो राजभवन का दस्तावेज है कि राकेश (सम्राट चौधरी) ने अपनी उम्र, नाम, जन्मतिथि में धोखेबाजी की: कुमार सौरव
पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार सौरव ने कहा एक जांच कमिटी बनी, तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त बसु साहब ने रिपोर्ट पेश की, जिसमें कहा गया उस समय राकेश कुमार (सम्राट चौधरी) जांच में सहयोग नहीं किया, ये साबित नहीं कर सके कि दस्तावेज में जो उम्र बताई है वो सही है या नहीं। आज भी ये रिपोर्ट ठंडे बस्ते में है। उस रिपोर्ट में कहा गया इन्होंने स्कूल छोड़ने की उम्र 31 वर्ष, मतदाता सूची में 24 वर्ष, 1995 में कोर्ट में दाखिल एफिडेविट में 16 वर्ष है। कोर्ट के एफिडेविट को सही मानें तो इस हिसाब से 16 नवंबर 1999 को राकेश कुमार (सम्राट चौधरी) की उम्र 20 वर्ष होनी चाहिए थी। राजभवन की मानें तो उम्र 24 साल थी। ये लोक-लाज का विषय है, जनता ने जनादेश बना दिया है, आप जिसे चाहे उसे मुख्यमंत्री बना दे। प्रशांत किशोर लगातार ये सवाल कर रहे हैं, ये प्रश्न बिहार की सरकार, सम्राट चौधरी, बीजेपी यूनिट से नहीं है, ये सवाल नरेंद्र मोदी- अमित शाह से है। क्या ये आरोप हमने लगाए हैं? जो मैंने कहा वो राजभवन का दस्तावेज है कि उन्होंने अपनी उम्र, नाम, जन्मतिथि में धोखेबाजी की है।
बता दें कि इस प्रेस वार्ता में प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती, राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार सौरव, प्रवक्ता पद्मा ओझा, प्रवक्ता तारीक चंपारणी, रेखा गुप्ता जी मौजूद थीं।

