
खैरागढ़/छत्तीसगढ़ (रवींद्र पांडेय) 8 फरवरी। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय में चल रहे नाट्य महोत्सव के दूसरे दिन विद्यार्थियों द्वारा ‘डॉल्स हाउस’, ‘असमंजस बाबू’ और ‘वो फिर आएगी’ नाटकों की प्रभावशाली प्रस्तुतियां हुईं। कार्यक्रम की शुरुआत प्रसिद्ध नाटककार हेनरिक इब्सन द्वारा लिखित नाटक ‘ए डॉल्स हाउस’ से हुई, जिसका निर्देशन अमित कुमार पटेल ने किया। यह नाटक 19वीं सदी की महिला नोरा हेल्मर के जीवन पर आधारित है, जो अपने अहंकारी पति टोरवाल्ड के साथ एक गुड़िया की तरह जीवन जीने को विवश है। पति द्वारा सामाजिक प्रतिष्ठा को प्राथमिकता दिए जाने और नोरा की पहचान व निस्वार्थता को नकारे जाने के बाद, नोरा विवाह और समाज द्वारा थोपी गई रूढ़ भूमिकाओं को अस्वीकार कर आत्मनिर्भरता की राह चुनती है। नाटक में नारीवाद, वैवाहिक समानता, सामाजिक दिखावे और व्यक्तिगत स्वतंत्रता जैसे महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। इस नाटक की प्रस्तुति अंग्रेजी भाषा में की गई।
इसके पश्चात अख्तर अली द्वारा लिखित नाटक ‘असमंजस बाबू’ की प्रस्तुति हुई, जिसका निर्देशन डॉ. शिशु कुमार सिंह (अतिथि व्याख्याता, थिएटर विभाग) ने किया। यह नाटक मनुष्य के भीतर उत्पन्न होने वाले संदेह, निर्णय लेने की दुविधा और असमंजस की मानसिक स्थिति को उजागर करता है। साथ ही, यह आज के समय में व्यक्ति की व्यक्तिगत सोच और सामाजिक अपेक्षाओं के बीच के टकराव को दर्शाता है। नाटक दर्शकों को यह सोचने पर विवश करता है कि एक सामान्य व्यक्ति का जीवन किस प्रकार अनेक मानसिक द्वंद्वों से घिरा होता है।
कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति ‘वो फिर आएगी’ नाटक की रही, जो प्रसिद्ध रूसी नाटककार एंटोन चेखव की रचना का हिंदी रूपांतरण है। द्वितीय दिवस की इन नाट्य प्रस्तुतियों ने खूब तालियां बटोरीं।
इस अवसर पर अधिष्ठाता डॉ. मानस साहू, सहायक प्राध्यापक कौस्तुभ रंजन, अतिथि व्याख्याता डॉ. प्रमोद पांडेय सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
