भोपाल/मध्य प्रदेश 12 जून।अखिल भारतीय कला मंदिर, भोपाल की जिला इकाई के द्वारा पर्यावरण विषयक काव्य गोष्ठी का आयोजन 10 जून 2023 को नव निर्मित साहित्यकार पार्क के सम्मुख स्थित नौ दुर्गा मन्दिर, अटल पथ भोपाल के सभागार में आयोजित की गयी।
कार्यक्रम में डॉ. गौरी शंकर शर्मा ‘गौरीश’ अध्यक्ष, डॉ. प्रेम भारती मुख्य अतिथि, डॉ. मोहन तिवारी ‘आनन्द’ विशिष्ट अतिथि और हरिवल्लभ शर्मा ‘हरि’ सारस्वत अतिथि के रूप में मंचासीन रहे। देवेश ‘देव’ ने कार्यक्रम का सफल संचालन किया।
माँ वैष्णोदेवी के पूजन माल्यार्पण के पश्चात मंचासीन अतिथियों का स्वागत किया गया। इस अवसर पर सर्वप्रथम उपस्थित सभी गणमान्य कवियों ने साहित्यकार पार्क के लिए किए गए अथक प्रयाशों के लिए श्री ‘गौरीश’ का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए बधाइयाँ दी, और पुष्प मालाओं से उनका अभिनंदन किया। वृक्ष मित्र सुनील दुबे ने उपस्थित सभी कवियों एवं कवियित्रियों को पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलाई। पश्चात सभी विद्वान कवि-कवयित्रियों ने पर्यावरण विषय पर श्रेष्ठ रचनाएं पढ़ी।
इस अवसर पर अशोक जैन ‘निर्मल’, सुशील जैन ‘गुरु’, बिहारीलाल सोनी ‘अनुज’, , श्रीमती प्रियंका श्रीवास्तव, दिनेश भदौरिया ‘शेष’, अशोक ‘व्यग्र’, अभिषेक जैन ‘अबोध’, शिवांस ‘सरल’, डॉ. अशोक तिवारी ‘अमन’, अवनीन्द्र खरे ‘अंशुमान’, शिवकुमार दीवान, प्रियेश गुप्ता, कमलेश ‘नूर’, श्रीमती सुनीता शर्मा ‘सिद्धि’, श्रीमती सुधा दूबे, श्रीमती सीमाहरि शर्मा, श्रीमती रोशनी जैन, श्रीमती रजनी सक्सेना, श्रीमती मनोरमा पंत, श्री बृज किशोर चतुर्वेदी, महेश सोनी, आदि गणमान्य कवि गण उपस्थित रहे।
काव्य गोष्ठी में समस्त कवियों ने अपनी प्रतिनिधि रचनाओं का पाठ किया। कमलेश नूर ने “परिंदे दुआ देंगे साया भी होगा”। श्रीमती सीमा हरि शर्मा ने “पेड़ वायु पानी धरा ऐसे करो प्रयोग”। प्रियेश गुप्ता ने “मैं तेरा साझीदार मित्र मैं तरुवर हूँ”। श्रीमती प्रियंका श्रीवास्तव ने “पेड़ पौधे पर्वत सारे”। श्रीमती सुधा दूबे ने “हरियाली की डोर को थामे रख मनामीत”। शिवकुमार दीवान ने “तेज धूप गर्मी बहुत कर देती बेहाल”। अवनीन्द्र खरे ने “तार-तार सिकुड़ गया मखमली वसन”। डॉ. अशोक तिवारी ‘अमन’ ने “पर्यावरण की कद्र नहीं है”, अभिषेक जैन अबोध ने “वायु दूषित जल प्रदूषित, भूमि बंजर”। दिनेश भदौरिया ने “हमारे प्राण के रक्षक सदा तरुवर रहे है”। अशोक व्यग्र ने “आज चतुर्दिक बढ़ा प्रदूषण”। बिहारीलाल अनुज ने “हरे भरे वृक्षो को काटो मत”। श्रीमती रजनी सक्सेना ने “मन में उठी उमंग प्रकृति से बात करूँ” आदि रचनाओं का पाठ किया। कार्यक्रम के अंत मे अशोक व्यग्र ने उपस्थित सभी गणमान्य कवियों का आभार व्यक्त करते हुए यह सुझाव रखा कि साहित्यकार पार्क का नाम साहित्यकार उद्यान रखा जाय।
