
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)26 जुलाई।शिवपुरी मे संचालित शिवपुराण की कथा मे ब्रह्मपुरपीठाधीश्वर आचार्य धर्मेन्द्र जीमहाराज ने बताया कि वेद,वेदांत के विद्वान ऐसा मानते हैं कि निर्गुण प्रमात्मा से.सर्वप्रथम जो सगुणरूप प्रकट हुआ, उसी का नाम शिवहै।शिव से पुरूषसहित प्रकृति उत्पन्न हुई।उन दोनों ने मूलस्थान मे तप किया।वहीं तपस्थली पंचकोशी काशीके नाम से विख्यात है,यह भगवान शिव कोअत्यन्तप्रिय है।। आगे कहा कि जल सम्पूर्ण जगत मे व्याप्त था, जिसमे योगमाया से युक्त श्रीहरि ने शयन किया। उन नारायण के नाभिकमल से जिनकी उत्पत्ति हुई, वे ब्रह्मा कहलाए। ब्रह्मा ने तपस्या करके जिनका साक्षात्कार किया वे विष्णु कहलाए। ब्रह्मा और विष्णु केविवाद को शान्त करनेके लिए निर्गुण शिव ने जो रूप प्रकट किया वे महादेव कहलाते। महादेव ने कहा मै शम्भु ब्रह्मा के ललाट से प्रकट होऊँगा. नाम होगा रूद्र। इस लोक मे जो कुछ दिखाई पडता है ,वह सब शिव ही हैं। शम्भु को वेदो का प्राकट्य कर्ता तथा वेदपति कहा गया है।वे ही सब पर अनुग्रह करने वाले .साक्षात शंकर हैं। कर्ता, भर्ता,,हर्ता, साक्षी तथा निर्गुण भी वे ही हैं। उन शिव का कोई उत्पादक नहीं,पालक नह,संहारक भी नहीं ।वे स्वयं सबके कारण हैं। आचार्य जीने कहा कि भगवान शम्भु की भक्ति मुक्ति की जननी है।
