
RKTV NEWS/वाराणसी (उत्तर प्रदेश)26 नवंबर।हिंदी की दशा और दिशा पर महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के हिंदी विभाग के तत्वावधान में एक विचार संगोष्ठी का आयोजन हुआ।
मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए रांची विश्वविद्यालय रांची के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डा जंग बहादुर पाण्डेय ने कहा कि हिंदी भारत की राष्ट्रभाषा और राज भाषा दोनों है। हिंदी भारत मां की बिंदी है। बिछुआ हजार रूपये में मिलता है लेकिन पैरों में पहना जाता है, बिंदी एक रूपया में मिलती है लेकिन मां के माथे पर सुशोभित होती है। उन्होंने विद्यार्थियों से जोर देकर कहा कि हिंदी को लाचारी में, नहीं चुनौती के रूप में स्वीकार करें और मन लगाकर पढ़ें। हिंदी आपके हर चाहत को राहत देगी। मैंने हिंदी को चुनौती के रूप में स्वीकार किया और मन लगाकर अध्ययन किया तो हिंदी ने मुझे देश विदेश की यात्राएं करवा दी। इसीलिए मैं बराबर कहा करता हूं कि – कोटि कोटि कंठों की भाषा,जन मन की मुखरित अभिलाषा।हिंदी है पहचान हमारी,हिंदी हम सब की परिभाषा।
डा पाण्डेय ने कहा कि जो व्यक्ति अपनी माता,अपनी मातृभाषा और अपनी मातृभूमि का सम्मान नहीं करता उसका भविष्य उज्जवल नहीं होता है।संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ वाराणसी के हिंदी विभागाध्यक्ष डा राज मुनि ने कहा कि हिंदी भारत की राजभाषा है और हमारी मातृभाषा भी। हमें अपनी राजभाषा और मातृभाषा का सम्मान करना चाहिए।इस अवसर पर डा जे बी पाण्डेय ने डा राज मुनि और डा विजय कुमार रंजन को अटल बिहारी साहित्यकार सम्मान 2025 और डा अनुकूल चंद्र राय,डा रामाश्रय सिंह और डा अविनाश कुमार सिंह को हिंदी रत्न सम्मान 2024 देकर सम्मानित किया।यह महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ वाराणसी के हिंदी विभाग के लिए गौरव और अलंकरण का पावन क्षण रहा।इन महत्वपूर्ण सम्मानों के लिए सबने डा जे बी पाण्डेय का आभार जताया। विद्यार्थियों ने डा पाण्डेय के सार गर्भित वक्तव्य की भूरिश:प्रशंसा की।आगत अतिथियों का भव्य स्वागत डा अनुकूल चंद्र राय ने, सरस्वती वंदना विद्यार्थियों ने,संचालन डा अविनाश कुमार सिंह ने,फोटो ग्राफी डा शिव शंकर ने, प्रबंधन डा विजय कुमार रंजन ने और धन्यवाद ज्ञापन डा रामाश्रय सिंह ने किया। राष्ट्र गान और शांति पाठ से संगोष्ठी की पूर्णाहुति हुई।
