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खैरागढ़:भारत में कला और संस्कृति का नया अध्याय : आईकेएसवी-डीडीयूजीयू के एमओयू से शैक्षिक क्रांति।

ऐतिहासिक साझेदारी का हुआ शुभारंभ।

खैरागढ़/छत्तीसगढ़ (रवींद्र पांडेय) 23 मई। छत्तीसगढ़ एवं गोरखपुर, उत्तर प्रदेश की प्रतिष्ठित अकादमिक संस्थाएं इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय (आईकेएसवी) और दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (डीडीयूजीयू) ने उच्च शिक्षा, सांस्कृतिक आदान-प्रदान एवं नवाचार के क्षेत्र में नयी क्रांति का सूत्रपात करते हुए एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एम.ओ.यू.) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह ऐतिहासिक समझौता विश्वविद्यालयों की कुलपति प्रो. डाॅ. लवली शर्मा एवं प्रो. पूनम टंडन के नेतृत्व में संपन्न हुआ, जो भारतीय कला एवं संस्कृति के संरक्षण एवं विकास के लिए एक सुनहरा अवसर प्रदान करता है।

एम.ओ.यू. के प्रमुख बिंदु

विशेष सहयोगी क्षेत्रों का निर्धारण,प्रदर्शन कला, दृश्य कला,भाषाई एवं सांस्कृतिक अध्ययन ,नाट्य, सिनेमा और टेलीविजन ,उत्कृष्ट शैक्षिक गतिविधियां,छात्र एवं शिक्षक आदान-प्रदान कार्यक्रम ,नियमित कार्यशालाएं, सेमिनार और नवाचार परियोजनाएं ,पाठ्यक्रम एवं कार्यक्रम विकास में वैज्ञानिक और रचनात्मक दृष्टिकोण,अंतर्विषयक प्रयास एवं अनुसंधान,कला के प्रत्येक रूप में अनुसंधान एवं विकास को प्रोत्साहन ,उभरते एवं समावेशी अध्ययन क्षेत्रों का संवर्धन।
यह समझौता तकनीकी नवाचार और कलात्मक समन्वय को सुदृढ़ करते हुए दोनों संस्थानों के बीच गहरे संवाद और सहयोग की नयी राह खोलेगा, जिससे भारतीय कला में अंतरराष्ट्रीय पहचान को मजबूती मिलेगी।
इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ की कुलपति प्रो. डाॅ. लवली शर्मा ने इस ऐतिहासिक एम.ओ.यू. पर अपना विचार रखते हुए कहा कि यह समझौता भारतीय कला को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाने का एक अभूतपूर्व प्रयास है। हमारे छात्रों और शिक्षकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने का सुनहरा अवसर प्राप्त होगा। इसके माध्यम से प्रदर्शन, दृश्य और सांस्कृतिक कलाओं में उन्नति की नई राह प्रशस्त होगी। गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि यह समझौता हमारी उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसमें हम पारंपरिक कलाओं की गरिमा को आधुनिक अकादमिक ढांचे में समाहित कर रहे हैं। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय के साथ यह साझेदारी हमारे छात्रों और शिक्षकों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलेगी। यह गर्व और आशा का क्षण है- जब विरासत और नवाचार एक साथ चलते हैं। उनकी बातों में स्पष्ट झलक रही है कि यह एम.ओ.यू. न केवल शैक्षिक नवाचार का प्रतीक है, बल्कि यह भारतीय सांस्कृतिक धरोहर को विश्वस्तर पर प्रतिष्ठित करने की दिशा में एक बड़े कदम का परिचायक भी है।

वैश्विक परिदृश्य में भारतीय कला का पुनरुत्थान

इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय भारतीय कला, संगीत, नृत्य, ललित कला, नाटक और साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्टता का कारखाना है। नैक द्वारा मान्यता प्राप्त और आईएसओ 9001ः2015 प्रमाणित यह संस्थान, भारतीय कलाओं को विश्व मंच पर मजबूत स्तम्भ की भांति प्रस्तुत करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इस एम.ओ.यू. के तहत, दोनों विश्वविद्यालयों के द्वारा नए शोध एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों की शुरुआत से न केवल वर्तमान शैक्षिक परिदृश्य में बल्कि भविष्य की पीढ़ियों में भी भारतीय कला का उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित होगा।

सफलता की नयी दिशा में उछाल

यह एम.ओ.यू. एक ऐतिहासिक मील का पत्थर सिद्ध होता है, जिससे न केवल शैक्षिक और अनुसंधान गतिविधियां जोश से भर जाएंगी, बल्कि कला, संस्कृति एवं भाषाई अध्ययन में भी नए आयाम जोड़े जाएंगे। भारतीय कला की वैश्विक पहचान और शैक्षिक उत्कृष्टता की दिशा में यह साझेदारी एक क्रांतिकारी उपलब्धि के रूप में दर्ज होगी। यह बड़ी उपलब्धि नयी सोच के साथ संस्कृति और शिक्षा को आगे बढ़ाने का एक प्रेरक कदम है।

अगले कदम की ओर

इस समझौते के क्रांतिकारी परिणाम, नये शोध, अंतरराष्ट्रीय आदान-प्रदान कार्यक्रम एवं नवाचार परियोजनाओं के साथ, भारतीय कला के भविष्य को और भी उज्जवल बनाने में सहायक सिद्ध होंगे। कला प्रेमियों, छात्रों एवं शिक्षकों के लिए यह अवसर प्रेरणा का स्रोत बनकर उभर रहा है। भारतीय कला के उज्जवल भविष्य की ओर यह कदम एक नया इतिहास रचने की दिशा में अग्रसर है।

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