
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा) 12 फरवरी।आज लोकसभा में बजट सत्र में सांसद सुदामा प्रसाद ने 4 श्रम कानून, मनरेगा पर अपना वक्तव्य रखा।
उन्होंने कहा कि मैं 4 श्रम कोड के खिलाफ बोलने खड़ा हूँ। ये कानून भारत के श्रमिकों की गुलामी का दास्तवेज है। मजदूरों के शोषण उत्पीड़न को बढ़ावा देने वाला कानून है। इस कानून के द्वारा मजदूरों के खिलाफ पूंजीपतियों के हाथ मे कोड़ा थमाया गया है। इस लिए मैं इसके खिलाफ में खड़ा हूँ। आज पूरे भारत मे 4 श्रम कोड के खिलाफ, मनरेगा के पुराने कानून वापसी के लिए करोड़ो किसान – मजदूर सड़कों पर है। इस लिए हमारी मांग है कि उनके मांगों को पूरा किया जाए। इस देश को वही चला रहे हैं।
इस कानून को 1926 के उपनिवेशिक बता कर खत्म किया जा रहा है। जबकि 100 या 10 प्रतिशत मजदूरों की संख्या पर यूनियन बनाने का अधिकार था अब 300 या 51 पर कर दिया गया है। मजदूरों को हड़ताल करने के लिए नोटिस देने का समय 2 सप्ताह था अब 2 माह पहले कर दिया गया है। न्यूनतम मजदूरी देने का कोई जिक्र नही है। मजदूरों को कितना मजदूरी देंगे अब महीने पर नही दिन के हिसाब से नही बल्कि घण्टे के हिसाब से देंगे। मजदूरों को लिखो फेकों का तगमा दे रहें हैं।
उन्होंने कहा कि आज ग्रामीण मजदूर भी इस हड़ताल में हैं। इस लिए आपके मध्य से सरकार से हमारी मांग है कि ये कानून वापस लिया जाए और इन मजदूरों का सम्मान किया जाए।

