
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)13 फरवरी।बिहार राज्य विश्वविद्यालय शिक्षक महासंघ ( फूटाब) द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल हीं में यह फैसला सुनाया हैं क़ी यूजीसी के 2018 के रेगुलेशन के नियम, जो कुलपतियों क़ी नियुक्ति के लिए चयन समिति गठन से सम्बंधित हैं, किसी भी राज्य कानून से ऊपर हैं तथा कोई भी राज्य कानून जो इन नियमो के विरुद्ध होगा, अमान्य माना जायेगा l यूजीसी रेगुलेशन क़ी धारा 7(3) के अनुसार चयन समिति में यूजीसी चेयरमैन का एक प्रतिनिधि होना अनिवार्य हैं और इसका अनुपालन नही होने पर कोई भी नियुक्ति कानूनी तौर पर अमान्य होगी l
फूटाब के अध्यक्ष कन्हैया बहादुर सिन्हा एवं महासचिव विधान पार्षद संजय कुमार सिंह ने कुलाधिपति एवं राज्य सरकार से आग्रह किया है. कि कुलपतियों के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू करने से पहले खोज समिति के राज्य कानून में संशोधन किया जाए ताकि इसे उच्चतम न्यायायल के निर्देशानुसार यूजीसी विनियमन 2018 के पैरा 7 (3) के अनुरूप लाया जा सके तथा की गई नियुक्तियां बाद में कानूनी जांच के दायरे में न आएं।
मामले की पृष्ठभूमि का विवरण देते हुए उन्होंने कहा, पुद्दुचेरी तकनीकी विश्वविद्यालय के वीसी की नियुक्ति को मद्रास उच्च न्यायालय में इस आधार पर चुनौती दी गई थी कि जिस खोज समिति की सिफारिश पर वीसी की नियुक्ति की गई थी, उसमें यूजीसी विनियमन 2018 के तहत आवश्यक सदस्य के रूप में यूजीसी नामांकित व्यक्ति नहीं था। उच्च न्यायालय ने नियुक्ति को रद्द कर दिया, वीसी ने उच्चतम न्यायलय में अपील की, जिसने उच्च न्यायलय के निर्णय को भी बरकरार रखा और इसे सभी राज्य और निजी विश्वविद्यालयों के लिए अनिवार्य करने का निर्देश दिया कि इसका कोई भी उल्लंघन होगा तो नियुक्तियां अवैध होंगी lबिहार में तीन यूनिवर्सिटी, वीर कुंवर सिंह, मगध और तिलका मांझी भागलपुर में कुलपतियों कि नियुक्ति कि प्रक्रिया जल्द हीं प्रारम्भ होने वाली हैं l बीच कार्यकाल में नियुक्ति रद्द होने से विश्वविद्यालय के कार्य बुरी तरह प्रभावित होते हैं, इस इस्थित से बचना जरूरी हैं।
