21 करोड़ के कारोबार के साथ 15 दिवसीय मेले का हुआ समापन।
महिला उद्यमियों के मुस्कान से झलकी मेले की सफलता।
RKTV NEWS/पटना(बिहार)26 दिसंबर।पिछले 15 दिनों तक चले बिहार सरस मेला का गुरुवार को समापन हो गया। ग्रामीण विकास विभाग के तत्वाधान में जीविका के द्वारा आयोजित बिहार सरस मेला कई मायनो में खास रहा। अब तक आयोजित सभी बिहार सरस मेला की तुलना में यह मेला इस बार का सरस मेला खरीद-बिक्री एवं आगंतुकों की संख्या में उत्तरोत्तर वृद्धि कर गया।औसतन प्रतिदिन 1 लाख लोग आये।15 दिनों में 16 लाख से अधिक लोग आये l लगभग 21 करोड़ रुपये के उत्पादों एवं व्यंजनों की खरीद-बिक्री हुई।
बिहार सरस मेला का अवलोकन चार-चार पीढ़ियों ने किया और सदियों पुरानी संस्कृति, शिल्प, परम्परा और देशी व्यंजनों को देख हर्षित हुए।सरस मेला अपने अन्दर लोक संस्कृति, परंपरा एवं लोक कला को अपने अंदर समेटे हुए राष्ट्रीय स्तर पर परिलक्षित हुआ और आगंतुकों को लुभाया।मेला में बिहार समेत आँध्रप्रदेश, आसाम, छत्तीसगढ़, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, झारखण्ड, केरला, कर्नाटका, मध्य प्रदेश, मणिपुर, महारष्ट्र, मेघालय, ओड़िसा, पंजाब, राजस्थान,तमिलनाडु,तेलंगाना,उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, एवं पश्चिम बंगाल से आई स्वयं सहायता समूह से जुडी ग्रामीण शिल्पकार एवं स्वरोजगारी अपने-अपने प्रदेश के शिल्प, उत्पाद, परंपरा, संस्कृति एवं व्यंजन को लेकर उपस्थित हुए।
देश के 25 राज्यों से आई स्वयं सहायता समूह से जुडी महिलाओं एवं स्वरोजगारियों के 500 से अधिक स्टॉल से ग्रामीण शिल्प एवं कलाकृतियाँ एवं उत्पादों की खरीद-बिक्री हुई।जिसमे 300 स्टॉल स्वयं सहायता समूह से जुडी महिलाओं के लिए स्टॉल , फ़ूड जोन में दीदी की रसोई समेत व्यंजनों के 50 स्टॉल के साथ ही अन्य डेढ़ सौ से अधिक स्टॉल , महिला विकास निगम ,महिला उद्योग संघ तथा विभिन्न विभागों, संस्थानों एवं बैंको के लिए रहे जहाँ पर विभिन्न योजनाओं से आगंतुकों को जागरूक एवं लाभान्वित किया जाता रहा।
बिहार् में बोली जाने वाली भाषाओँ के नाम पर बने हैंगर में भाषा को भी स्थापित किया।मगही, भोजपुरी , अंगिका एवं मैथली के नाम पर बने हैंगर्स में शिल्प बाज़ार सजा।वज्जिका में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन प्रति दिन संध्या समय में आयोजित होता रहा ।
मेला के प्रति आगंतुकों का बढ़ता आकर्षण
मेला के शुभारंभ दिन 12 दिसंबर से ही मेला और मेला के उत्पादों एवं व्यंजनों के कद्रदानो का आगमन होना शुरू हो गया था।पहले ही दिन 70 हजार से अधिक लोग आये।आगंतुकों की संख्या में प्रतिदिन इजाफा होता गया। मेला के प्रति लोगों का क्रेज ही है कि छुट्टी के दिन एक लाख से ज्यादा लोग आये और खासकर 25 दिसंबर को पिकनिक स्थल के तौर पर लोग यहाँ आकर आनंदित हुए।इस बार आगंतुकों ने अपने पिछले आगमन के रिकॉर्ड को तोड़ा।औसतन प्रतिदिन 1 लाख लोग आये l रविवार और 25 दिसंबर को डेढ़ लाख से ज्यादा लोग आये। इन 15 दिनों में लगभग 16 लाख से अधिक लोग आये।
ग्राहक सेवा केंद्र और कैशलेश
खरीददारी से खरीद-बिक्री हुई आसान
बिहार सरस मेला में डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सभी स्टॉल पर कैशलेश खरीददारी की व्यवस्था की गई थी l रूपये की जमा निकासी के लिए जीविका दीदियों द्वारा 4 ग्राहक केंद्र संचालित किये गए l इन ग्राहक सेवा केन्द्रों से प्रतिदिन 50 हजार से लेकर डेढ़ लाख से ज्यादा रुपये की जमा निकासी होती रही।
मधुग्राम महिला प्रोडूसर कंपनी लिमिटेड का स्टॉल
जीविका दीदी द्वारा उत्पादित उच्च गुणवत्तापूर्ण शहद मधुग्राम महिला उत्पादक कंपनी लि.के स्टॉल पर बिक्री हेतु प्रदर्शित रहा l इस स्टॉल से आगंतुकों को शहद के विभिन्न फ्लेवर यथा तुलसी शहद, लीची शहद, सरसों शहद, करंच, युकोलिप्टस , वन तुलसी , सहजन और जामुन एवं अन्य फ्लेवर के बारे में भी बताया गया l 15 दिनों में डेढ़ लाख से अधिक मूल्य के मधु की बिक्री हुई l
शिल्पग्राम महिला प्रोडूसर कंपनी लिमिटेड का स्टॉल
शिल्प ग्राम के स्टॉल पर सिक्की कला, मलबरी से बनी सिल्क की साड़ियाँ. दुपट्टे, स्टाल तसर सिल्क, पेपर सिल्क एवं खादी कॉटन से बने कपडे आगंतुकों के लिए आकर्षण के खास केंद्र रहे और बिक्री भी हुई l विभिन्न स्टॉल पर उत्पादों के निर्माण का भी जीवंत प्रदर्शन हुआ।
दीदी की पौधशाला
सतत जीविकोपार्जन योजना से लाभान्वित हुई जीविका दीदी की पौधशाला के स्टॉल पर आयुर्वेदिक पौधों की बड़े पैमाने पर बिक्री हुई l सरस मेला में लगे जीविका दीदी के पौधशाला के माध्यम से लगभग 40 हजार रुपये के पौधे की बिक्री हुई हैं l इन्सुलिन, एलोवेरा, इलायची , तेजपत्ता, लाल चन्दन, इस्तिविया ,अर्केरिया, पपीता, बेल, अजवाइन , लेमन ग्रास, बसमतिया, कड़ी पत्ता, श्याम पत्ता, राम तुलसी, पत्थर चूर्ण, सतावर आदि आयुर्वेदिक पौधे खूब बिके l बारह मासी आम, पाम, बांस की कई प्रजातियाँ,अंगूर, अमरुद, दालचीनी, इलायची, नींबू,मौसमी, कढ़ी पत्ता और खाद की भी बिक्री हुई।
लोक कल्याणकारी योजनाओं से आगंतुक हुए लाभान्वित
विभिन्न विभागों , संस्थानों तथा गैर सरकारी बैंको के स्टॉल से सरकारी योजनाओं से आगंतुकों को रूबरू कराया गया l पंजाब नेशनल बैंक, इंडियन बैंक, एक्सिस बैंक , दक्षिण एवं उत्तर ग्रामीण बैंक , सेंट्रल बैंक आफ इंडिया, स्टेट बैंक आफ इंडिया, रिजर्व बैंक औफ़ इंडिया, पशुएवं मतस्य विभाग, पर्यटन विभाग, इंडेन गैस कई स्टॉल पर बिहार सरकार की कई महत्वपूर्ण योजनायें भी फलीभूत होती हुई दिखी l भूमि एवं राजस्व विभाग ने 1 हजार से अधिक लोगों को जमींन का नक्शा उपलब्ध कराया l
जीविका के स्टॉल पर हुनरमंद एवं उद्यमी महिलाओं की गाथा तथा स्वच्छ गाँव-समृद्ध गाँव की परिकल्पना को प्रदर्शित किया l वहीँ सतत जीविकोपार्जन योजना से लाभान्वित हुई परिवारों के सशक्तिकरण की झलक भी सरस मेला परिसर में लगे दस स्टॉल पर दिखी l
सहायता केंद्र
सरस मेला परिसर में आगंतुकों एवं स्टॉल धारकों के लिए सहयोग एवं सहायता के लिए सहायता केंद्र संचालित रहा।
स्वास्थ्य केंद्र
मेला परिसर में स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्थापित स्वास्थ्य केंद्र से जांच और मुफ्त में दवा वितरण किया गया l राज्य स्वास्थ्य समिति के तत्वाधान में ढाई सौ लोहों के एनीमिया की नि:शुल्क जाँच की गई और दवा भी निः शुल्क वितरण किया गया। पूरे सरस मेला परिसर और स्टॉल पर 80 सी.सी.टीवी.कैमरे से निगरानी की जाती रही l
व्यापक सुरक्षा व्यवस्था
10 बजे सुबह से लेकर शाम 8 बजे तक सरस मेला परिसर में दंडाधिकारी, पुलिस पदाधिकारी एवं पर्याप्त सुरक्षा बलों की प्रतिन्युक्ति की गई थी l
अग्निशमन दस्ता बल भी रहा मौजूद
सरस मेला परिसर में अग्निशमन दस्ता बल और फायर बिग्रेड की गाडी की भी व्यवस्था की गई थी l 3 आपातकालीन गेट भी बनाये गये थे l 4 नंबर गेट से आगंतुकों का निः शुल्क प्रवेश होता रहा l
समसामयिक मुद्दों पर परिचर्चा सह विचार -विमर्श
जन जागरूकता अभियान के अंतर्गत प्रतिदिन विभिन्न संस्थाओं यथा- जीविका, सिडेनता फाउंडेशन, विंग्स आफ फायर, माईंड मैटर्स , इंडिया-2, आर.से.टी.ई द्वारा सम सामयिक विषयों पर परिचर्चा एवं ज्ञानवर्धक कार्यक्रम आयोजित होता रहा l कलाकारों द्वारा दहेज़ प्रथा एव बाल विवाह उन्मूलन, घरेलु हिंसा एवं यौन शोषण तथा तथा अन्य सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन हेतु लघु फिल्मो की प्रस्तुति , विचार-विमर्श, चर्चा एवं मार्गदर्शन जैसे कार्यक्रम होते रहे l रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के तत्वाधान में खाता-धारकों के लिए जागरूकता अभियान के तहत नुक्कड़ नाटक और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के तत्वाधान में वित्तीय जागरूकता कार्यक्रम के तहत पॉपेट शो की भी प्रस्तुति की गई l
लोक गीत और लोक नृत्यों को मिला प्रोत्साहन – जादू शो ने भी लुभाया
ग्रामीण शिल्प एवं उत्पाद को प्रोत्साहन देने के साथ ही सरस मेला के माध्यम से बिहार के लोक के लोक गीत, नृत्य एवं संस्कृति को भी प्रोत्साहन मिला l प्रतिदिन लोक गीत, लोक नृत्य के कार्यक्रम के तहत विवाह गीत,भाव नृत्य, जट- जतिन , सामा चकेवा, भरेठ, झिझिया और पारंपरिक गीतों की प्रस्तुति ने दर्शकों को झुमाया l जीविका, पर्यटन विभाग, किलकारी, तानसेन स्कुल आफ म्यूजिक ,अक्षत इंटरतेनमेंट,जैक म्यूजिकल ग्रुप समेत स्कूलों बच्चे-बच्चियों और विभिन्न संस्थानों द्वारा गीत –नृत्य एवं जादू शो की प्रस्तुति ने दर्शकों को लुभाया l जीविका द्वारा आयोजित चित्रांकन एवं निबंध प्रतियोगिता ने छोटे-छोटे छात्र-छात्राओं के हुनर को अवसर दिया l
सेल्फी ज़ोन में आगंतुकों ने संजोई अपनी तस्वीर
यूँ तो पूरा सरस मेला परिसर, सजे स्टॉल , खुले क्षेत्र में बिक रहे उत्पादों के साथ आगंतुकों ने अपनी और अपने साथ आये परिजनों की फोटो ली l इसके साथ ही बुद्ध एवं नालंदा विश्वविद्यालय , हरे भरे वृक्ष एवं सरस मेला पर आधारित सेल्फी ज़ोन फोटोग्राफी के खास केंद्र स्थल बने l
फन ज़ोन में आकर बच्चे-बच्चियां आनंदित हुए l महिला एवं बाल विकास निगम द्वारा संचालित पालना घर में कई बच्चों ने एक साथ मस्ती की l इन बच्चों के अभिभावक इन्हे यहाँ रखकर मेला का परिभ्रमण किया और खरीददारी की l लौटते समय बच्चे को साथ लेते गए l
सरस रसोई में देशी व्यंजनों का आगंतुकों ने उठाया लुत्फ़
सरस रसोई परिसर में सुसज्जित देशी ब्यंजनो के स्टॉल पर आगंतुकों ने बिहार के विभिन्न जिलों के मशहूर व्यंजनों एवं मिठाईयों का लुत्फ़ उठाया और घर के लिए भी ले गए l सिलाव का खाजा, बक्सर के तीसी का लड्डू , खगड़िया का खीर और पेडा, ओल का रसगुल्ला ,लाई, बारा मिठाई , पीठा, राबड़ी जलेबी , पोटैटो ट्विस्टर, स्वीट कॉर्न , केशरिया माल पुआ , गट्टे की सब्जी, बनारसी नवरत्न चाट, मशरूम चिल्ली और फिश टिक्का जैसे व्यंजनों का आगंतुकों ने लुत्फ़ उठाया ।
दीदी की रसोई के व्यंजन का भी बढ़ा क्रेज
देशी ,पौष्टिक एवं लज़ीज़ व्यंजनों के लिए खास रही दीदी की रसोई l दही बड़ा, चुडा-घुघनी, चावल-मछली, लिट्टी-चोखा, दही-चुडा , सत्तू पराठा का स्वाद आगंतुको को भाया l खाया तो खाया घर के लिए भी ले गए।
बिहार का हुनर एवं हस्तशिल्प हुआ स्थापित
बिहार समेत 25 राज्यों से आये ग्रामीण उद्यमियों ने अपनी कला और संस्कृति तथा हस्तशिल्प का प्रदर्शन किया l बिहार के मिथिलांचल की ओर से मधुबनी चित्रकला, सिक्की कला और मखाना, भागलपुर से सिल्क से बने मनोरम परिधान, कैमूर से दरी और कालीन, मुजफ्फरपुर से लहठी और चूड़ी , पूर्वी चंपारण से आये सीप से बनी कलाकृतियों के साथ-साथ कटिहार के आये बांस से बने गृह सज्जा के उत्पाद, पटना जिले से कांस्य एवं पीतल धातु से बने बर्तन, भोजपुर से क्रोसिया कला, दरभंगा और मधेपुरा से आये चमड़े के उत्पाद, पूर्णिया से आये मलबरी के धागों से बनी सुन्दर साड़ियाँ, गया जिले के पत्थारकट्टी कलाएवं लकड़ियों से बने से बने गृह सज्जा के उत्पादों के सस्थ-साथ भागलपुर, बांका के कतरनी चावल, चुडे, बेसन, ने पूरे सरस मेला को अपनी सुन्दरता और खुशबु से सराबोर कर दिया।
जीरो वेस्ट इवेंट
पूर्णत : प्लास्टिक मुक्त सरस मेला को नगर निगम,पटना ने जीरो वेस्ट इवेंट बनाया l जिस परिसर में प्रतिदिन लाखों लोग आये वहां स्वच्छता देखते ही बनी l आगंतुकों के लिए पेयजल एवं शौचालय की भी पर्याप्त व्यवस्था की गई थी l मेला में प्रवेश पूर्णत : निःशुल्क रहा ।
25 राज्यों के शिल्प एवं हुनर को मिला सम्मान
अन्य राज्यों मध्य प्रदेश से आये बुटिकऔर चंदेली प्रिंट की साड़ियाँ, आन्ध्र प्रदेश से आये गरम मसाले एव लकड़ी के गृह सज्जा के उत्पाद, ओड़िसा से आये सवाई घांस से बने साज-सज्जा के उत्पाद एवं सांस्कृतिक परिधान, हरियाणा से एप्लिक कला से सुसज्जित चादर और साड़ियाँ, गुजरात के कच्छ के रण से आये कच्छी कला से बने परिधान, मिटटी के बर्तन, झारखंड से आये जन जातीय कबीलों से आये हुए शिल्पकारों द्वारा निर्मित हर्बल औषधियों के साथ साथ मनमोहक आदीवा गहने और जूट से बने अन्य उत्पाद खूब बिके l असाम से आये बांस से बने उत्पाद, पंजाब से आये फुलकारी कला से बने परिधान, सिक्किम से आये हस्तनिर्मित परिधान, पश्चिम बंगाल से आये खजूर के पत्तों से बने मनमोहक कृत्रिम फूलों एवं पत्थर तथा बांस के बने उत्पाद, तेलंगाना से एप्लिक वर्क की चादरें, छोटे बच्चों के हस्तनिर्मित परिधान एवं जूट तथा चमरे से बने उत्पाद, छत्तीसगढ़ से आये अत्यंत मनमोहक सलवार-सूट और साड़ियों ने इस सरस मेला को पूर्ण रूप से जीवंत कर दिया l उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के लकड़ी के फर्नीचर, सोफे, पलंग, टेबल, झूले,झूमर और सजावट के सामान खूब बिके l वही कैमूर एवं भदोही के कालीन, दरी और पावदानी का क्रेज बरकरार रहा l लकड़ी एवं बांस के खिलौने बच्चों को भाए तो महिलाओं ने किचेन के आइटम की खूब खरीददारी की l
समापन समारोह के अवसर पर मुख्य सांस्कृतिक मंच पर गीत-संगीत और काव्य पाठ की महफ़िल सजी l सबसे पहले पर्यटन विभाग के तत्वाधान में रंग कलाकारों ने लोक नृत्यों की प्रस्तुतियों से समां बाँधा l जट-जतिन, व्याह गीत , कजरी , झूमर आदि की प्रस्तुति की गई l “कोयलिया बोले हो रामा, मोह रंग और बैरन कोयलिया पिया को लिए जा रे” जैसे लोक गीतों पर लोक नृत्य की प्रस्तुति ने दर्शकों को झुमाया l श्रीमती आश, ने काव्य पाठ किया l “कोई पूछे कहाँ से हो तुम” के पाठ ने झकझोरा वहीँ “सर उठाके अपनी कर्मभूमि बिहार कहेंगे” ने बिहारीपन और बिहार की अस्मिता की पहचान कराई l मंच संचालन नाज़िश बानो, राज्य परियोजना प्रबंधक,जीविका एवं श्रीमती सोनी सिंह ने किया।


