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सफलता की कहानी:वित्तीय समावेशन से समृद्धि की ओर कदम बढ़ा रही हैं महिलाएँ।

RKTV NEWS/पटना(बिहार)06 दिसंबर। कभी एक-एक पैसे के लिए मोहताज रहने वाली ग्रामीण क्षेत्र की गरीब महिलाएँ अब हर दिन हजारों रुपये का लेन-देन कर आर्थिक सशक्तिकरण की पहचान बन चुकी हैं। पहले बैंकिंग सेवाओं से वंचित इन महिलाओं ने अब जीविका स्वयं सहायता समूह के माध्यम से बैंकिंग प्रणाली में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। बचत खाता, ऋण और बीमा जैसी वित्तीय सेवाओं तक इनकी पहुँच आसान हुई है और इन्होंने वित्तीय समावेशन के लक्ष्यों को पूरा करने में सफलता पाई है।
बिहार सरकार द्वारा शुरू की गई जीविका परियोजना के प्रयासों से आज बिहार की गरीब महिलाओं के जीवन में काफी बदलाव आया है। राज्य में जीविका द्वारा गठित 10.63 लाख जीविका स्वयं सहायता समूहों से अब तक कुल 1.31 करोड़ महिलाएँ जुड़कर आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं। इनमें से 10.35 लाख स्वयं सहायता समूहों का विभिन्न बैंकों में बचत खाता खोला गया है। वहीं बैंकों द्वारा जीविका स्वयं सहायता समूहों को अब तक कुल 47,563 करोड़ रुपये का ऋण उपलब्ध कराया गया है। महिलाएँ समूह के माध्यम से इन ऋण राषि का उपयोग अपनी विभिन्न जीविकोपार्जन गतिविधियों के लिए कर रही हैं। जीविका समूह में जुड़ने के उपरांत महिलाएँ समूह की बैठक के दौरान नियमित साप्ताहिक बचत करती हैं। इससे महिलाओं में बचत की आदत विकसित हुई है। इनके द्वारा अब तक कुल 2124.92 करोड़ रुपये की बचत की जा चुकी है। समूह स्तर पर छोटी-छोटी रकम की यह बचत आज बड़ी राषि बन चुकी है, जो महिलाओं को स्वावलंबी बनाने का मार्ग प्रषस्त कर रही है।
खास बात यह है कि समूह स्तर पर सभी प्रकार का लेन-देन अब बैंक खातों के माध्यम से हो रहा है। ऐसे में स्वयं सहायता समूह से जुड़ी सभी महिलाओं के पास अपना व्यक्तिगत बचत खाता है और वे इसमें नियमित रूप से रुपये की जमा-निकासी कर रही हैं। यही कारण है कि ग्रामीण स्तर पर बैंक शाखाओं में महिलाओं की जबरदस्त उपस्थिति देखी जाती है। जीविका समूह से जुड़े 1.31 करोड़ महिलाओं में से 85.54 लाख सदस्यों का बीमा भी कराया गया है, जो किसी अनहोनी की स्थिति में उनके परिजनों को वित्तीय मदद प्रदान करता है।
ग्रामीण स्तर पर बैंकिंग सेवाओं के विस्तार में भी जीविका दीदियाँ अपना अहम योगदान दे रही हैं। पंचायत स्तर पर ग्राहक सेवा केंद्र खोले जाने की योजना के तहत अब तक 5,986 जीविका दीदियाँ बैंक सखी के रूप में चयनित किये गए हैं। इन्हें बैंकिंग कार्यप्रणाली के बारे प्रशिक्षित किया गया है, जिससे ये ग्रामीण स्तर पर ग्राहक सेवा केंद्र खोलकर लोगों को बैंकिंग सेवाएँ उपलब्ध करा रही हैं। इन बैंक सखियों के द्वारा प्रत्येक दिन औसतन 11 से 12 करोड़ रुपये का लेन-देन हो रहा है। वहीं इनके द्वारा अब तक कुल 14,962 करोड़ रुपये का लेन-देन किया गया है। सरकार की इस योजना की वजह से एक ओर जहाँ सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं का प्रसार हुआ है वहीं बैंक सखी के रूप में कार्य करने वाली 5,986 दीदियों को कमीषन के तौर पर कुल 35.89 करोड़ रुपये की आय अर्जित हुई है।

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