
आरा/भोजपुर ( डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)29 नवंबर। गुरूवार को जिला स्वास्थ्य समिति की तरफ से ,जगदीशपुर रेफरल अस्पताल में, कालाजार का एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर, आशा कार्यकर्ताओं के लिए आयोजित किया गया ।
जिसकी अध्यक्षता जिला, अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ के एन सिन्हा ने किया। डॉ सिन्हा ने कहा कि कालाजार बालू मक्खी के काटने से ,एक पुराना बुखार है और जब भी मलेरिया, टाइफाइड ना हो तथा अन्य दवा प्रभावित न हो या मरिज को कई दिनों से बुखार में रहने के बाद उसका वजन कम हो जाए, खून कम हो जाए ,शरीर दुर्बल काला हो जाए तो कालाजार बुखार की शंका करनी चाहिए ।वैसे मरीज को आशा कार्यकर्ता प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भेज कर चिकित्सा पदाधिकारी से जांच करावे और आगे उसे कंफर्म करने के लिए सदर अस्पताल भेजे, जहां कालाजार निकालने के बाद उसका इलाज होगा। वीडीसीओ अजीत पटेल ने बताया कि कालाजार की स्थिति में मरिज तथा उसके घर के आसपास बालू मख्खी के मरने के लिए सिंथेटिक पाराथीरोन रसायन का छिड़काव करना है, दीवाल पर करीब 6 फीट। यह मक्खी दरारों में तथा अंधेरे में रहती है। पिरामल के सदस्य ने बताया कि कालाजार दो तरह का होता है एक विसरल, दूसरा पोस्ट डर्मल। जिसमें चमड़े की बीमारी होती है। एफअलए कुमारी प्रियंका ने बताया कि आशा कार्यकर्ताओं को ट्रेनिंग के लिए ₹100 मिलते हैं तथा मरीज को खोजने के लिए भी ₹100 मिलते हैं और कालाजार मरीज मिलने की स्थिति में ₹500 मिलते हैं ।मरीज का निःशुल्क इलाज होता है एवं उसे भी 750 रुपए मिलता है। इस शिविर में सारी आशा कार्यकर्ताओं के साथ रेफरल अस्पताल के प्रभारी डॉ एस किशुन के साथ अन्य स्वास्थ्य कर्मी उपस्थित थे। आरा से सुधीर सिंह ,कमलेश जी, पीरामल के हिमांशु जी ,मुन्नाजी, कुमारी सोनल(एनआरसी) भी प्रशिक्षण में शामिल थी। कालाजार के अलावा कुपोषित बच्चों के एन आर सी में इलाज एवं पोषण की भी सूचना दी गई तथा पुरुष नसबंदी के बारे में भी बताया गया जो परिवार कल्याण पखवाड़ा के तहत 30 नवंबर तक चलेगा।
