स्वस्थ और रोग मुक्त रहने के लिए मोटे अनाज को आहार बनायें: पद्मश्री डॉ.खादर वली
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)26 नवंबर।भोजपुर जिले के कोइलवर प्रखंड स्थित बहियारा गांव में सोमवार को विश्वविख्यात मिलेट्समैन पद्मश्री डॉ.खादर वली ने आहार में बदलाव कर बिना दवा के किसी भी बीमारी का सफल उपचार करने का मंत्र दिया। इन्होंने मिलेट्स आधारित आहार को अपना कर पूरे आम जन को स्वस्थ बनाने की मुहिम को चलाने वाले भाजपा के संस्थापक सदस्य और पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ.आरके सिन्हा के मार्गदर्शन में विश्वविख्यात मिलेट्समैन पद्मश्री डॉ.खादर वली का व्याख्यान हुआ। क्या मोटे अनाज को आहार बनाकर स्वस्थ रहा जा सकता है ? इस कौतूहल का राज जानने के लिए भोजपुर के ही नहीं अन्य बिहार के अन्य जिलों से भी लोग सुनने के लिए सैकड़ों लोग उपस्थित हुए और व्याख्यान को ध्यानपूर्वक सुना।
डॉ.खादर वली ने व्याख्यान में बताया की प्राचीन खान पान पद्धति में मोटे अनाज पर आधारित आहार के सेवन से सभी बिमारियों को दूर भगाया जा सकता है।उन्होंने ज्वार, बाजड़ा, कोदो, कंगनी, रागी, सांवा जैसे मिलेट्स के फायदे बताये और उसके सेवन से अलग अलग कई बिमारियों को बिना दवा के खत्म करने के प्रोटोकॉल बताये। उन्होंने कहा कि भारत में प्राचीन काल से यही भोजन स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से सही भोजन था लेकिन विदेशी साजिश के तहत भारत में चावल और गेहूं की खेती को बढ़ावा दिया गया और देश को बिमारियों की आग में झोंक दिया गया।बाद में साजिश रचने वाली यही विदेशी कम्पनियां टेबलेट और इंजेक्शन बनाकर भारत में बेचने पहुँच गई। पद्मश्री डॉ. खादर वली ने कहा कि हमने वैसे कैसर पीड़ित को ठीक करके नई जिंदगी दी है जिसे डॉक्टर ने यह कहते हुए अस्पताल से घर भेज दिया था कि बस दो चार दिन की ही आपकी जिंदगी बची है।यह सब सिर्फ मोटे अनाज पर आधारित भोजन और वर्तमान आहार में बदलाव करके सम्भव कर दिखाया।उन्होंने कहा कि देश को स्वस्थ करने का अभियान लगातार चलता रहेगा और किसानो को मोटे अनाज की खेती की तरफ फिर से वापस लाना है।
पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. आरके सिन्हा ने कहा कि मोटे अनाज की तरफ किसानो को लौटने का अब समय आ गया है।जिस तरह से देश में शुगर, ब्लडप्रेसर, हृदय रोग, कैंसर जैसी भयानक बीमारियां पांव पसार चुकी है। ऐसे में अब गेहूं और उजले चावल से दूरी बनानी होगी।सौ साल पहले लोग ज्वार, बाजड़ा, कोदो, कंगनी, मड़ूआ, हरा सांवा पर आधारित खाना खाकर सौ साल से अधिक की जिंदगी जीते थे। आज गेहूं, चावल अनाज से कई बिमारियों बढ़ी है।उन्होंने कहा कि मोटे अनाज की खेती के लिए न सिंचाई की जरूरत है, न कीटनाशक और न खाद की आवश्यकता है। मोटे अनाज की तरफ चिड़ियों का झुण्ड जरूर आता है लेकिन उन्हें भगाना नहीं चाहिए। उनके विष्टा मोटे अनाज की खेती का सबसे बड़ा उर्वरक है।डॉ सिन्हा ने किसानो को मोटे अनाज की तरफ लौटने का आह्वान करते हुए कहा कि ज्वार, बाजड़ा, कोदो, कंगनी, रागी, सांवा का बीज वे निःशुल्क उपलब्ध भी कराएँगे।
अतिथियों का स्वागत एसीएफएल बैंक के सीइओ ज्ञान मोहन जी ने स्वागत किया। जबकि आद्या मिल्क की निदेशक प्रशासन एवं वित्त रत्ना सिन्हा ने मोटे अनाज से बने गुलदस्ता भेंटकर सम्मानित किया।
वकार्यक्रम का संचालन डॉ. सुरेन्द्र सागर और धन्यवाद ज्ञापन एसीएफएल बैंक के उपाध्यक्ष शुभम विनीत ने किया।
प्रमुख उपस्थिति में नाबार्ड के एजीएम रंजीत कुमार सिन्हा, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक और सम्पादक मुरली मनोहर श्रीवास्तव, जगजीवनराम शोध संस्थान के निदेशक नरेन्द्र पाठक, ब्यूरोचीफ और पत्रकार रवि शंकर श्रीवास्तव, मुखिया शालिनी सिंह,धीरज कुमार सिंह,दीपक श्रीवास्तव,मनोज श्रीवास्तव, दिव्यांशु सिन्हा,सचिन सिन्हा, मनी भूषण श्रीवास्तव,विनय श्रीवास्तव, कमल नयन सिन्हा, डॉ. संदीप कुमार, सुनील सिन्हा, वंदना सिन्हा, गोल्डी सिन्हा, पल्लवी सिन्हा, पायल, सोनालिका सिन्हा, प्रियंका श्रीवास्तव, रणविजय सिंह, धीरेन्द्र सिन्हा, मिथिलेश कुमार पासवान, भदवर पैक्स अध्यक्ष सतीश कुमार सिंह, सुनील श्रीवास्तव, संगीता कुमारी, पूनम सहाय, इंदु देवी, नीलम देवी, रणविजय सिंह, दूरदर्शन की उद्घोषिका श्वेता सुरभि, सागरिका चौधरी, शिवानी श्री, समेत सैकड़ो लोग शामिल हुए।कार्यक्रम में मशहूर लोक गायिका मनीषा श्रीवास्तव के मिलेट्स पर आधारित गीत बजाए गए।

