‘शब्द-सिद्ध’ ही नहीं ‘अक्षर-सिद्ध’ भी थे महाकवि काशीनाथ पाण्डेय

स्मृति-सम्मान से विभूषित हुए साहित्यकार, प्रतियोगिताओं में सफल विद्यार्थीगण हुए पुरस्कृत, हुआ कवि-सम्मेलन।
RKTV NEWS/पटना(बिहार)11 मई। महान स्वतंत्रता-सेनानी, पत्रकार और समालोचक आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी हिन्दी भाषा और साहित्य के महान उन्नायकों में सर्वाधिक वरेण्य व्यक्तित्व हैं। वे अपने युग की साहित्यिक और सांस्कृतिक चेतना को दिशा और दृष्टि प्रदान करने वाले युग-प्रवर्त्तक साहित्यकार थे। उनके विपुल और महान साहित्यिक अवदान के कारण ही, उनकी साहित्य-साधना के युग को हिन्दी साहित्य के इतिहास में ‘द्विवेदी-युग’ के रूप में स्मरण किया जाता है। आधुनिक हिन्दी को, यदि भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने अंगुली पकड़ कर चलना सिखाया तो यह कहा जा सकता है कि द्विवेदी जी के काल में वह पूर्ण-यौवना हुई। आधुनिक हिन्दी, जिसे खड़ी बोली भी कहा गया, को गढ़ने में असंदिग्ध रूप से आचार्यवर्य महावीर प्रसाद द्विवेदी का अद्वितीय अवदान है।
यह बातें रविवार को बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में आयोजित जयंती-सह-स्मृति-सम्मान समारोह एवं कवि-सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए, सम्मेलन अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने कही। महाकवि काशीनाथ पाण्डेय को स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि, ‘बयाने-क्रौंच-ताईर’ नाम की संसार की सबसे लम्बी कविता लिखने वाले पाण्डेय जी ‘शब्द-सिद्ध ही नहीं, ‘अक्षर-सिद्ध’ महाकवि थे।
उन्हें प्रत्येक अक्षर के अर्थों का ज्ञान था। दुनिया भर के शब्द-मणियों को उन्होंने अपने काव्य-साहित्य में पिरोया।
समारोह के मुख्य अतिथि और राज्य उपभोक्ता संरक्षण आयोग, बिहार के अध्यक्ष न्यायमूर्ति संजय कुमार ने कहा कि महान हिन्दी-सेवी महावीर प्रसाद द्विवेदी ने संस्कृत में आचार्य की उपाधि प्राप्त की और कवि-कुलगुरु रवीन्द्र नाथ टैगोर के सान्निध्य में साहित्य की सेवा आरम्भ की।
हिन्दी-साहित्य के उन्नयन में उनके योगदान को कभी विस्मृत नहीं किया जा सकता।
पटना उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति मान्धाता सिंह, सम्मेलन के उपाध्यक्ष डा उपेन्द्रनाथ पाण्डेय, डा मधु वर्मा, डा रमेश पाठक,डा पूनम आनन्द, विभारानी श्रीवास्तव, डा पुष्पा जमुआर आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
इस अवसर पर, वरिष्ठ साहित्यकार भगवती प्रसाद द्विवेदी, पद्मश्री श्याम शर्मा, राकेश प्रवीर, समाज-सेविका संजू सिंह तथा सायक देव मुखर्जी को ‘महाकवि काशीनाथ पाण्डेय शिखर-सम्मान -२०२६’ से विभूषित किया गया।
गत शनिवार को संपन्न हुई ‘महाकवि काशीनाथ पाण्डेय स्मृति प्रतियोगिता के सफल प्रतिभागियों, अंश कुमार, आराध्या झा, शाश्वत, मुस्कान, शाइनी सिन्हा, दिव्या रानी (कनिष्ठ काव्य-पाठ), वेद प्रकाश, सत्यजीत गांगुली, लवली कुमारी, प्रीति आज़ाद, श्रुति कुमारी (वरिष्ठ काव्य-पाठ), गुड़िया कुमारी, मांशी कुमारी, मिशिका मयूरी, ( कनिष्ठ गीत/ग़ज़ल गायन), अंजलि कुमारी (वरिष्ठ गीत/ग़ज़ल गायन), शिवम् कुमार, मुस्कान कुमार, करिश्मा कुमारी, दीपिका कुमारी, पीहू कुमारी, अंशिका राज, (स्वतंत्र कनिष्ठ काव्य-पाठ), पूनम, दिव्या रानी, रंजन कुमार अमृतिनिधि, नन्दन कुमार (स्वतंत्र वरिष्ठ काव्य-पाठ), अंश (कनिष्ठ व्याख्यान) और विकास कुमार (वरिष्ठ व्याख्यान) को पुरस्कृत किया गया। सर्वाधिक पुरस्कार अर्जित करने के लिए इस वर्ष की ‘सकल विजेता हस्तानान्तरणीय स्मृतिका’ देशरत्न राजेंद्र प्रसाद शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय के माध्यम से आर्यभट्ट ज्ञान विश्व विद्यालय को प्राप्त हुई।
अंतर्विद्यालयी स्तर पर यह स्मृतिका इंद्रप्रस्थ सिंह गंग-स्थली उच्च माध्यमिक बालिका ज्ञानपीठ को प्रदान की गयी। निर्णायक मण्डल में कवयित्री आराधना प्रसाद, नम्रता सिंह तथा पं अविनय काशीनाथ सम्मिलित थे।
इस अवसर पर आयोजित कवि सम्मेलन का आरंभ चंदा मिश्र की वाणी-वंदना से हुआ। वरिष्ठ कवि डा रत्नेश्वर सिंह, प्रो सुनील कुमार उपाध्याय, सिद्धेश्वर, सागरिका राय, इन्दु उपाध्याय, मधु रानी लाल, डा एम के मधु, ईं अशोक कुमार, डा अर्चना त्रिपाठी, कुमार अनुपम, डा प्रियम्वदा मिश्र, जय प्रकाश पुजारी, रेणु मिश्र, डा सुमेधा पाठाक, मृत्युंजय गोविंद, सुजाता मिश्र, इन्दु भूषण सहाय, डा आर प्रवेश, अर्जुन प्रसाद सिंह, वीणा कुमारी, दीपक कुमार गुप्त, पुनीता कुमारी श्रीवास्तव, दिव्य रानी, नन्दन कुमार, नीता सहाय, राज प्रिया रानी, संजय लाल चौधरी आदि कवियों और कवयित्रियों ने काव्य-पाठ कर आयोजन का सुंदर ऋंगार किया ।
अतिथियों का स्वागत सम्मेलन की उपाध्यक्ष डा मधु वर्मा ने तथा धन्यवाद-ज्ञापन प्रबंध मंत्री कृष्ण रंजन सिंह ने किया। मंच का संचालन सम्मेलन की कलामंत्री डा पल्लवी विश्वास ने किया।
समारोह में,वैशाली ज़िला हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष शशिभूषण कुमार, ईं बाँके बिहारी साव, नंदिनी राज, रोहिणी पति सिंह, डा चंद्र शेखर आज़ाद, डा विजय कुमार, सच्चिदानन्द शर्मा, अश्विनी कविराज आदि प्रबुद्धजन उपस्थित थे।

