पटना/बिहार (राकेश मंगल सिन्हा) 23 अप्रैल। राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, पूर्व सांसद तथा पूर्व मंत्री शिवानंद तिवारी ने कहा है कि मोदी और संघ जैसे विभाजक ताक़तों को पराजित करना ही आज का आपद धर्म और सच्ची देश भक्ति है. उन्होंने कहा कि राजस्थान की चुनावी सभाओं में प्रधानमंत्री जी को सुनना देश को शर्मसार करने वाला था। इतने बड़े मुल्क का प्रधानमंत्री इस तरह की भाषा बोल सकता है, यह सोच से परे है। कांग्रेस सत्ता में आयेगी तो हिंदू महिलाओं का मंगल सूत्र छीन कर मुसलमानों में बाँट देगी। हिंदुओं की संपत्ति का सर्वेक्षण करा कर उसे ज़्यादा बच्चे पैदा करने वालों के बीच बाँट देगी। ऐसी भाषा वह प्रधानमंत्री बोल रहा है जिसने संविधान की किताब पर मत्था टेक कर देश को वचन दिया था कि उसके लिए सबसे पवित्र धार्मिक ग्रंथ यही है। आज वही प्रधानमंत्री चुनाव में अपनी संभावित पराजय को देख कर इस प्रकार की नफरती भाषा का इस्तेमाल कर रहा है ताकि हिंदू उसके पक्ष में गोलबंद हो जाएँ। मोदी जी बार बार कह रहे हैं कि पिछले दस वर्षों का मेरा काम तो झांकी है। लेकिन देश को तो ऐसा कुछ नहीं दिखा है जिससे भविष्य में आपके प्रति भरोसा दिखे। भविष्य में आपकी क्या योजना है यह भी आपने देश के सामने अभी तक नहीं रखा है। ग़रीबी, महंगाई, बेरोज़गारी से लोग तबाह और त्रस्त हैं। दस वर्षों के आपके शासन में ग़रीबों और नौजवानों के लिए त्राहिमाम है लेकिन अमीरों के बल्ले बल्ले हैं। एक से बढ़कर एक पगड़ी और पोशाक पहन कर दिन रात आप बोलते रहते हैं। आपको ग़लतफ़हमी हो सकती है कि आपके भाषणों और पोशाकों से जनता को संतुष्ट रहना चाहिए। लेकिन लोग अगर संतुष्ट हो गये होते तो आपको नफ़रत फैलाने वाली भाषा बोलने की ज़रूरत ही नहीं पड़ती। प्रधानमंत्री को ऐसी भाषा बोलने की कौन सी बाध्यता हुई जिससे दुनिया भर में थू थू हो रही है। इसको समझने के लिये इनके अतीत को जानना होगा। गुजरात में इनकी सरकार को स्थायित्व कैसे मिली इसको समझने के लिये हमें वहाँ की इनकी राजनीति को समझना होगा। उन्होंने कहा कि
दरअसल मोदी जी का संकट यह है कि इन्होंने देश को भी गुजरात समझ लिया है। गुजरात में इन्होंने जिस तरह डूबती भाजपा को बचाया उसको जानने की ज़रूरत है। 7 अक्तूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में मोदी जी ने शपथ लिया था। इनके पहले केशू भाई पटेल वहाँ के मुख्यमंत्री थे. उनके नेतृत्व में भाजपा वहाँ नीचे लुढ़कती जा रही थी। विधान सभा के उपचुनावों में ही नहीं बल्कि स्थानीय निकाय के चुनावों में भी भाजपा की हार हो रही थी. इसी पृष्ठभूमि में केशो भाई पटेल को हटाकर मोदी जी को भाजपा ने गुजरात का मुख्यमंत्री बनाया। उनके सामने चंद महीने बाद होने वाले विधान सभा चुनाव में भाजपा को जीत दिलाने की चुनौती थी।
7 अक्तूबर को मोदी जी के शपथ लेने लगभग चार महीना बाद 27 फ़रवरी को गोधरा कांड हो गया। उस कांड में गोधरा के पास साबरमती एक्सप्रेस गाड़ी के एक डब्बा में आग लग गई। उस दर्दनाक घटना में 59 लोग जल कर मर गए। उन्होंने कहा कि पुलिस मैनुअल के निर्देश के विपरीत मृतकों के शव को बग़ैर ढँके दिन में शहर में घुमाया गया। उस संख्या में लाश देख कर लोगों में ग़ुस्सा भड़का और दंगा शुरू हो गया। उन्होंने कहा कि ऐसा हो, इसी मक़सद से लाशों को सरेआम घुमाया गया। उन्होंने कहा कि दंगा के दरम्यान पुलिस प्रशासन ऊपर के निर्देशानुसार मूक दर्शक बना रहा।
उसी पृष्ठभूमि में 12 दिसंबर 2002 को गुजरात विधान सभा का चुनाव हुआ। मोदी जी तो और पहले ही विधान सभा का चुनाव कराना चाहते थे ताकि हिंदू-मुस्लिम बँटवारे का वे ज़्यादा से ज़्यादा लाभ उठा सकें। उन्होंने कहा कि उस समय के मुख्य चुनाव आयुक्त जेम्स लिंगदोह जो ईसाई थे, उस गंभीर तनाव की स्थिति में चुनाव नहीं कराना चाहते थे लेकिन मुझे याद है कि उनके धर्म को लेकर मोदी जी उनपर ऐसा हमलावर हुए कि चुनाव आयोग को उसी पृष्ठभूमि में चुनाव कराना पड़ा। उस चुनाव में मोदी जी ने गुजरात में जीत की जो नींव डाली, उसी नींव पर आज तक वहाँ भाजपा की जीत का सिलसिला जारी है। उन्होंने कहा कि गुजरात के उस विधान सभा चुनाव (2002) में कांग्रेस पार्टी ने सहयोग के लिए लालू जी को भी आमंत्रित किया था। उसके पहले बिहार में आडवाणी जी को गिरफ़्तार करने के बाद लालू जी मुस्लिम दुनिया के ‘हीरो’ हो चुके थे। अपने साथ लालू जी मुझे भी गुजरात ले गए थे। वहाँ मैंने लालू जी के प्रति लोगों मे विशेष रूप से मुसलमानों की दीवानगी प्रत्यक्ष देखी। उन्होंने कहा कि मैंने यह समझने का प्रयास किया कि गुजरात के लोगों का समर्थन मोदी जी को क्यों मिल रहा है। चुनाव के बाद के सर्वेक्षण में मैंने देखा कि किस तरह हिंदुओं को मुसलमानों से डरवा कर उनका वोट लिया जा रहा है। उस समय वहाँ मुसलमानों की आबादी दस प्रतिशत से भी कम थी। उन्होंने कहा कि सबसे पहले मोदी जी ने वहाँ के नब्बे प्रतिशत हिंदुओं के मन में दस प्रतिशत से भी कम आबादी वाले मुसलमानों का डर पैदा किया और उसके बाद मैं आपको सुरक्षा दूँगा इस नाम पर उनका वोट लिया तथा आज तक ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस विधि को अगर हम समझने का प्रयास करें तो स्पष्ट दिखाई देता है कि सबसे पहले नब्बे प्रतिशत आबादी वाले हिंदुओं के मन में दस प्रतिशत मुसलमानों का डर पैदा कर पहले हिंदुओं को कायर बनाया गया।
उन्होंने कहा कि इनकी मानसिकता इस बात से पता चलती है कि विलकिस बानो के परिवार के दर्जन भर लोगों के साथ उसके बेटे की हत्या की गई और उस गर्भवती महिला के साथ उन लोगों ने बलात्कार किया। अभियुक्तों पर मुक़दमा चला आजीवन कारावास की सजा हुई। उन्होंने कहा कि जाल फ़रेब कर समय के पहले सरकार ने उनको जेल से मुक्त कर दिया तथा रिहाई के बाद उन बलात्कारियों और हत्यारों को माला पहनाकर उनको महिमा मंडित किया गया, मिठाइयां बाँटी गई। उन्होंने कहा कि इतना ही नहीं बल्कि उनमें से एक अभियुक्त की बेटी को उसी विधान सभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया गया जहां वह जघन्य घटना हुई थी। बाद में उस बहादुर महिला ने संघर्ष किया और सुप्रीम कोर्ट ने उन लोगों को फिर जेल भेजा। उन्होंने कहा कि इतना विस्तार से लिखने का मक़सद यह है कि मोदी जी और उनके पीछे जो ताक़त है उसको हम समझ सकें। उन्होंने कहा कि मोदी जी समेत यह पूरा गिरोह बीमार मानसिकता के लोगों का है। उन्होंने कहा कि मोदी जी ने गुजरात में जो प्रयोग किया उसी को देश में दोहराना चाहते हैं लेकिन यह देश गुजरात नहीं है। उन्होंने कहा कि दरअसल प्रधानमंत्री जी न इस देश को समझते हैं और न हिंदू समाज को। यह देश विविधताओं से भरा हुआ है। बहुलताओं से भरा हुआ यह देश समावेशी है। इतनी भाषाएँ, इतनी बोलियाँ, भिन्न-भिन्न रीति रिवाज, अलग-अलग परंपराओं वाले इस देश में सदियों से लोग एक साथ रहते आये हैं। हिंदू धर्म तो इतना समावेशी है कि इसके न एक भगवान हैं और न कोई एक धार्मिक ग्रंथ। उन्होंने कहा कि अंग्रेज़ कहते थे कि इस देश के भीतर अनेक देश हैं। इसलिए उन्होंने भविष्यवाणी की थी कि आज़ादी के बाद यह देश बिखर जाएगा। लेकिन ऐसा कहने वालों को इस देश ने ग़लत साबित किया। उन्होंने कहा कि दूर मत जाइए। बिहार को ही देखिए। कितनी बोलियाँ बोलने वाले यहाँ रहते हैं। भोजपुरी, मैथिली,मगही,वज्जिका, अंगिका। यहाँ दो-दो पंचांग उपयोग में आते हैं। मिथिला का पंचांग है। हमारी ओर बनारसी पंचांग चलता है। उन्होंने कहा कि अगर नियम बने कि यहाँ सिर्फ़ मैथिली या भोजपुरी बोली जाएगी तो क्या होगा सिवाय हंगामा और तनाव के। उन्होंने आरोप लगाया कि इस देश को न मोदी जी समझते हैं न ही उनका राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ। उनका कहना है कि ये देश की विविधता को मिटा कर इसे एक रंग में रंगना चाहते हैं जिसका नतीजा होगा कि यह देश बिखर जाएगा और कई टुकड़ों में बंट जाएगा। इसलिए जो लोकतंत्र और संविधान को समाप्त करने की आशंका जताई जा रही है वह काल्पनिक नहीं है। उनका कहना है कि सत्ता जाने के भय से ये लोग बेचैन हैं लेकिन यह देश वैसा नहीं है जिसकी ये लोग कल्पना करते हैं। यह सही है कि अलग अलग जातियों और मज़हबों के बीच लड़ाई झगड़े भी होते रहते हैं लेकिन इनका असर अस्थायी होता है। फिर लौट कर वही समाज वही दुनिया। उन्होंने कहा कि उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि इस देश को बचाने के लिए मोदी और संघ जैसी विभाजक ताक़तों को पराजित करना ही हमारा और आपका आपद धर्म होना चाहिए। इनको पराजित करना ही आज सच्ची देश भक्ति है।

