RKTV NEWS/आरा (भोजपुर)15 अप्रैल।अगियांव धोबहा मे आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह यज्ञ के चतुर्थ दिवस पर ब्रह्मपुरपीठाधीश्वर जगद्गुरु रामाशनुजाचार्य विद्या वाचस्पति आचार्य धर्मेन्द्र जी महाराज ने कहा कि नारायण बडे कृपालु है,उनकी कृपा सब पर बरसती रहती है,बस शर्त इतना ही है श्रद्धा से उन्हे याद किया जाय।याद करने में देरी हो सकती है, उनके दया करने में देर नही होती। उन्होंने इसके प्रमाण मे गजेन्द्र मोक्ष की कथा कही।श्रीमद्भागवत की कथि व नारायण नाम मे इतनी शक्ति है कि पापी भी नारायण नाम से गोविंद लोक का अधिकारी बन जाता है।इस कथन की पुष्टि में अजामिल मोक्ष की कथा कही आचार्य जी ने। आगे प्रह्लाद चरित्र को कहते हुए जगद्गुरु रामाशनुजाचार्य विद्या वाचस्पति आचार्य धर्मेन्द्र ने कहा कि कोई जरूरी नहीं है कि उत्तम कुल मे उत्तम संतान हो और संस्कार हीन कुल में संस्कारहीन संतान हो। इससिद्धांत के प्रमाण आचार्य जी ने कहा कि कश्यप ऋषि के कुल मे हिरन्याच्छ,हिरन्यकश्यपू का आना और हिरन्यकश्यपू के कुल मे भक्त राज प्रह्लाद के आने की कथा कही साथ मे दीती और कयाधू के जीवनव्यवहार से गृहस्थों को शिक्षा लेने की सलाह दी। सूर्य वंश का वर्णन करते हुए अम्बरीष, सगर,चरित्र पर प्रकाश डाला।फिर सागर मंथन के हेतु और मंथन से निकले रत्नो,और चोरों कुम्भो की कथा कही।आगे उन्होंने गंगा अवतरण की कथा कहते हुए कहा गंगा जी दुनिया के पापियों को पाप से मुक्त करती है जबकि गंगा जब अपवित्र होती है तो वैष्णव के स्नान मात्र से पवित्र हो जाती है।
उन्होंने वर्तमान संदर्भ मे गंगा के प्रदूषण मुक्ति पर बल दिया। आगे उन्होंने रामजन्म के विविध हेतु की चर्चा करते हुए श्रीराम की बाललीला, विवाह लीला, वन लीला, रण लीला ,राजलीला और प्रस्थान लीलाओं का सारगर्भित व्याख्या करते हुए कहा कि श्रीराम जी का पूरा जीवन मर्यादित रहा जो सनातन धर्म का व्यावहारिक स्वरुप है,अनुकरणीय है। इस अवसर पर कथा मे दिल्ली लोनी से हस्तीनापुर पीठाधीश्वर रघुनंदन रामानुज वैष्णव दास,आरन्य देवी पीठाधीश्वर महंत मनोजबाबा,काशी से त्रिगुणानंद स्वामी,वैदिक रासबिहारी पान्डेय, सनातन धर्म संदेश चैनल के सुमनरामानुज वैष्णव दास भागलपुरी पधारे।कथा में प्रक्षेत्र के भक्तों की भीड़ उमड़ रही है,सब कथा सुनकर कहते सुने जा रहे हैं पहली श्रीमद्भागवत की दिव्य कथा सुनने को मिल रही है।


