छत्तीसगढ़, गोवा, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र की कला एवं जीवंत परंपराओं का हुआ भव्य प्रदर्शन ।
भोपाल/मध्यप्रदेश ( मनोज कुमार प्रसाद)18 अगस्त। भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के गौरवपूर्ण अवसर पर राष्ट्रपति भवन में आयोजित ‘एट होम’ समारोह के अवसर पर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय, भोपाल द्वारा देश की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित करने वाली विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। प्रदर्शनी में छत्तीसगढ़, गोवा, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक कला शैलियों तथा जीवंत लोक परंपराओं को विशेष रूप से प्रस्तुत किया गया।
प्रदर्शनी में मानव संग्रहालय के रिजर्व कलेक्शन से चयनित महत्वपूर्ण एवं विशिष्ट सांस्कृतिक प्रादर्शों को प्रदर्शित किया गया है। इन प्रादर्शों के माध्यम से विभिन्न राज्यों की पारंपरिक जीवनशैली, कलात्मक अभिव्यक्तियों, सृजनात्मकता और सांस्कृतिक विविधता को राष्ट्रपति भवन राष्ट्रपति द्रौपदी मुरमू ,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित देश एवं विदेश के सम्माननीय अतिथियों के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
इस प्रदर्शनी का एक प्रमुख आकर्षण 31 प्रतिष्ठित पारंपरिक कलाकारों एवं शिल्पकारों की सहभागिता रही। इन कलाकारों ने अपनी पारंपरिक कला, कौशल और पीढ़ियों से अर्जित ज्ञान के माध्यम से प्रदर्शनी को जीवंत स्वरूप प्रदान किया।
कलाकारों की कार्यशालाओं का आयोजन दो चरणों में किया गया। प्रथम चरण में 5 से 16 जुलाई 2026 तक इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय, भोपाल में कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें कलाकारों ने अपनी-अपनी पारंपरिक कला शैलियों से प्रेरित विविध कलाकृतियों का सृजन किया। इन कलाकृतियों में से चयनित कृतियों को राष्ट्रपति भवन में प्रदर्शनी के लिए तैयार किया गया।
कार्यशाला का दूसरा चरण 5 से 12 अगस्त 2026 तक राष्ट्रपति भवन में आयोजित किया गया। इस दौरान कलाकारों ने राष्ट्रपति भवन परिसर के विशिष्ट परिवेश में अपनी कला को और विकसित करते हुए उसे प्रदर्शनी के संदर्भ में प्रस्तुत किया। इस चरण ने कलाकारों को देश के सर्वोच्च संवैधानिक परिसर में अपनी पारंपरिक कला एवं सांस्कृतिक ज्ञान को प्रत्यक्ष रूप से अभिव्यक्त करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया।
मानव संग्रहालय के निदेशक प्रो. अमिताभ पांडे ने इस महत्वपूर्ण आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्रपति भवन जैसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय मंच पर देश की विविध सांस्कृतिक परंपराओं को प्रस्तुत करना मानव संग्रहालय के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि भारत की वास्तविक शक्ति उसकी ‘विविधता में एकता’ में निहित है और पारंपरिक कलाकार एवं समुदाय इस सांस्कृतिक विरासत के जीवंत वाहक हैं। ऐसे आयोजन हमारी अमूर्त एवं मूर्त सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ियों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
संयोजक डॉ पी अनुराधा ने बताया कि, इस प्रदर्शनी को साकार करने में सहभागी 31 कलाकारों एवं शिल्पकारों का विशेष योगदान रहा। उनके पारंपरिक ज्ञान, कलात्मक उत्कृष्टता, धैर्य और समर्पण ने प्रदर्शनी को भारत की सांस्कृतिक बहुलता के जीवंत उत्सव में परिवर्तित कर दिया। कलाकारों की सहभागिता इस बात का उदाहरण है कि किस प्रकार पारंपरिक ज्ञान और समकालीन प्रस्तुति का समन्वय देश की सांस्कृतिक पहचान को और सशक्त बना सकता है। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुरमू ने प्रदर्शनी में आये कलकारों से चर्चा भी की ।
संग्रहालय के जन संपर्क अधिकारी हेमंत बहादुर सिंह परिहार ने बताया कि,राष्ट्रपति भवन में मानव संग्रहालय का आयोजन केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि भारत की ‘एकता में विविधता’ का उत्सव है। यह उन पीढ़ियों के कलाकारों और समुदायों को सम्मान अर्पित करने का अवसर भी है, जिन्होंने सदियों से देश की सांस्कृतिक परंपराओं को जीवित रखा और उन्हें एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक हस्तांतरित किया।
भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर राष्ट्रपति भवन में देश की विविध कलात्मक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को प्रस्तुत कर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय ने कला और संस्कृति की सशक्त भाषा के माध्यम से राष्ट्र के गौरवपूर्ण उत्सव में अपनी महत्वपूर्ण सहभागिता दर्ज की।

