आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)18 मार्च।17 मार्च को श्रीसनातन शक्तिपीठ संस्थानम् द्वारा चंद्रमा मार्केट जगदेव नगर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के पांचवें दिन प्रवचन करते हुए प्रख्यात भागवत वक्ता आचार्य (डॉ.) भारतभूषण जी महाराज ने कहा कि पृथ्वी ही गौ रूप में हमारा पालन करती हैं। परात्पर परब्रह्म परमात्मा ने श्रीकृष्ण के रूप में मथुरा में अवतार लिया किन्तु रातों रात गोकुल महावन में आ गए।
भगवान श्रीकृष्ण ने गोवंश की अपने हाथों से सेवा की। गोपाल और गोविंद बनकर वे प्रसन्न हुए। गोवंश का रक्त गिरना कलंक है। जहां गोवंश का रक्त गिरता है वहां कोई धर्म और अनुष्ठान फलित नहीं हो पाते।
सत्ता के मद में देवराज इन्द्र ने भगवान श्रीकृष्ण की उपेक्षा शुरू की तथा प्रलयंकर वर्षा कराकर भारी भय उपस्थापित कर दिया। भगवान श्रीकृष्ण ने पूरे सात दिनों तक एक ही हाथ से गोवर्धन पर्वत धारण कर समस्त गोवंश, गोपालों और गोकुल मंडल की रक्षा की।
स्वर्ग की गाय के नेतृत्व में देवराज इन्द्र और सभी देवताओं ने भगवान श्रीकृष्ण का गोविंद पद पर अभिषेक किया।गोवंश के इन्द्र को गोविंद कहते हैं।गायों और गोपालों के बीच भगवान का प्राकट्योत्सव मनाया गया।
रुक्मिणी मंगल की कथा के क्रम में आचार्य ने कहा कि विवाह सबसे पवित्र संस्कार है जिससे जीवन-यज्ञ की सफलता,वंश परम्परा की प्रशस्ति तथा देव-पितृ कार्य की संपन्नता होती है। वस्तुतः पति-पत्नी दो देह एक प्राण जैसे होते हैं।उन्होंने कन्यादान का शास्त्रीय स्वरूप और महत्व बताते हुए कहा कि जब तक माता-पिता विधिपूर्वक श्रेष्ठ वर को कन्यादान न करें तब तक उसका कोई भी स्पर्श नहीं कर सकता है। उन्होंने विवाह और दांपत्य जीवन में आई हुई विकृतियों से लोगों को सचेत करते हुए पुरानी परंपरा और शास्त्रीय मर्यादा के पालन पर बल दिया।
इस अवसर पर यजमान विद्या शंकर सिंह, इंद्रमणि सिंह, भोला सिंह, रंजू देवी, विद्यावती देवी संयोजक बृजबिहारी सिंह, सचिव त्रिलोकी नाथ सिंह, वासुदेव सिंह, भुवन सिंह, ब्रह्मदेव राय,सुधीर कुमार, वंशीधर पाण्डेय, प्रो रामनाथ राय, जगदीप नारायण ओझा आदि की उपस्थिति रही। राकेश मिश्र ने भजन संगीत प्रस्तुत किया।



