
साम्प्रदायिक मेल
हे अली, बजरंग बली, जय गुरु, जय-जय गिरिजा; झट-पट रोको खलबली सब जग है तूने सृजा ।
लाल लंगोटी, काली टोपी, गले क्रास या कमर कृपाण; विष का वृक्ष है किसने रोपा, सभी एक हैं, करें एक दूजे का सम्मान ।
धरती का आकार गोल है, सब राहें, बिन्दु पर मिल के रहेंगे; शंखनाद या बाँग, वाहे गुरु या घंटानाद, सब मिलकर बस, अनहद् नाद् रहेंगे ।
पकड़े राह हम दया धर्म का, तज कर निज अभियान; ग्रहण करें हम, तजना क्या-क्या, बस सुख का एक निदान ।

(उक्त कविता ख्यातिप्राप्त लेखक,कवि,व्यंग्यकार,समीक्षक, अनुवादक “डॉ कृष्ण दयाल सिंह”जो एक अवकाश प्राप्त डाक सेवा अधिकारी भी है, उनके साहित्य काल के शुरूआती दौर में 09 फरवरी 1998 को प्रकाशित की गई कविता संग्रह पुस्तक “यत्र-तत्र”से ली गई है और यह कवि की उक्त संग्रह की पांचवीं रचना है। RKTV NEWS नित्य इनके संग्रहित पुस्तक से क्रमवार एक एक रचना प्रकाशित करेगी। इनकी कई रचनाएं विभिन्न पत्र पत्रिकाओं और समाचार पत्रों में प्रकाशित होती रहती है साथ ही इनके दर्जनों पुस्तक भी प्रकाशित हो चुके है, वर्तमान में बिहार राज्य के भोजपुर जिला अंतर्गत आरा के वशिष्ठपुरी में निवास करते है। सुझाव और संपर्क हेतु: 9570805395)

