आरा/भोजपुर 14 दिसंबर।लीजेंड बक्शी कुलदीप नारायण सिन्हा मेमोरियल कल्चरल सोसायटी की ओर से आयोजित साप्ताहिक कार्यक्रम गुरुवासरे संगीत सभा का उद्घाटन शास्त्रीय गायिका विदुषी डॉ. जया जैन ने दीप प्रज्जवलित कर किया। स्थानीय महाजन टोली स्थित ठाकुरबाड़ी प्रांगण में इस सांगीतिक सभा को संबोधित करते हुये डॉ. जया जैन ने कहा कि संगीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं मोक्ष प्राप्ति का मार्ग है। सामवेद स्वयम नारायण का स्वरूप है इसकी भक्ति करने वाले संगीत के माध्यम से प्रभु का दर्शन तक कर सकते हैं। इस अवसर पर प्रमुख कलाकार नंदिता पंडित ने राग शुद्ध सारंग में विलंबित ख्याल”जोबन दोपहर की भूले मत कर गुमान” व तीनताल की बंदिश “अब मोरी बात मान ले पिहरवा जाऊं तोपे बारी” खमाज में दादरा “नजरिया लग जाएंगी मोरे कान्हा को कोई मत देखो” व भजन “बाजी री मुरलिया बाजी” प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्र मुग्ध कर दिया।
राग की बढ़त व स्वरों के माधुर्य से नंदिता ने समां बांधा। हारमोनियम पर श्रेया पाण्डेय व तबले पर गुरु बक्शी विकास ने संगत किया। मंच संचालन शंभू शरण ओझा व धन्यवाद ज्ञापन संयोजक अमित कुमार ने किया। इस अवसर पर कथक नृत्यांगना आदित्या श्रीवास्तव प्रोफेसर विश्वनाथ राय, दिनेश्वर प्रसाद , राणा प्रताप सिन्हा , तबला वादक कृष्ण कान्त मानस , महंत रामाशीष दास, शास्त्रीय गायक महेश यादव रवि शंकर, स्नेहा पाण्डेय, संरक्षक सुशील कुमार ‘देहाती’ समेत कई संगीत रसिक व प्रशिक्षु उपस्थित थे।

