
RKTV NEWS/बक्सर (बिहार)09 जून।भारत के महान संत जीयर स्वामी जी महाराज के कृपापात्र विश्वाचार्य ब्रह्मपुर पीठाधीश्वर आचार्य धर्मेन्द्र जी महाराज ने उत्तर वाहिनी गंगा के पावन तट अवस्थित शिवघाट , शिवपुरी बक्सर में आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह कथा में कृपालु कृष्ण की जीवंत बाल लीलाओं का मनोहारी वर्णन करते हुए कहा कि भगवान कृष्ण की सभी लीलाएं भक्त कल्याण कारी और श्रद्धा भक्ति जागृत करने वाली है। पूतना के चरित्र कहते हुए आचार्य जी ने कहा कि भगवान सबकी मनोकामना पूरा करते हैं। पूर्व जन्म में पूतना दानवीर बली की भगिनी रत्नमाली थी जो वामन भगवान के मनोहारी ब्रह्मचारी स्वरूप को देखकर कामना की थी ,
कास यह ब्रम्हचारी मेरा पुत्र होता –लेकिन जब वामन भगवान ने बली से दान में तीन पग भूमि मांगी और तीन पग भूमि पुरी नहीं होने पर बली को बंदी बना लिया तो कहा यह विष देकर मार देने लायक है। भगवान ने उसकी मन की बात जानकर कहा तुम्हारी मनोकामना पूरी होगी जब मैं द्वापरयुग में आऊंगा ,दूध भी पीला लेना, विष भी दे देना।वहीं रत्नमाली पुतना हुई , भगवान ने उसे सद्गति प्रदान की। भगवान श्री कृष्ण की माखन चोरी लीला का वर्णन करते हुए कहा कि माखन कोमल, निर्मल होता है, भगवान को कोमलता व निर्मलता प्रिय है। मृदा भक्षण लीला को वर्णन करते कहा कि भगवान गुणातीत,रस्सातीत है।मीट्टी रज है यानी भगवान रज धारण कर पृथ्वी की क्षमाशीलता धारण कर रहे हैं।
नलकूबर और मणिग्रीव के
उद्धार की कथा कहते हुए कहा कि
ये दोनों कुबेर के पुत्र हैं, तरूण हैं सुन्दर है, अहंकार के कारण देवर्षि नारद का अपमान करते और देवर्षि नारद जी से शाप पाते हैं और अम्लार्जून के वृक्ष बनते हैं ।श्री कृष्ण के अंग-संग से निजलोक को प्राप्त करते हैं। भगवान सब कुछ सह सकते हैं ,पर संत का अपमान नहीं।कभी संत का अपमान न हो , सावधानी रखनी चाहिए। ,, भगवान के गोकुल से वृन्दावन पधराने की कथा का रहस्य बतलाते हुए कहा कि भगवान प्रकृति मध्य रहने, गोपालन, पर्यावरण संतुलन की शिक्षा देने हेतु वृन्दावन बिहारी बनते हैं। वृन्दावन का अर्थ और महिमा को बताते हूं ब्रह्म जी द्वारा गोपों बच्छड़ो की चोरी की कथा कहते उनके अहंकार विसर्जन की कथा कहते हुये कहां कि भगवान किसी का अहंकार नहीं रहने देते। कलियानाग नाथन की कथा कहते आचार्य जी ने बताया कि यह कथा यमुना को प्रदूषण मुक्त करने की कथा और नदियों को प्रदूषण मुक्ति का संदेश देती है। भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं का वर्णन करते कंस के द्वारा कृष्ण बध के लिए बार बार राक्षसों को भेजने और कृष्ण द्वारा उनका बध होने पर भी ,कंस हार नहीं मानता,मतलब दुष्ट प्रकृति वाले अंतिम श्वास तक दुष्कर्म, दुष्टता का त्याग नहीं करते। आचार्य जी ने संदेश दिया कि कलिकाल में भगवान की कथा श्रवण श्रेष्ठ भक्ति है।यह मुक्ति का सर्वोच्च, सरल साधन है। गंगा तट अवस्थित शिवपुरी में श्रीमद्भागवत सप्ताह यज्ञ स्थल पर भक्तों के जमावड़ा से एक नूतन कुंभ बना गया है। भक्तिमती माताओ बहनों, भाइयों ,श्रद्धालुओं की आस्था गजब की है। कथा पंडाल छोटा पड़ गया है। प्रसाद भंडारे की पूष्टि व्यवस्था है।कल कथा पूर्णाहुति के पश्चात रात्रि सात बजे से वृहद भंडारे की व्यवस्था की गयी है।
