
RKTV NEWS/बक्सर ( बिहार)27 जुलाई।कवयित्री एवं लेखिका डॉ. मीरा सिंह ‘मीरा’ हिंदी साहित्य जगत का एक प्रतिष्ठित नाम हैं। साहित्य के प्रति इनका समर्पण, सतत सृजनशीलता और शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका उन्हें विशिष्ट पहचान प्रदान करती है। उन्होंने अब तक अपने निजी व्यय से पाँच पुस्तकों का प्रकाशन कराया है, जो साहित्य-साधना के प्रति उनकी निष्ठा का प्रमाण है।
पेशे से एक समर्पित शिक्षिका डॉ. मीरा सिंह ‘मीरा’ का साहित्य से गहरा जुड़ाव उनके छात्र जीवन से ही रहा है। अध्ययन काल में आरंभ हुई उनकी साहित्य-यात्रा आज भी निरंतर गतिमान है।वे वयस्क साहित्य के साथ-साथ बाल साहित्य की भी सशक्त रचनाकार हैं। सरल, सरस और संस्कारपरक लेखन उनकी विशिष्ट पहचान है।
हाल ही में प्रकाशित उनका बाल काव्य-संग्रह ‘बकरी अब पढ़ने चल’ बाल साहित्यकारों, शिक्षकों तथा पाठकों के बीच विशेष रूप से सराहा गया है। इस कृति में निहित बाल-मन की सहज अभिव्यक्ति, कल्पनाशीलता और शिक्षाप्रद संदेशों ने इसे व्यापक लोकप्रियता दिलाई है।
हिंदी साहित्य में उनके उल्लेखनीय एवं उत्कृष्ट योगदान के लिए ‘स्वर्गविभा परिवार, शनापाड़ा (नवी मुंबई) द्वारा उन्हें “डॉ. तारा सिंह विशिष्ट राष्ट्रीय सम्मान–2026” से अलंकृत किया गया है।
उल्लेखनीय है कि डॉ. तारा सिंह हिंदी की प्रतिष्ठित छायावादी साहित्यकार, कलाकार एवं प्रधान संपादिका हैं। 6 मार्च 2026 को *स्वर्गविभा सम्मान योजना* के अंतर्गत देशभर के साहित्यकारों से निःशुल्क साहित्यिक प्रविष्टियाँ आमंत्रित की गई थीं। प्राप्त प्रविष्टियों के मूल्यांकन के उपरांत चयनित साहित्यकारों को **स्वर्गविभा सम्मान-पत्र** एवं **स्मृति-चिह्न (मोमेंटो)** निःशुल्क उनके पते पर प्रेषित किए गए।
चयनित सम्मानित साहित्यकारों की सूची में डॉ. मीरा सिंह ‘मीरा’ का नाम भी शामिल है। उन्हें यह राष्ट्रीय सम्मान उनके चर्चित बाल काव्य-संग्रह ‘बकरी अब पढ़ने चल’ के लिए प्रदान किया गया है। यह सम्मान न केवल उनकी साहित्य-साधना का गौरवपूर्ण प्रतिफल है, बल्कि हिंदी बाल साहित्य के क्षेत्र में उनके महत्त्वपूर्ण योगदान की राष्ट्रीय स्तर पर हुई सार्थक स्वीकृति भी है।
