
आरा /भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा) 27 जुलाई। स्थानीय पटेल बस पड़ाव परिसर स्थित भिखारी ठाकुर सांस्कृतिक मंच पर आज एशिया चैंपियन मृदंगवादक शत्रुंजय प्रसाद सिंह उर्फ बाबू ललन जी की जयंती उनके पौत्र पुष्पेंद्र नारायण सिंह की अध्यक्षता में मनाई गई। संचालन पत्रकार नरेंद्र सिंह ने किया।
भिखारी ठाकुर सामाजिक शोध संस्थान के बैनर तले आयोजित इस कार्यक्रम में बाबू ललन जी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर आयोजित परिचर्चा को संबोधित करते हुए शोधार्थी रवि प्रकाश सूरज, डॉ कुमार शीलभद्र, डॉ किरण कुमारी, सलील गीतकार कुमार अजय सिंह, शिक्षक मुन्ना राय, वादक देवमुनि पांडेय आदि ने कहा कि बाबू ललन जी को सिर्फ मृदंगवादक के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए बल्कि उनको मृदंग वादन का जनक कहा जाना चाहिए क्योंकि जलन की भावना से कलकत्ता में उनके सामने एक बहुत बड़ा मृदंग बनाकर रखा गया ताकि वो बजा नहीं सके मगर उन्होंने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए दोनों पैरों से मंच पर मृदंग बजाया और वाहवाही लूटी। मंच के रजत जयंती वर्ष के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अध्यक्षीय संबोधन में उनके पौत्र ने कई अन्य बातों की जानकारी देते हुए कहा कि सरकार की पहल पर जमीन दान देकर क्षत्रिय स्कूल बनवाया पर सरकारी पहल के बाद भी वहां अपना कोई अधिकार नहीं स्थापित किया।
चर्चा में बाबू ललन सिंह को पद्मश्री, भारत रत्न आदि देने की मांग भी उठी। इसके पूर्व बाबू ललन सिंह, उस्ताद बिस्मिल्ला खान, भिखारी ठाकुर आदि की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण किया गया। कार्यक्रम में शामिल लोगों में वरिष्ठ रंगकर्मी डॉ अनिल सिंह, कृष्णेंदु, रामसुख राय, कृष्ण प्रताप सिंह उर्फ पप्पू सिंह, अंबुज आकाश, सरफराज अहमद, संजय कुमार सिंह, सोनधारी सिंह, विजय बहादुर सिंह, जय प्रकाश जी आदि प्रमुख थे।
