
RKTV NEWS/देवघर ( झारखंड)28 मार्च।उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी के निर्देशानुसार आज बाल श्रम उन्मूलन अभियान के तहत गठित धावा-दल के द्वारा एनसीपीसीआर के दिशा निदेश पर देवघर-जसीडीह रोड़ के शहरी क्षेत्र के विभिन्न गैराजों/होटल का निरीक्षण किया गया, जिसमें शहर के एक ढाबा में कुल 3 बाल श्रमिकों को मुक्त कराया गया। सभी तीन बाल श्रमिकों को बाल कल्याण समिति देवघर को सुपुर्द कर दिया गया।
सर्वोच्च न्यायालय नई दिल्ली द्वारा एम. सी. मेहता बनाम् राज्य सरकार एवं अन्य के मामले संबंधी पीटीशन (सी) संख्या: 455/1996 में 10.12.1996 को दिए गए निर्णय के आलोक में जिला बाल एवं किशोर श्रमिक कोष में रू0 20,000.00 से 50000.00 तक रकम जमा कराया जा सकता है। साथ ही बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं उन्मुलन) अधिनियम, 1986 एवं संशोधित अधिनियम, 2016 की धारा-3 या धारा-3A के उल्लघंन के आधार पर धारा-14 के अनुसार नियोक्ता पर प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई की जा सकती है। विदित हो कि बाल श्रमिकों से कार्य कराना संज्ञेय अपराध है, जिसमें 20000 से 50,000 रुपये तक जुर्माना अथवा 06 माह से 02 वर्ष तक का कारावास या दोनो हो सकता है।
धावा-दल में श्रम प्रर्वतन पदाधिकारी, देवघर भूषण यादव, श्रम प्रर्वतन पदाधिकारी, मधुपर श्री दिव्यलोक प्रियदर्शी, श्रम प्रर्वतन पदाधिकारी, मोहनपुर टिंकु कुमार दास, श्रम प्रर्वतन पदाधिकारी, पालोजोरी दीपक कुमार साव, श्रम प्रर्वतन पदाधिकारी, करौं किरण बाला, एनजीओ आश्रय से आदर्श कुमार यादव, एवं प्रफुल कुमार मण्डल, एनजीओ चेतना विकास से अनीता पाठक, चाईल्ड हेल्पलाईन को-ऑर्डिनेटर अनिल पासवान एवं अन्य शामिल थे।


