
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)22 अक्टूबर।डा श्रीकृष्ण सिंह न्यास परिषद् भोजपुर आरा के तत्वावधान में बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री बिहार केशरी डा श्रीकृष्ण सिंह की 138 वीं जयंती बड़े धूम धाम से एस बी कालेज के विवेकानंद सभागार में मनाई गई। मुख्य अतिथि के रूप बोलते हुए रांची विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डा जंग बहादुर पाण्डेय ने कहा कि बिहार में अनेक मुख्यमंत्री हुए और भविष्य में भी होंगे लेकिन बिहार केशरी डा श्रीकृष्ण सिंह के समान ईमानदार,कर्मठ और न्याय प्रिय मुख्यमंत्री नहीं हुआ। भविष्य में होगा या नहीं इसमें संदेह है।वे आज भी अपनी कार्यशैली के कारण निर्विकल्प बने हुए हैं। अपने व्यक्तित्व और कृतित्व के कारण वे आधुनिक बिहार के विश्वकर्मा कहे जाते हैं। विशिष्ट अतिथि के रूप में बोलते हुए डा रवीन्द्र नाथ राय ने कहा कि डा श्रीकृष्ण सिंह राजनीति में अपनी स्वच्छ छवि के कारण अविस्मरणीय बने रहेंगे, जबकि डा नंदजी दूबे ने कहा कि महापुरुषों के चरित्र से ही राष्ट्र का निर्माण होता है। श्री बाबू राजनीतिज्ञ नहीं राष्ट्र नीतिज्ञ थे और दूरदर्शी राष्ट्र निर्माता थे।डा बलिराज ठाकुर ने कहा कि श्री बाबू राजनीति में वंशवाद के विरोधी थे और अपने जीते जी अपने दोनों बेटों को राजनीति में नहीं आने दिए। पूर्व मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डा के एन सिन्हा ने कहा की श्री बाबू गरीबों और निर्धनों के मसीहा थे।डा महेंद्र कुमार राय रसिक ने कहा कि श्री बाबू जैसे नेता आज राजनीति में दुर्लभ हैं। समारोह की अध्यक्षता कर रहे एस बी कालेज के पूर्व प्राचार्य डा राम बहादुर शर्मा ने कहा कि श्री बाबू में तीन दुर्लभ गुण थे-विद्वता, कर्मठता और कथनी और करनी में एकरूपता।इस अवसर पर जिन विद्वानों की सार्थक उपस्थिति से चार चांद लगा उनमें डा सत्य नारायण राय,डा रामजी राय,डा जनार्दन मिश्र,डा आनंद मोहन सिन्हा,डा दिनेश प्रसाद सिन्हा,डा मुक्तेश्वर उपाध्याय,डा उमेश राय,डा शुभम् कुमार,अंशु सिंह सिकरिवाल,डा विजय शंकर तिवारी डा किरण कुमारी,डा रेणु मिश्रा, राम कुमार राय,डा जनमेजय ओझा,डा कृष्ण कुमार कृष्णेंदु आदि प्रमुख हैं।डा राम बहादुर शर्मा ने कहा कि आज की राजनीति में ऐसे दुर्लभ गुणों से समन्वित राजनेता हमारे समाज में दुर्लभतम हैं।मंच से सामूहिक मांग की गई की श्री बाबू को मरणोपरांत भारत रत्न सम्मान मिलना चाहिए।वे इसके वास्तविक हकदार हैं।आगत अतिथियों का भव्य स्वागत एवं संचालन डा दिवाकर पाण्डेय ने, सरस्वती वंदना डा ममता मिश्रा ने और धन्यवाद ज्ञापन डा नथुनी पाण्डेय ने किया। राष्ट्र गान से संगोष्ठी की पूर्णाहुति हुई।
