
खबरें अखबार की..!
मां ने मार दिया बच्चों को अपने ही हाथों से,
पिता ने दिया धक्का अपनों को मझदार किनारों से।
बीवी पति के कत्ल में हिस्सेदार बन गई,
बहन भी जायदाद के लिए भाई से पराई हो गई।
भाई ने इज्जत को बहन को मौत के हवाले किया, पति ने अपनी पत्नी की अस्मत का किया सौदा।
बेटे ने लालच में अंधा हो मां-बाप को डाला मार, वहीं एक बेटी ने रुकावट बने अपनों को दे डाला ज़हर।
भाई ने भाई को जमीन के टुकड़े के लिए दिया काट।
देवरानी जेठानी के झगड़ों ने परिवार को बांट दिया।।
राजनीति में लोग एक दूसरे की टांग खींचते,
निजस्वार्थ में अपशब्दों की कीचड़ एक दूसरे पर उछालते।
अखबार में इससे ज्यादा पढ़ने को कहां कुछ मिलता है?
हर इंसान अपनी-अपनी गरज से जिंदगी को जीता है।
सच कहे,संसार की खबरें जानने को मन नहीं करता, दिल दुखाने वाली खबरों के सिवा अब अखबार में कुछ नहीं मिलता।
साभार “शब्दों की सरिता” मंच
