
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)12 अक्टूबर।लोकनायक जयप्रकाश नारायण के विचारों में व्यवस्था परिवर्तन का तत्व निहित है जेपी का यह स्पष्ट चिंतन था कि सत्ता परिवर्तन से असली सूरज नहीं मिलने वाला है असली सूरज तो व्यवस्था परिवर्तन से मिलेगा ।व्यवस्था परिवर्तन के लिए गांधी के हिंद स्वराज के आधार पर संविधान संरचना की आवश्यकता है। लोकनायक जयप्रकाश नारायण जी की संपूर्ण क्रांति अवधारणा से भारत का सामग्र विकास होगा और भारत विश्व के गुरु पद पर आसीन हो सकता है। ये बातें जेपी जयंती पर विश्व आचार्य डॉक्टर धर्मेंद्र राष्ट्रीय अध्यक्ष अपने प्रबोधन यात्रा के संदर्भ में जानकारी देते हुए कहा भारत कृषि और ऋषि प्रधान राष्ट्र है। कृषक खेतों खलिहानों में साधना करते हैं। ऋषि आरन्यक में लोकहित के लिए शोध में लगे रहते हैं। प्राप्त अनुभूति को ऋगवेद की ऋचा चिकिंत्वासो अचेतसमनयंति को सार्थक करते हुए पदयात्रा, आचार्य संगीति,कुंभ के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास करते श्रमण संस्कृति का संवर्धन करते हैं। संत विनोबा द्वारा संस्थापित चिंतकों का व्यासपीठ आचार्यकुल इस परंपरा को बढ़ा रहा है। आचार्यकुल संत विनोबा की जयंती 11, सितंबर से 11अक्तूबर जेपी जयंती तक प्रवोधनपर्व यात्रा का देश में संचालित करता है। इस वर्ष आचार्य धर्मेन्द्र राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्यकुल ने इस यात्रा का शुभारंभ असम में अवस्थित शांति साधना आश्रम से सर्वोदय के ज्येष्ठ कार्यकर्ता हेम भाई के संयोजकत्व में किया।
