
RKTV NEWS/नई दिल्ली, 26 सितम्बर।राष्ट्र्रीय सुरक्षा जागरण मंच (RSJM) ने अपने प्रोजेक्ट नव जागरण: कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रेटेजिक डिस्कोर्स (NJ-CSD) के अंतर्गत डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉन्फ्रेंस सेंटर (लाइब्रेरी) में “बदलता भू-राजनीतिक परिदृश्य: नए विश्व क्रम में विशाल भारत की स्थिति” विषय पर अपनी 5वीं संगोष्ठी आयोजित की। इस अवसर पर मुख्य वक्ता ले. जनरल विष्णु कांत चतुर्वेदी (से.नि.) PVSM, AVSM, SM और मनोहर पर्रिकर इंस्टीट्यूट फॉर डिफेन्स स्टडीज़ एंड एनालिसिस (MP-IDSA) के एसोसिएट फेलो डॉ. आनंद कुमार रहे। साथ ही अध्यक्षता प्राचार्य एवं ओएसडी प्रो. सदानंद प्रसाद ने की और संचालन राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) विक्रमादित्य सिंह ने किया। इस संगोष्ठी का सफल आयोजन HHRS (आरएसजेएम की पहल), लोक संभवण त्रैमासिक पत्रिका तथा रक्षााम (डिजिटल त्रैमासिक शोध पत्रिका) के सहयोग से किया गया।
संगोष्ठी के मुख्य वक्ता ले. जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी (से.नि.) PVSM, AVSM, SM ने अपने संबोधन में कहा कि अब दुनिया एकध्रुवीय नहीं रही, बल्कि द्विध्रुवीय हो चुकी है; इज़राइल अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है और किसी भी राष्ट्र को सम्मान तब मिलता है जब वह अपनी रक्षा और राष्ट्रहित के लिए संघर्ष करता है। उन्होंने कहा कि भारत डिजिटल इकॉनमी में विश्व नेता बन रहा है और उसकी विदेश नीति सफल रही है। उन्होंने पड़ोसी देशों का उल्लेख करते हुए कहा कि बांग्लादेश की प्रगति में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण रही है, पाकिस्तान को भारत को बड़े भाई के रूप में देखना चाहिए, और नेपाल-भारत का रिश्ता परस्पर आवश्यकता का है। उन्होंने नवाचार, रक्षा क्षमताओं और युवाओं के लिए स्पोर्ट्स सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत का भविष्य उसकी जनता और युवाओं के हाथों में है और नागरिकों का सेना के साथ खड़ा रहना ही सबसे बड़ी शक्ति है। अपने उद्बोधन में उन्होंने राष्ट्र प्रथम, राष्ट्र प्रेम, राष्ट्र सेवा, राष्ट्र सम्मान और राष्ट्र भक्ति की भावना को सर्वोपरि बताते हुए कहा कि राजनीति में ध्रुवीकरण और आंतरिक स्थिरता की चुनौतियों के बीच हर नागरिक को भारत के विकास में योगदान देना चाहिए।
साथ ही दूसरे मुख्य वक्ता डॉ. आनंद कुमार, एसोसिएट फेलो, मनोहर पर्रिकर इंस्टीट्यूट फॉर डिफेन्स स्टडीज़ एंड एनालिसिस (MP-IDSA) ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध ने यूरोप की सुरक्षा संरचना को बदल दिया है और इंडो-पैसिफिक में चीन के साथ संभावित संघर्ष लगभग वैसा ही है जैसा अमेरिका-इज़राइल की गाज़ा में भूमिका रही। उन्होंने बताया कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद विश्व व्यवस्था का निर्माण हुआ, 1990 तक रूल-बेस्ड ऑर्डर कायम रहा और 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद नई रणनीतिक दिशाएँ उभरीं।
आज भारत के सामने आत्मनिर्भरता, तकनीकी विकास, बहुभाषिक रणनीति और एशिया की ओर खिसकती वैश्विक अर्थव्यवस्था में अवसर हैं। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित युद्ध निर्णायक होगा और भारत को एआई शक्ति बनने की दिशा में तेज़ी से बढ़ना होगा। भारत की सामरिक स्थिति, चीन के दबाव, तकनीकी आत्मनिर्भरता, मेक इन इंडिया और घरेलू आर्थिक सुधार आवश्यक हैं, क्योंकि मजबूत अर्थव्यवस्था के बिना भारत वैश्विक प्रभाव नहीं बढ़ा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि अंतरिक्ष अन्वेषण, क्रिटिकल टेक्नोलॉजी और एआई-एक्स में भारत के लिए नए अवसर हैं, हालांकि इनके साथ चुनौतियाँ और संवेदनशीलताएँ भी जुड़ी हुई हैं।
इस संगोष्ठी ने स्पष्ट किया कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत के सामने अनेक चुनौतियाँ हैं, लेकिन आत्मनिर्भरता, तकनीकी प्रगति, मज़बूत अर्थव्यवस्था और राष्ट्रहित सर्वोपरि रखने की नीति से भारत न केवल एशिया बल्कि विश्व व्यवस्था में एक निर्णायक शक्ति के रूप में उभर सकता है।
