अस्पतालों, मॉल, कोचिंग, व्यवसायिक संस्थानों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में अग्नि सुरक्षा को लेकर विशेष अभियान चलाने का निर्देश।
RKTV NEWS/पटना(बिहार)12 मई। बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण में राज्यभर में अग्निकांड की रोकथाम, जनजागरूकता, मॉक ड्रिल, अस्पतालों एवं सार्वजनिक स्थलों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था तथा जिलों की तैयारियों की समीक्षा को लेकर उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता उपाध्यक्ष डॉ. उदयकांत ने की। बैठक में सदस्यगण, प्राधिकरण के सचिव मो. वारिस खान, विभिन्न विभागों के वरीय पदाधिकारी, सभी जिलों से अपर समाहर्ता (आपदा प्रबंधन), जिला अग्निशमन पदाधिकारी एवं अन्य अधिकारी शामिल हुए।
बैठक में बताया गया कि राज्य में अग्नि सुरक्षा कार्ययोजना के तहत जोखिम आकलन, जनजागरूकता एवं क्षति न्यूनीकरण के लिए लगातार कार्य किया जा रहा है। अग्निशमन सेवा द्वारा राज्यभर में मॉक ड्रिल, नुक्कड़ नाटक, एलईडी प्रचार, पोस्टर, पम्पलेट, सोशल मीडिया अभियान एवं जनप्रतिनिधियों के माध्यम से व्यापक जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
जिलों में लगातार प्रचार-प्रसार के कारण लोगों में जागरूकता बढ़ी है तथा बड़ी घटनाओं में कमी के संकेत मिले हैं।
बैठक में बताया गया कि राज्यभर में 225 अग्निकांड हॉटस्पॉट क्षेत्रों की पहचान की गई है। समीक्षा में सामने आया कि हाल के वर्षों में शॉर्ट सर्किट अग्निकांड का प्रमुख कारण बनकर उभरा है। मोतिहारी, दरभंगा, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर एवं पटना सहित कई जिलों ने अधिकांश घटनाओं के पीछे विद्युत गड़बड़ियों को जिम्मेदार बताया। इस पर निर्देश दिया गया कि घनी आबादी वाले क्षेत्रों, अस्पतालों, मॉल, कोचिंग संस्थानों एवं पुराने भवनों का विद्युत सुरक्षा ऑडिट कराया जाए तथा एमसीबी एवं ईएलसीबी जैसे सुरक्षा उपकरणों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाए।
बैठक में अस्पतालों एवं भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थलों की अग्नि सुरक्षा को लेकर विशेष चिंता व्यक्त की गई। सभी जिलों को निर्देश दिया गया कि अस्पतालों, मॉल, सिनेमा हॉल, कोचिंग संस्थानों एवं अन्य सार्वजनिक भवनों में अग्नि सुरक्षा के 16 बिंदुओं वाले मानकों के आधार पर जांच सुनिश्चित की जाए। पटना के प्रमुख अस्पतालों, मुसल्लापुर हाट एवं बहादुरपुर क्षेत्र के कोचिंग संस्थानों की विशेष समीक्षा के निर्देश भी दिए गए।
विभिन्न जिलों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि पंचायत स्तर पर मॉक ड्रिल, प्रोजेक्टर शो, नुक्कड़ नाटक, फ्लेक्स, पोस्टर एवं जनप्रतिनिधियों के माध्यम से व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। ग्रामीण विकास विभाग एवं जीविका की ओर से सुझाव दिया गया कि राज्य के लगभग 18 हजार सीएलएफ स्तर पर नियमित अग्नि सुरक्षा कार्यक्रम आयोजित किए जाएं तथा जीविका दीदियों, आंगनवाड़ी सेविकाओं, आशा कार्यकर्ताओं एवं पंचायत प्रतिनिधियों को अभियान से प्रभावी ढंग से जोड़ा जाए।
बैठक में स्कूल एवं कॉलेज स्तर पर फायर सेफ्टी गेम, प्रशिक्षण एवं मॉक ड्रिल आयोजित करने का सुझाव दिया गया। साथ ही अग्निशमन अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि किसी भी कॉल को अनअटेंडेड न छोड़ा जाए तथा सभी स्तरों पर समन्वय मजबूत कर अग्निकांड की घटनाओं को कम करने के लिए प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। अंत में सभी जिलों को आगामी मॉक ड्रिल की जानकारी राज्य स्तर पर साझा करने एवं मॉक ड्रिल आयोजन की लघु फिल्म उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया।

