
RKTV NEWS/आरा (भोजपुर)12 मई।शास्त्रीय संगीत के प्रमुख केंद्र में आरा की ख्याति रही है। कालांतर में संगीत की गतिविधियों के कारण आरा का एक स्वर्णिम इतिहास बना है जिसमें संगीत द्वारकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। स्व. बक्शी अवधेश कुमार श्रीवास्तव ने 35 तक वर्षों तक आरा के श्री कृष्ण जन्मोत्सव संगीत समारोह का आयोजन कर यहाँ की संगीत परंपरा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हैं।
उक्त बातें सुविख्यात तबला वादक डॉ. लाल बाबू निराला ने कही। स्व. अवधेश जी के पुण्य स्मरण में आयोजित संगीत संध्या का उद्घाटन सुविख्यात तबला वादक डॉ. लाल बाबू निराला ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर डॉ. निराला ने स्वतंत्र तबला वादन प्रस्तुत कर समां बाँधा। इस अवसर पर गुरु बक्शी विकास ने कहा कि आरा में संगीत के कद्रदानों की कमी महसूस की जा रही है।
संगीतद्वारकों के आभाव का शास्त्रीय संगीत पर प्रभाव पड़ रहा है। वही गायिका श्रेया पांडेय ने गजल नियत-ए-शौक भर ना जाए कहीं व सलोना सा सजन है और मैं हूँ समेत कई गजलों को प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। नन्ही नृत्यांगना शिवाक्षी ने रोको न डगर मोर श्याम पर अभिनय के माध्यम से राधा व कृष्ण के नोक झोंक की मनोहारी प्रस्तुति की।
डॉ. ट्विंकल केशरी व स्मिता सिंह ने कथक नृत्य की शुरुआत माँ दुर्गा की स्तुति से करते हुए तीन ताल में उपज, ठाट, आमद,परन समेत मीरा के भजन पर भाव अभिनय प्रस्तुत कर तालियां बटोरी। वही चाँदनी व माही ने राग संगीत की प्रस्तुति से वाहवाही लूटी। मंच संचालन आदित्या श्रीवास्तव व धन्यवाद ज्ञापन गुरु बक्शी विकास ने किया।
