इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय और आई.टी.सी. संगीत रिसर्च एकेडमी का संयुक्त आयोजन।

देबोर्षि भट्टाचार्जी एवं पुष्कर भागवत की प्रस्तुति ने खूब तालियां बटोरीं।
खैरागढ़/छत्तीसगढ़ (रवींद्र पांडेय) 22 सितंबर। छत्तीसगढ़ शासन के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ एवं आई.टी.सी. संगीत रिसर्च एकेडमी कोलकाता के संयुक्त तत्त्वावधान में ‘स्वर सेतु’ सांगीतिक संध्या का आयोजन किया गया। पहली प्रस्तुति में वायलिन वादक पुष्कर भागवत ने तबला संगतकार अशोक मुखर्जी के साथ राग शुद्ध कल्याण एवं देश प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। दूसरी प्रस्तुति में आई.टी.सी. संगीत अनुसंधान अकादमी कोलकाता के शास्त्रीय गायक देबोर्षि भट्टाचार्जी ने राग पूरिया में विलंबित, मध्य एवं द्रुत लय की मनमोहक प्रस्तुति दी तथा कार्यक्रम का समापन राग सोहिनी से किया। उनके साथ तबले पर अशोक मुखर्जी और हारमोनियम पर ज्योतिर्मोय बैनर्जी ने संगति प्रदान की। दोनों ही कलाकारों की मनमोहक प्रस्तुति ने खूब तालियां बटोरीं।
कुलपति प्रो. डॉ. लवली शर्मा के संरक्षण में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। इसमें पूर्व प्रोफेसर पं. मुकुंद नारायण भाले, प्रो. डॉ. मृदुला शुक्ला, प्रो. डॉ. नमन दत्त और डॉ. लिकेश्वर वर्मा उपस्थित रहे।
सांगीतिक कार्यक्रम से पहले विश्वविद्यालय में संपन्न हुए फिट इंडिया अभियान के तहत 3 दिन के राष्ट्रीय खेल दिवस में हिस्सा लेने वाले विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र का वितरण भी अतिथियों द्वारा किया गया।
इस आयोजन में मंच सज्जा एवं स्वागत में डॉ. हरिओम हरि, रोहिणी साहू और विशाली कुमारी, मंच व्यवस्था में विवेक नवरे, डॉ. दिवाकर कश्यप और डॉ. शिवनारायण मोरे का योगदान था। मंच संचालन सुप्रीति मलिक व वर्षिता शुक्ला ने किया। अन्य व्यवस्थाओं में डॉ. ईशान दुबे, डॉ. पुनीत पटेल, ऋषभ मिस्त्री, डॉ. कविता व योगेंद्र सिंह ठाकुर, पुलकित कुशवाहा तथा मयंक बिसेन व किशन दास महंत सहित अनेक सहयोगियों का योगदान सराहनीय रहा।
कार्यक्रम का संचालन संगीत संकाय के सहायक प्राध्यापक जगदेव नेताम ने किया। अंत में संयोजक डॉ. लिकेश्वर वर्मा ने कुलपति डॉ. लवली शर्मा, कुलसचिव डॉ. सौमित्र तिवारी और मार्गदर्शक प्रो. डॉ. नमन दत्त सहित सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। ‘स्वर सेतु’ कार्यक्रम छत्तीसगढ़ शासन के रजत जयंती वर्ष का हिस्सा बनकर भारतीय शास्त्रीय संगीत की परंपरा और नवाचार का प्रेरणादायी सेतु सिद्ध हुआ।

