राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप छपरौली में विद्यार्थियों के लिए बनाई गई आधुनिक खगोलशास्त्र लैब।

बागपत में छपरौली ब्लॉक संसाधन केंद्र में बनी आधुनिक एस्ट्रॉनोमी लैब, विद्यार्थियों को मिलेगा ब्रह्मांड का अनुभव।

अब केवल तारे नहीं गिनेंगे बल्कि विज्ञान की दुनिया में चमक बिखरेगे विद्यार्थी।
RKTV NEWS/बागपत (उत्तर प्रदेश)30 अगस्त।आसमान के रहस्यों से रूबरू होने का मौका जनपद बागपत के छपरौली ब्लॉक के विद्यार्थियों को मिला है, जहां खगोलशास्त्र लैब ने उनके सपनों को पंख दिए हैं। जिलाधिकारी अस्मिता लाल के दूरदर्शी विचार और प्रशासनिक पहल ने जनपद बागपत में विज्ञान शिक्षा को नई दिशा दी है। विकास क्षेत्र छपरौली में ब्लॉक संसाधन केंद्र के प्रांगण में एक अत्याधुनिक एस्ट्रोनोमी लैब यानि खगोलशास्त्र प्रयोगशाला का निर्माण किया गया है।
जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय की छात्राओं के हाथों से लैब का फीता काटकर उद्घाटन कराया। प्रयोगशाला में 45 प्रकार के प्रयोग और उपकरण उपलब्ध हैं जिनमें एंटी ग्रेविटी खिलौना, न्यूटन के तीनों नियमों से जुड़े प्रयोग, मैक्सवेल व्हील, दिन और रात, सूर्य एवं चंद्र ग्रहण का प्रदर्शन, पिनहोल प्रोजेक्टर, सूर्य के प्रकाश से दिशा ज्ञात करने का तरीका, दिन में तारे न दिखने का कारण, एडॉप्टर के साथ चंद्रमा के चरण, न्यूटन कलर डिस्क, प्रकाश के प्राथमिक रंग, राम यन्त्र, स्पेक्ट्रोस्कोप, लेंस मिरर किट तथा बहुउद्देश्यीय बैटरी एलिमिनेटर के साथ रे ऑप्टिक किट शामिल हैं। लैब को स्पार्क एस्ट्रोनोमी संस्थान के तकनीकी सहयोग से तैयार किया गया है।
इसी क्रम में ‘आकाश नीला क्यों है’ का प्रयोग, ट्यूनिंग कांटा, अन्य ग्रहों पर भार का अनुभव, सौरमंडल से संबंधित मॉडल, विभिन्न प्रकार की टेलीस्कोप किटें जैसे यौगिक सूक्ष्मदर्शी, गैलीलियन, खगोलीय तथा स्थलीय टेलीस्कोप, लेजर सूचक, न्यूटोनियन रेफ्रेक्टर और न्यूटोनियन रिफ्लेक्टर टेलीस्कोप, धूप-घड़ी, सौर चश्मा, प्लैनिस्फ़ेयर और “हम सितारों से बने हैं” जैसी गतिविधियाँ शामिल हैं। इसके अतिरिक्त ग्रेफाइट किट, परमाणु गोले, निस्पंदन मॉडल, चाइना डिश द्वारा वाष्पीकरण, शैल, पदार्थ एवं खनिज समुच्चय, राशि नक्षत्र, यौगिक सूक्ष्मदर्शी, मानव शरीर से संबंधित मॉडल जैसे आँख, गुर्दा, हृदय, पाचन तंत्र एवं कान के मॉडल, साथ ही वर्नियर कैलिपर, स्कू गेज, वी.आर. बॉक्स और ए.आर. कार्ड जैसे आधुनिक उपकरण भी विद्यार्थियों को विज्ञान को और अधिक रोचक एवं व्यावहारिक रूप से समझने का अवसर प्रदान करेंगे।
इस प्रयोगशाला का सीधा लाभ छपरौली ब्लॉक के विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा अब इन छात्राओं के लिए ब्रह्मांड के रहस्यों को प्रत्यक्ष अनुभव के साथ जानने का अवसर उपलब्ध होगा। यहां टेलीस्कोप, प्रकाशिकी उपकरण, स्पेक्ट्रोस्कोपी किट, तारामंडल चार्ट और खगोलीय सॉफ्टवेयर जैसी आधुनिक सुविधाएं होंगी, जो विद्यार्थियों को केवल किताबों तक सीमित ज्ञान से आगे ले जाकर वास्तविक प्रयोगात्मक शिक्षा देंगी।
इस प्रयोगशाला के मुख्य उद्देश्यों में प्रेक्षण कौशल का विकास, खगोलशास्त्रीय अवधारणाओं की गहरी समझ और सहयोग व संप्रेषण को प्रोत्साहन शामिल हैं। विद्यार्थियों टेलीस्कोप और अन्य यंत्रों का उपयोग करना सीखेंगी, खगोलीय समन्वय प्रणाली को समझेंगी और आकाश में वस्तुओं की स्थिति पहचानने में सक्षम होंगी। वे ग्रहों की गति, प्रकाश और वर्णक्रम जैसी अवधारणाओं को प्रयोगात्मक रूप से लागू कर पाएंगी।
लैब में कई महत्वपूर्ण विषय कवर किए जाएंगे, जिनमें आकाशीय गोला और समन्वय प्रणाली, चंद्रमा के चरण और ग्रहण, ग्रहों की प्रतिगामी गति, टेलीस्कोप और प्रकाशिकी, प्रकाश और वर्णक्रम, तारकीय गुणधर्म, प्रेक्षणीय परियोजनाएं, समय और कैलेंडर, खगोलीय माप और उन्नत स्तर पर एस्ट्रोफोटोग्राफी शामिल हैं। इन विषयों के अध्ययन से छात्राओं में न केवल वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित होगा, बल्कि तारों और ग्रहों की दूरी, गति और तापमान का विश्लेषण करने जैसी व्यावहारिक क्षमताएं भी आएंगी।
यह प्रयोगशाला जिलेभर के विज्ञान-प्रेमी विद्यार्थियों के लिए एक ज्ञान केंद्र के रूप में विकसित की जा सकेगी जिसके आधार पर एस्ट्रोनॉमी लैब को सभी विकास खंडों में स्थापित किया जाएगा। साथ ही छपरौली विकास खंड के विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों को इस एस्ट्रोनॉमी लैब का भ्रमण कराने की भी तैयारी है।
वंशिका, मानवी, रिया, तमन्ना आदि छात्राओं ने उत्साह के साथ बताया कि इस लैब के माध्यम से वह सुदूर स्थित चंद्रमा एवं ग्रहों को देख सकेगी और विज्ञान विषय में रुचि बढ़ेगी। इस पहल के लिए उन्होंने प्रशासन का आभार प्रकट किया। मुख्य शिक्षण परिणामों में रात्रि आकाश की समझ, खगोलीय उपकरणों का उपयोग, प्रेक्षण तकनीक, प्रकाश और वर्णक्रम का विश्लेषण, तारकीय और ग्रह संबंधी गुणधर्मों का अध्ययन, खगोलीय यांत्रिकी और खगोलीय समय व कैलेंडर की जानकारी शामिल हैं। साथ ही छात्राएं एस्ट्रोनोमी सॉफ्टवेयर का उपयोग करना सीखेंगी, जिससे उन्हें आकाशीय पिंडों की सटीक स्थिति और गति का अध्ययन करने का अवसर मिलेगा।
प्रयोगशाला में नाइट-स्काई प्रेक्षण, ग्रहण व ग्रह गति के मॉडल बनाना, टेलीस्कोप से डेटा विश्लेषण, एस्ट्रोफोटोग्राफी, सॉफ्टवेयर आधारित सिमुलेशन और समूह-प्रस्तुति जैसी गतिविधियां होंगी। यह प्रयोगशाला न केवल कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय के लिए, बल्कि भविष्य में पूरे जिले के विज्ञान-प्रेमी विद्यार्थियों के लिए एक ज्ञान केंद्र के रूप में विकसित की जा सकती है।
जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने कहा, छात्र- छात्राओं के सपनों को आकाश की ऊंचाइयों तक पहुंचाना ही इस लैब का उद्देश्य है। जब एक ग्रामीण बालिका खुद टेलीस्कोप से चंद्रमा देखेगी, तो उसमें आत्मविश्वास और वैज्ञानिक दृष्टिकोण दोनों का विकास होगा।” यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप है, जो विज्ञान और तकनीक की पढ़ाई को प्रयोगात्मक और खोजपरक बनाने पर जोर देती है। आने वाले वर्षों में यहीं से निकलने वाली बालिकाएं न केवल तारे गिनेंगी, बल्कि विज्ञान की दुनिया में अपनी चमक भी बिखेरेंगी।
इस अवसर पर पूर्व विधायक सहेंद्र सिंह रमाला,एसडीएम बड़ौत भावना सिंह, बेसिक शिक्षा अधिकारी गीता चौधरी, नायब तहसीलदार अतुल रघुवंशी, जिला सूचना अधिकारी राहुल भाटी, उड़ान साइंस क्लब समन्वयक अमन कुमार आदि मौजूद रहे।

