आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा) 01 सितंबर।विश्व संस्कृत दिवस के उपलक्ष्य में संस्कृत विभाग,जगजीवन कॉलेज,आरा द्वारा त्रिदिवसीय संस्कृत सम्भाषण कार्यशाला का आरम्भ हुआ। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता काॅलेज की प्राचार्या डॉ.आभा सिंह ने किया। दीप प्रज्ज्वलन तथा माॅं सरस्वती देवी के चित्र एवं बाबू जगजीवन राम की प्रतिमा पर माल्यार्पण के बाद प्रारंभ हुआ।साथ हुआ। वैदिक मङ्गलाचरण अंकित मिश्रा एवं लौकिक मङ्गलाचरण जीवन चन्द्रवंशी ने प्रस्तुत किया । कुन्दन एवं दीपांशु ने संस्कृत में स्वागत गान प्रस्तुत किया। अतिथियों का परिचय सह स्वागत तथा संचालन संस्कृत विभाग के अध्यक्ष डॉ.सत्येन्द्र पाण्डेय ने किया।
अपने अध्यक्षीय भाषण में कॉलेज की प्राचार्या डॉ. आभा सिंह ने संस्कृत भाषा में ज्ञान विज्ञान वेद वेदांत सहित समस्त विधाओं का ग्रंथ है विश्व की सबसे पहली भाषा और देवनागरी लिपि का पहला ग्रंथ है। इन्होंने नागेश भट्ट के लिखित पंचानबे ग्रंथ की चर्चा की और कहा की उनके एक-दो शास्त्रों को पढ़कर भी जीवन सफल बनाया जा सकता है।चरक ऋषि द्वारा लिखित चिकित्सा शास्त्र,शास्त्रीय संगीत वास्तु कला से लेकर मौजूदा स्पेस विज्ञान, चंद्रयान तीन तक की चर्चा की। इन्होंने कहा की संस्कृति को बचाना है,आगे ले चलना है , विश्व गुरु बना है तो संस्कृत भाषा को समृद्ध बनाना होगा। यह सबका सामुहिक दायित्व है।
अपने वक्तव्य में मानविकी संकाय, वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के अध्यक्ष प्रो.डॉ. प्रकाश राय ने संस्कृत के महत्व पर प्रकाश डाला एवं भोजकालीन संस्कृत में व्यवहार को प्रदर्शित कर संस्कृत भाषा को जन-भाषा सिद्ध किया। स्नातकोत्तर संस्कृत विभाग, वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ.अनुज रजक ने संस्कृत के अध्ययन से प्राप्त होने वाले संस्कार एवं व्यवसाय से अवगत कराया।
श्री सनातन शक्तिपीठ के डॉ.भारत भूषण ने संस्कृत भाषा के प्राचीन गौरव, विदेशियों का संस्कृत भाषा के प्रति आकर्षण, एवं देश के लोगों का संस्कृत के प्रति उदासीनता को रखा, और आग्रह किया कि हम चाहे किसी भी विषय को पढ़े पर हमें भारतीय होने के नाते किसी भी रूप में संस्कृत भाषा का अध्ययन अवश्य करना चाहिए।
राजेश मिश्र ने संस्कृत मैं परिचय का पाठ पढ़ाया। धन्यवाद ज्ञापन हिंदी विभाग के वरिष्ठ आचार्य डॉ.शिरोमणि सिंह ने किया। डॉ अजय कुमार तथा शिक्षक श्री चंदन कुमार ,डॉ.अमरेश कुमार, डॉ शहजाद अख्तर अंसारी,डॉ. अरशद अली, डॉ. असलम परवेज, डा. गुलाब फलाहारी, प्रो राजीव नयन एवं सूर्य नारायण प्रसाद, डॉ गोपाल प्रसाद,डॉ. मो. शहाबुद्दीन एवं डॉ रामबाबू चौपाल एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।
